iPhone 15 Heating Issue: आईफोन 15 में हीटिंग और नेटवर्क की दिक्कत पर ऐप्पल को झटका; रोहतक उपभोक्ता अदालत ने दिया ₹45,500 रिफंड और जुर्माने का आदेश

हरियाणा के रोहतक स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने iPhone 15 में लगातार ओवरहीटिंग, ब्लूटूथ और नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्याओं के मामले में एप्पल इंडिया को उपभोक्ता को ₹45,500 रिफंड करने और ₹10,000 का मुआवजा व कानूनी खर्च देने का आदेश दिया है. अदालत ने फोन में अनधिकृत छेड़छाड़ के कंपनी के दावे को खारिज कर दिया.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: X)

रोहतक/नई दिल्ली: हरियाणा (Haryana) की एक जिला उपभोक्ता अदालत ने दिग्गज टेक कंपनी ऐप्पल इंडिया (Apple India) को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराते हुए एक ग्राहक को ₹45,500 रिफंड करने का निर्देश दिया है. यह आदेश आईफोन 15 (iPhone 15) में लगातार ओवरहीटिंग, ब्लूटूथ डिस्कनेक्ट और नेटवर्क की खराबी को लेकर दायर शिकायत पर दिया गया.

रोहतक जिला उपभोक्ता आयोग ने यह फैसला सुनाते हुए एप्पल के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें कंपनी ने फोन के साथ 'अनधिकृत छेड़छाड़' (Unauthorized Tampering) होने का दावा किया था. इसके साथ ही फोरम ने कंपनी को ₹5,000 मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे और ₹5,000 कानूनी खर्च के रूप में अदा करने का भी आदेश दिया है. यह भी पढ़ें: Flipkart Freedom Sale 2026: iPhone 17, iPhone 16 समेत कई स्मार्टफोन्स पर भारी छूट, जानें लेटेस्ट डील्स

खरीद के तुरंत बाद शुरू हुईं तकनीकी समस्याएं

आयोग के आदेश के अनुसार, रोहतक के अधिवक्ता राजबीर फोगाट ने जनवरी 2024 में ₹64,999 में एक आईफोन 15 खरीदा था. शिकायतकर्ता का आरोप था कि फोन खरीदने के कुछ समय बाद ही उसमें अत्यधिक गर्म होने (Overheating), ब्लूटूथ कनेक्टिविटी टूटने, कॉल ड्रॉप और नेटवर्क गायब होने जैसी दिक्कतें आने लगीं.

उपभोक्ता ने एप्पल के अधिकृत सर्विस सेंटर और ग्राहक सेवा से संपर्क किया. कर्मचारियों के कहने पर सॉफ्टवेयर अपडेट किया गया, अतिरिक्त आईक्लाउड (iCloud) स्टोरेज खरीदी गई और यहां तक कि नेटवर्क की समस्या समझकर सिम कार्ड ऑपरेटर भी बदला गया, लेकिन फोन की समस्याएं दूर नहीं हुईं. इसके बाद अधिकृत सर्विस सेंटर ने फोन को ठीक किए बिना ही वापस लौटा दिया.

आईफोन 15 में हीटिंग और नेटवर्क की दिक्कत पर ऐप्पल को झटका

एप्पल का तर्क: अनधिकृत बदलाव के कारण वारंटी रद्द

शिकायत के जवाब में एप्पल इंडिया ने फोन में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट होने से इनकार किया था.  कंपनी का दावा था कि डिवाइस की जांच के दौरान बटनों में धूल, गैर-अधिकृत रियर कैमरा लेंस, बदला हुआ बैक ग्लास और माइक्रोफोन में खराबी पाई गई थी.

एप्पल ने दलील दी कि एक साल की वारंटी पॉलिसी में अनधिकृत छेड़छाड़ या बाहरी पार्ट्स वाले फोन कवर नहीं होते, इसलिए वारंटी के तहत फ्री सर्विस नहीं दी जा सकती.

उपभोक्ता आयोग की टिप्पणी: केवल जॉब शीट पर टिप्पणी पर्याप्त नहीं

जिला आयोग के अध्यक्ष नगेंद्र सिंह कादियान, सदस्य तृप्ति पन्नू और विजेंद्र सिंह की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि फोन वारंटी अवधि के भीतर ही खराब हुआ था.

आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा:

रिफंड और 9% ब्याज के साथ भुगतान का निर्देश

अदालत ने माना कि वारंटी अवधि के दौरान वैध साक्ष्यों के बिना मरम्मत से मना करना उपभोक्ता अधिकारों का हनन है.

आयोग ने डिवाइस के इस्तेमाल को देखते हुए 30 प्रतिशत मूल्यह्रास (Depreciation) काटकर ₹45,500 की राशि 9% वार्षिक ब्याज के साथ (शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान तक) वापस करने का आदेश दिया. साथ ही ₹10,000 का अतिरिक्त हर्जाना और वाद खर्च भी 45 दिनों के भीतर भरने का निर्देश दिया गया है.

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