Nazwa Viral Video Links: नजवा वायरल वीडियो लिंक का सच, नए एमएमएस का दावा पूरी तरह फर्जी; क्लिकबैट स्कैम से रहें सावधान

टिकटॉक, टेलीग्राम और एक्स (ट्विटर) पर "नजवा वायरल" नाम से लीक वीडियो के जो लिंक शेयर किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से फर्जी हैं. साइबर विशेषज्ञों ने इसे एक सोची-समझी साजिश और क्लिकबैट स्कैम करार दिया है, जिसका उद्देश्य यूजर्स का निजी डेटा चुराना है.

नाजवा वायरल वीडियो सर्च में उछाल (Photo Credits: X)

नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे टिकटॉक (TikTok), टेलीग्राम (Telegram) और एक्स (X - पूर्व में ट्विटर) पर इन दिनों "नजवा वायरल" (Nazwa Viral) सर्च टर्म तेजी से ट्रेंड कर रहा है. इंटरनेट पर कई ऐसे लिंक फैलाए जा रहे हैं, जिनमें इंडोनेशियाई कंटेंट क्रिएटर नजवा फिधिया (Nazwa Fidhia) का नया आपत्तिजनक या निजी वीडियो होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और डिजिटल राइट्स संगठनों ने साफ किया है कि ये दावे पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत हैं. यह असल में एक सुनियोजित 'क्लिकबैट स्कैम' (धोखाधड़ी) है, जिसके जरिए यूजर्स को खतरनाक थर्ड-पार्टी वेबसाइटों पर भेजकर उनके डिजिटल डिवाइस की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है. यह भी पढ़ें: Asupan Link Video Viral: इंडोनेशिया में वायरल वीडियो लिंक के नाम पर बड़ा साइबर फ्रॉड, फिशिंग और मैलवेयर का बढ़ा खतरा

क्या है "नजवा वायरल" का पुराना संदर्भ?

इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2021 की एक पुरानी घटना से जुड़ी हैं. उस समय इंडोनेशिया की लोकप्रिय लाइफस्टाइल और ब्यूटी ब्लॉगर नजवा फिधिया (Nazwaft) की एक निजी तस्वीर गलती से इंटरनेट पर लीक हो गई थी, जिसमें एक होटल के कमरे के शीशे (मिरर) में कुछ आपत्तिजनक रिफ्लेक्शन दिख रहा था.

यह मामला सालों पहले खत्म हो चुका है और वर्तमान में नजवा पूरी तरह से सामान्य फैशन और ब्यूटी ब्लॉगिंग पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं. लेकिन इंटरनेट के सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) एल्गोरिदम में यह नाम आज भी एक हाई-वॉल्यूम (ज्यादा सर्च होने वाला) कीवर्ड बना हुआ है. इसी का फायदा उठाकर स्वचालित स्पैम नेटवर्क और हैकर्स लोगों की उत्सुकता का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.

कैसे काम करता है यह क्लिकबैट स्कैम?

साइबर अपराधियों द्वारा संचालित ऑटोमेटेड बॉट्स (इंटरनेट रोबोट) ट्रेंडिंग वीडियो के कमेंट सेक्शन और सार्वजनिक मंचों को फर्जी मैसेजेस से पाट देते हैं. इन पोस्ट्स में "न्यू अनसेंसर्ड वीडियो लीक" जैसे सनसनीखेज कैप्शन लिखे होते हैं और साथ में एक छोटा (Shortened URL) लिंक दिया जाता है.

जैसे ही कोई यूजर इस लिंक पर क्लिक करता है, उसे कोई वीडियो नहीं दिखाई देता. इसके बजाय, यह लिंक यूजर को लगातार कई अन्य वेबसाइटों पर रीडायरेक्ट (Redirect) करता है. इस प्रक्रिया में यूजर्स के सामने आक्रामक विज्ञापन आते हैं, उन्हें महंगी प्रीमियम एसएमएस सेवाओं को सब्सक्राइब करने के लिए मजबूर किया जाता है, या फिर डिवाइस में मैलवेयर (वायरस) से भरे अनवेरिफाइड ऐप्स डाउनलोड करा दिए जाते हैं.

स्वचालित बॉट्स नकली लिंक के साथ 'नज़वा वायरल' खोज प्रवृत्ति का फायदा उठाते हैं

टेलीग्राम और एक्स (X) पर स्पैम का जाल

यह स्कैम विशेष रूप से एक्स और टेलीग्राम पर सबसे ज्यादा सक्रिय है क्योंकि इन प्लेटफॉर्म्स पर ऑटोमेटेड स्क्रिप्ट चलाना आसान होता है. एक्स पर बॉट्स लोकप्रिय हैशटैग की निगरानी करते हैं और उनके नीचे स्वचालित रूप से ये फर्जी लिंक वाले कमेंट पोस्ट कर देते हैं. वहीं टेलीग्राम पर इस इन्फ्लुएंसर के नाम का इस्तेमाल करके बड़े-बड़े चैनल बनाए जा रहे हैं. जब इन चैनल्स पर हजारों सब्सक्राइबर्स जुड़ जाते हैं, तो हैकर्स इनका इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी या अन्य विज्ञापनों को बढ़ावा देने के लिए करने लगते हैं.

डिजिटल सुरक्षा के लिए क्या करें?

इंटरनेट सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक कमेंट सेक्शन या असत्यापित (Unverified) अकाउंट्स द्वारा साझा किए गए किसी भी संदिग्ध लिंक पर कभी क्लिक न करें. यदि आपको ऐसे अकाउंट्स दिखाई देते हैं, तो तुरंत उन्हें स्पैम के रूप में रिपोर्ट करें ताकि प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम इन्हें हटा सके. अपने ब्राउज़र की सुरक्षा को हमेशा अपडेट रखें और किसी बाहरी लिंक द्वारा प्रेरित किए जाने पर अपने फोन या कंप्यूटर में कोई भी अज्ञात सॉफ्टवेयर या एपीके फाइल डाउनलोड न करें.

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है ताकि पाठकों को इंटरनेट पर चल रहे घोटालों के प्रति जागरूक किया जा सके. हमारा संस्थान किसी भी प्रकार की अश्लील सामग्री, लीक हुए वीडियो या पायरेटेड सामग्री को बढ़ावा नहीं देता है. किसी की सहमति के बिना उसकी निजी तस्वीरें या वीडियो साझा करना और खोजना कानूनी रूप से एक गंभीर अपराध है.

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