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Asupan Link Video Viral: इंडोनेशिया में वायरल वीडियो लिंक के नाम पर बड़ा साइबर फ्रॉड, फिशिंग और मैलवेयर का बढ़ा खतरा

इंडोनेशियाई सोशल मीडिया पर इन दिनों "आसुपान लिंक वीडियो वायरल" वाक्यांश के साथ एक बड़ा साइबर स्कैम तेजी से फैल रहा है। एंटरटेनमेंट और लीक वीडियो के नाम पर यूजर्स को झांसा देकर उनके डिवाइस में खतरनाक मैलवेयर इंस्टॉल किए जा रहे हैं और उनका निजी डेटा चोरी किया जा रहा है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे लेकर अलर्ट जारी किया है.

Asupan Link Video Viral: इंडोनेशिया में वायरल वीडियो लिंक के नाम पर बड़ा साइबर फ्रॉड, फिशिंग और मैलवेयर का बढ़ा खतरा
आसुपान लिंक वीडियो वायरल (Photo Credits: File Image)

Asupan Link Video Viral: इंडोनेशिया में टिकटॉक (TikTok), एक्स (ट्विटर) और टेलीग्राम जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन दिनों एक बेहद संगठित और खतरनाक साइबर स्कैम पैर पसार रहा है. इस घोटाले में "आसुपान लिंक वीडियो वायरल" (Asupan Link Video Viral) वाक्यांश का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर ऑटोमेटेड स्पैम (बॉट मैसेजेस) फैलाए जा रहे हैं। देखने में ये लिंक किसी आम मनोरंजन, ट्रेंडिंग या लीक वीडियो के दावे जैसे लगते हैं, लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह एक बेहद सोची-समझी क्लिकबैट और फिशिंग मुहिम है। इसका उद्देश्य आम यूजर्स की जिज्ञासा का फायदा उठाकर उनके निजी डेटा को चुराना और उनके डिवाइस को मैलवेयर (Malware) से संक्रमित करना है. यह भी पढ़ें: Priti Paswan Viral Video: प्रीति पासवान वायरल वीडियो स्कैम, 1 मिनट 48 सेकंड की कथित क्लिप पड़ सकती है भारी; खाली हो सकता है बैंक खाता

क्या है 'आसुपान' शब्द का मतलब और खेल?

इंडोनेशियाई इंटरनेट संस्कृति (Internet Culture) में 'आसुपान' (Asupan) शब्द का शाब्दिक अर्थ 'आहार' या 'पोषण' होता है. लेकिन सोशल मीडिया की बोलचाल में नेटिजन्स इसका इस्तेमाल किसी की जिज्ञासा शांत करने या बोरियत दूर करने के लिए 'मीडिया की दैनिक खुराक' (Daily Dose of Media) के रूप में करते हैं.

जब इस शब्द को "लिंक वीडियो वायरल" के साथ जोड़ा जाता है, तो यह सीधे तौर पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति (Influencer), सेलिब्रिटी या विवादास्पद घटना के लीक वीडियो तक पहुंच का वादा करता है. साइबर अपराधी जानबूझकर स्थानीय इंटरनेट स्लैंग (आम बोलचाल की भाषा) का इस्तेमाल करते हैं ताकि यूजर्स को इन लिंक्स पर शक न हो और वे आसानी से इनके झांसे में आ जाएं.

कैसे काम करता है यह पूरा स्कैम?

सुरक्षा शोधकर्ताओं द्वारा किए गए थ्रेट एनालिसिस (Threat Analysis) के अनुसार, यह स्कैम केवल तकनीकी हैकिंग पर नहीं, बल्कि 'सोशल इंजीनियरिंग' यानी इंसानी मनोविज्ञान से खिलवाड़ पर आधारित है. अपराधियों का नेटवर्क इस जाल को कुछ इस तरह फैलाता है:

  • क्लिकबैट का लालच: सबसे पहले किसी हाई-ट्रैफिक पोस्ट के कमेंट सेक्शन में बॉट्स के जरिए "यहां देखें" (Watch Here) जैसे आकर्षक लिंक पोस्ट किए जाते हैं. असली डेस्टिनेशन को छिपाने के लिए ये लोग यूआरएल शॉर्टनर (URL Shorteners) या बायो-लिंक्स का सहारा लेते हैं.
  • रीडायरेक्ट लूप (विज्ञापन का जाल): जैसे ही कोई यूजर इस लिंक पर क्लिक करता है, उसे सीधे वीडियो दिखाने के बजाय एक के बाद एक कई वेबसाइट्स पर रीडायरेक्ट किया जाता है. इन पेजों पर अश्लील विज्ञापन, फर्जी ब्राउज़र नोटिफिकेशन और ऑनलाइन सट्टेबाजी के बैनर भरे होते हैं.
  • मैलवेयर डिलीवरी: अंत में यूजर के सामने एक पेज खुलता है, जहां वीडियो चलाने के बहाने मीडिया प्लेयर अपडेट, कंप्रेस्ड जिप (.ZIP) फाइल या एंड्रॉइड एप्लिकेशन पैकेज (.APK) फाइल डाउनलोड करने का दबाव बनाया जाता है.

सुरक्षा लॉग्स से पता चला है कि इन फाइलों को डाउनलोड और रन करते ही यूजर के फोन या कंप्यूटर में 'डेटा चुराने वाले ट्रोजन' (Data-stealing Trojans) या खतरनाक स्क्रिप्ट्स इंस्टॉल हो जाते हैं. ये मैलवेयर डिवाइस में सेव पासवर्ड, बैंकिंग क्रेडेंशियल्स और ब्राउज़र कुकीज को तुरंत हैकर्स तक पहुंचा देते हैं.

दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ता डिजिटल संकट

वीडियो-आधारित फिशिंग का यह बढ़ता ग्राफ इस क्षेत्र में कमजोर डिजिटल सुरक्षा को उजागर करता है. इंडोनेशिया के संचार और डिजिटल मामलों के मंत्रालय (Komdigi) ने हाल ही में नोट किया है कि डिजिटल धोखाधड़ी के प्रयास एक क्रिटिकल बेसलाइन पर पहुंच गए हैं, जहां सालाना लाखों फर्जी डोमेन रजिस्टर्ड किए जा रहे हैं.

स्थानीय डेटा गोपनीयता अधिवक्ताओं का कहना है कि कम डिजिटल साक्षरता के कारण युवा आबादी, जो वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर सबसे ज्यादा सक्रिय रहती है, इन फिशिंग किट्स का आसान शिकार बन रही है. ये फर्जी पोर्टल हूबहू असली वीडियो स्ट्रीमिंग ऐप्स या लॉगिन पेज जैसे दिखाई देते हैं.

स्कैम से बचने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की सलाह

साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने इंटरनेट यूजर्स को सार्वजनिक मंचों पर मिलने वाले ऐसे किसी भी संदिग्ध प्रमोशनल लिंक्स से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है. सुरक्षा के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:

  • किसी भी ऐसे लिंक पर क्लिक न करें जो आपको थर्ड-पार्टी फाइल या ऐप डाउनलोड करने के लिए कहे.
  • कोई भी संवेदनशील या व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करने से पहले वेबसाइट के मुख्य डोमेन नेम (URL) की स्पेलिंग को ध्यान से वेरीफाई करें.
  • अपने सोशल मीडिया और बैंकिंग अकाउंट्स को सुरक्षित रखने के लिए मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) को अनिवार्य रूप से इनेबल (सक्रिय) करें, ताकि क्रेडेंशियल्स लीक होने पर भी आपका अकाउंट हैक होने से बच सके.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 16, 2026 12:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).