Who is Roop Singh? कौन हैं रूप सिंह? वे महान हॉकी खिलाड़ी जिनके कायल थे हिटलर, इनके नाम पर जर्मनी में रोड
अपने बड़े भाई मेजर ध्यानचंद की तरह रूप सिंह ने भी हॉकी जगत में नाम कमाया. साल 1932 और 1936 की ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट टीम का अहम हिस्सा रहे रूप सिंह को उनकी गति और शानदार स्कोरिंग क्षमता के लिए पहचाना गया, जिन्होंने भारतीय हॉकी को नई ऊंचाइयां दीं. 8 सितंबर 1908 को जबलपुर में जन्मे रूप सिंह ने अपने बड़े भाई मेजर ध्यानचंद के नक्शेकदम पर चलते हुए हॉकी के खेल में हाथ आजमाया
Who is Roop Singh? अपने बड़े भाई मेजर ध्यानचंद की तरह रूप सिंह ने भी हॉकी जगत में नाम कमाया. साल 1932 और 1936 की ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट टीम का अहम हिस्सा रहे रूप सिंह को उनकी गति और शानदार स्कोरिंग क्षमता के लिए पहचाना गया, जिन्होंने भारतीय हॉकी को नई ऊंचाइयां दीं. 8 सितंबर 1908 को जबलपुर में जन्मे रूप सिंह ने अपने बड़े भाई मेजर ध्यानचंद के नक्शेकदम पर चलते हुए हॉकी के खेल में हाथ आजमाया. दोनों भाइयों की प्रारंभिक शिक्षा झांसी में हुई थी. दोनों भाई हीरोज ग्राउंड पर साथ हॉकी की प्रैक्टिस करते थे. भाई की तरह उनमें भी गजब प्रतिभा थी और शानदार प्रदर्शन के साथ रूप सिंह ने भारतीय हॉकी टीम में अपनी जगह बना ली. IPL से टकराएगी PSL 2026! मोहसिन नकवी ने जारी किया डेट, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने खोले नए टीमों के दरवाज़े
आगे चलकर ध्यानचंद भारतीय सेना में शामिल हो गए, जबकि रूप सिंह ग्वालियर के राजघराने की सिंधिया सेना में बतौर कैप्टन शामिल हुए. दोनों भाइयों ने अपने शानदार प्रदर्शन से भारतीय टीम में जगह बनाई. रूप सिंह को इनसाइड लेफ्ट पोजीशन में विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में गिना जाता था. जब 1932 ओलंपिक के लिए भारतीय हॉकी टीम में रूप सिंह का चयन हुआ, तब उन्होंने लॉस एंजिल्स जाने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि उनके पास वहां जाने के लिए योग्य कपड़े नहीं थे. ऐसे में ध्यानचंद ने उनके लिए सूट सिलवाया. इस ओलंपिक में भारत ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था.
15 अगस्त 1936 को भारत ने मेजर ध्यानचंद के नेतृत्व में बर्लिन ओलंपिक के हॉकी फाइनल में जर्मनी को 8-1 से शिकस्त देकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया था.
1936 ओलंपिक में ध्यानचंद ने 13 गोल दागे थे, जबकि रूप सिंह ने 9 गोल किए। एडोल्फ हिटलर भाइयों की इस जोड़ी के कायल थे। उन्होंने ध्यानचंद के साथ रूप सिंह को भी जर्मनी में नौकरी का प्रस्ताव दिया, लेकिन इस प्रस्ताव को दोनों ने बेहद विनम्रता के साथ ठुकरा दिया. आगे चलकर रूप सिंह के नाम पर जर्मनी के म्यूनिख में एक रोड का नाम 'रूप सिंह बैस वेग' रखा गया.
कैप्टन रूप सिंह हॉकी के साथ लॉन टेनिस और क्रिकेट के भी शानदार खिलाड़ी थे. उन्होंने दिसंबर 1943 में ग्वालियर की तरफ से दिल्ली के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच खेला था. 16 दिसंबर 1977 को भारतीय हॉकी के इस दिग्गज खिलाड़ी ने दुनिया को अलविदा कह दिया. उनके सम्मान में ग्वालियर के एक स्टेडियम का नाम रूप सिंह स्टेडियम रखा गया.
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 16, 2025 12:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

