Pune Ganesh Utsav 2026: युवक ने बनाई बप्पा को गोद में लिए अजीत पवार की प्रतिमा; विमान हादसे के दृश्य पर सोशल मीडिया पर बंटी राय

महाराष्ट्र के पुणे स्थित पिंपरी-चिंचवाड़ के भोसरी क्षेत्र में गणेशोत्सव के दौरान दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को एक अनोखी श्रद्धांजलि दी गई है. इंद्रायणी नगर निवासी दर्शन सोनावणे ने तीन महीने की कड़ी मेहनत के बाद अजीत पवार की आदमकद और सजीव प्रतिमा तैयार की है, जिसमें वह हाथों में भगवान गणेश की मूर्ति थामे नजर आ रहे हैं. इस साल जनवरी में बारामती विमान हादसे में अजीत पवार के निधन के बाद यह पहला गणेशोत्सव है.

अजीत पवार की हूबहू दिखने वाली मूर्ति (Photo Credits: X)

पुणे: महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजीत पवार के निधन के बाद राज्य में यह पहला गणेशोत्सव मनाया जा रहा है. इस मौके पर पुणे के भोसरी (इंद्रायणी नगर) निवासी एक युवक दर्शन सोनावणे ने अपने घर पर एक विशेष और अनूठी कलाकृति स्थापित कर सबका ध्यान खींचा है.

दर्शन ने करीब तीन महीने के निरंतर परिश्रम से अजीत पवार की हूबहू दिखने वाली सजीव प्रतिमा तैयार की है, जिसमें वे अपने हाथों में विघ्नहर्ता गणपति बाप्पा की मूर्ति को उठाए हुए दिखाई दे रहे हैं.  इस अनोखे देखावे (झांकी) को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और कार्यकर्ता उनके घर पहुंच रहे हैं. यह भी पढ़ें: Tirunelveli: गणेश जी द्वारा बिरयानी पकाने और खाने का बैनर लगाने पर बवाल; तिरुनेलवेली में दुकान मालिक गिरफ्तार

तीन महीने की कड़ी मेहनत: 'लगा जैसे दादा खुद बाप्पा को लेकर आए हैं'

मूर्तिकार दर्शन सोनावणे और उनके परिवार के अनुसार, इस प्रतिमा को तैयार करने के पीछे गहरी राजनीतिक निष्ठा और आत्मीय सम्मान की भावना रही है:

युवक ने बनाई बप्पा को गोद में लिए अजीत पवार की प्रतिमा

विमान हादसे के चित्रण पर सोशल मीडिया पर बंटी राय

मुख्य प्रतिमा की जहां व्यापक सराहना हो रही है, वहीं झांकी में शामिल एक अन्य हिस्से को लेकर विवाद और बहस भी छिड़ गई है:

'घर पर दादा की मौजूदगी का हो रहा अहसास'

तमाम चर्चाओं के बीच, सोनावणे परिवार के लिए यह क्षण अत्यंत भावुक है. दर्शन की मां ने कहा कि जब वे इस प्रतिमा को देखती हैं, तो उन्हें ऐसा महसूस होता है कि खुद अजीत दादा उनके घर में उपस्थित हैं.

महाराष्ट्र के जनजीवन और प्रशासन में दशकों तक एक मजबूत हस्ताक्षर रहे अजीत पवार की कमी इस बार पूरे राज्य के गणेश पंडालों में महसूस की जा रही है, और भोसरी में बना यह देखावा उसी भावनात्मक जुड़ाव का एक अनूठा उदाहरण बनकर उभरा है.

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