Surat 'Wife-Swapping' Case: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो लिंक असली हैं या फर्जी? जानें डाउनलोड और शेयर करने के बड़े कानूनी खतरे
सूरत वाइफ स्वैपिंग (Photo Credits: X\@aamirkhan001)

सूरत: गुजरात (Gujarat) के सूरत (Surat) में एक महिला द्वारा अपने पति पर शादी के कुछ महीनों बाद ही 'वाइफ स्वैपिंग' (Wife-Swapping) (पत्नियों की अदला-बदली) का दबाव बनाने के आरोपों का मामला इन दिनों देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस बीच, सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म्स, व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर 'सूरत वाइफ स्वैपिंग वायरल वीडियो' (Surat Wife-Swapping Viral Video) या 'कपल एमएमएस लिंक' (Couple MMS Link) के नाम से कई पोस्ट और लिंक तेजी से तैरने लगे हैं. हालांकि, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे किसी भी प्रामाणिक वीडियो के अस्तित्व का कोई सबूत नहीं है. ये लिंक पूरी तरह फर्जी, भ्रामक और मैलवेयर से लैस हो सकते हैं. यह भी पढ़ें: Wife Swapping: गुजरात में 'वाइफ स्वैपिंग' का सनसनीखेज खुलासा, सूरत के युवक पर पत्नी का गंभीर आरोप, गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी से लगाई गुहार (Watch Video)

वायरल हो रहे वीडियो लिंक्स के पीछे का सच

सूरत की महिला के बयान का वीडियो वायरल होने के बाद, कई असामाजिक तत्वों ने जनता की उत्सुकता का फायदा उठाना शुरू कर दिया है. इंटरनेट पर "सूरत वाइफ स्वैपिंग फुल वीडियो लिंक" के नाम से जो यूआरएल (URL) शेयर किए जा रहे हैं, वे वास्तव में साइबर फ्रॉड का हिस्सा हैं.

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, इन लिंक्स पर क्लिक करने से यूजर्स के फोन या कंप्यूटर में वायरस और मैलवेयर आ सकते हैं, जिससे बैंकिंग फ्रॉड या पर्सनल डेटा चोरी होने का गंभीर खतरा रहता है. पुलिस प्रशासन ने भी पुष्टि की है कि इस मामले से जुड़ा कोई भी वास्तविक अश्लील वीडियो इंटरनेट पर मौजूद नहीं है.

वीडियो लिंक फॉरवर्ड करना भी है बड़ा अपराध

कई इंटरनेट यूजर्स अनजाने में या मजे के लिए ऐसे लिंक्स को व्हाट्सएप ग्रुप्स या दोस्तों के साथ फॉरवर्ड कर देते हैं. भारतीय साइबर कानून के अनुसार, किसी आपत्तिजनक लिंक को केवल आगे बढ़ाना (Forward) भी सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रकाशित या प्रसारित करने के बराबर माना जाता है.

सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 की धारा 67A के तहत, यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार की यौन स्पष्ट (Sexually Explicit) सामग्री या उसका लिंक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजता है, तो पहली बार दोषी पाए जाने पर ५ साल तक की जेल और १० लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.  दोबारा यही अपराध करने पर सजा ७ साल तक बढ़ सकती है.

निजता का उल्लंघन और डीपफेक का खतरा

यदि कोई वीडियो किसी की सहमति के बिना उसकी गोपनीयता का उल्लंघन करके बनाया या शेयर किया जाता है, तो आईटी एक्ट की धारा 66E के तहत ३ साल की जेल या २ लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत 'वोयेरिज्म' (ताक-झांक करने और रिकॉर्ड करने) की गंभीर धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं.

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग करके फर्जी वीडियो या डीपफेक (Deepfake) बना दिए जाते हैं. यदि इस मामले में भी किसी महिला के चेहरे का गलत इस्तेमाल कर फर्जी वीडियो फैलाया जाता है, तो आईटी एक्ट की धारा 66D (कंप्यूटर संसाधनों के जरिए भेष बदलकर धोखाधड़ी) के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें ३ साल की कैद तय है.

क्या व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन भी घेरे में आएंगे?

कानूनी जानकारों का कहना है कि व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप के एडमिन ग्रुप में होने वाली हर गतिविधि के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं होते हैं. लेकिन, यदि किसी एडमिन को यह पता है कि उसके ग्रुप में कोई गैर-कानूनी, अश्लील या फर्जी वायरल लिंक शेयर किया गया है और वह उसे हटाने या रोकने के बजाय मूकदर्शक बना रहता है, तो पुलिस उस पर भी अपराध को बढ़ावा देने या उकसाने की धाराओं के तहत कार्रवाई कर सकती है.

कानूनी प्रावधान और सजा की रूपरेखा

कृत्य/अपराध संबंधित कानून अधिकतम सजा
आपत्तिजनक वीडियो या लिंक फॉरवर्ड करना आईटी एक्ट, धारा 67A ५ साल की जेल + १० लाख रुपये जुर्माना (पहली बार)
दोबारा वही अपराध दोहराना आईटी एक्ट, धारा 67A ७ साल तक की जेल
सहमति के बिना निजी सामग्री साझा करना आईटी एक्ट, धारा 66E ३ साल तक की जेल या २ लाख रुपये जुर्माना
एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो बनाना/शेयर करना आईटी एक्ट, धारा 66D ३ साल तक की जेल और जुर्माना

नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह

साइबर क्राइम और स्थानीय पुलिस ने आम जनता को सख्त हिदायत दी है कि वे इंटरनेट पर ऐसे किसी भी कथित "सूरत कपल वीडियो" को न तो सर्च करें, न डाउनलोड करें और न ही किसी को फॉरवर्ड करें. चूंकि सूरत पुलिस अभी महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है, इसलिए नागरिकों को केवल आधिकारिक और सत्यापित खबरों पर ही भरोसा करना चाहिए और किसी भी तरह की अफवाह या फर्जी डिजिटल लिंक का हिस्सा बनने से बचना चाहिए.