Mumbai Pure Veg Flat Row: ₹6.5 करोड़ के ताड़देव फ्लैट का वीडियो वायरल, विवाद बढ़ने पर रियल एस्टेट एजेंट ने मांगी माफी
मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें पहले ही काफी अधिक हैं. ऐसे में नागरिक संगठनों और समावेशी आवास की वकालत करने वालों का मानना है कि आवासीय व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें लोगों के साथ उनके खान-पान या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव न हो.
Mumbai Pure Veg Flat Controversy: मुंबई में एक लग्जरी फ्लैट की बिक्री को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. साउथ मुंबई के पॉश ताड़देव इलाके में करीब 900 वर्ग फुट के 2BHK फ्लैट की कीमत ₹6.50 करोड़ बताई गई, लेकिन प्रॉपर्टी के प्रमोशनल वीडियो में इसे केवल ‘Pure Vegetarian’ लोगों के लिए उपलब्ध बताया गया. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने इसे लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए. Marathi Bhasha Gourav Din: 27 फरवरी को क्यों मनाया जाता है मराठी भाषा गौरव दिन? जानें इसका महत्व और इतिहास
विवाद बढ़ने के बाद रियल एस्टेट एजेंट भावेश कावरे ने वीडियो डिलीट कर दिया और माफी भी मांगी. इस घटना ने मुंबई में घर खरीदने या किराये पर लेने में खान-पान के आधार पर होने वाले भेदभाव को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है.
₹6.5 करोड़ के फ्लैट की लिस्टिंग में ‘Pure Veg’ शर्त
वायरल वीडियो में ताड़देव स्थित नए बने 2BHK अपार्टमेंट को करीब ₹6.50 करोड़ में बिक्री के लिए पेश किया गया था. फ्लैट का क्षेत्रफल करीब 900 वर्ग फुट बताया गया था. प्रॉपर्टी में प्राइवेट बालकनी से शहर और समुद्र का शानदार नजारा, साथ ही पोडियम पार्किंग जैसी सुविधाओं का भी जिक्र किया गया था. हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा उस शर्त को लेकर हुई, जिसमें फ्लैट को केवल शाकाहारी लोगों के लिए उपलब्ध बताया गया.
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर मचा बवाल
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने रियल एस्टेट एजेंट और ऐसी आवासीय शर्तों पर सवाल उठाए. कई यूजर्स का कहना था कि किसी व्यक्ति की खान-पान की पसंद के आधार पर उसे घर खरीदने या किराये पर लेने से रोकना भेदभावपूर्ण है.
कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि अगर किसी सोसायटी में ‘Pure Veg’ नियम लागू किया जाता है तो क्या वहां रहने वाले लोगों की निजी रसोई और खान-पान की निगरानी भी की जाएगी.
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई
मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं. शिंदे सेना से जुड़े युवा नेता गुरज्योत सिंह कीर समेत कई लोगों ने ऐसी पाबंदियों की आलोचना की.
आलोचकों का कहना है कि किसी व्यक्ति के मांसाहारी या शाकाहारी होने के आधार पर उसे आवास से बाहर रखना सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है. वहीं, इस तरह की घटनाओं को लेकर मुंबई में पहले भी बहस होती रही है.
मुंबई के कई इलाकों में पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल
मुंबई जैसे महानगर में खान-पान और आवासीय प्राथमिकताओं को लेकर विवाद नया नहीं है. समय-समय पर घाटकोपर, मुलुंड, कांदिवली और पवई जैसे इलाकों में भी घर खरीदने या किराये पर लेने वालों को खान-पान से जुड़ी पाबंदियों का सामना करने के दावे सामने आते रहे हैं.
शहर में अलग-अलग समुदायों और संस्कृतियों के लोग रहते हैं. ऐसे में आलोचकों का कहना है कि बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों और सीमित आवास विकल्पों के बीच इस तरह की शर्तें लोगों के लिए घर ढूंढना और मुश्किल बना सकती हैं.
एजेंट ने वीडियो हटाकर मांगी माफी
विवाद बढ़ने के बाद रियल एस्टेट एजेंट भावेश कावरे ने वायरल वीडियो को सोशल मीडिया से हटा दिया. उन्होंने मामले को लेकर माफी भी मांगी. हालांकि, वीडियो के हटाए जाने के बावजूद इस मामले ने मुंबई के रियल एस्टेट सेक्टर में खान-पान के आधार पर आवासीय प्राथमिकताओं को लेकर नई बहस शुरू कर दी है.
क्या खान-पान के आधार पर घर मिलना चाहिए?
इस पूरे विवाद ने मुंबई में आवास और व्यक्तिगत पसंद के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ कुछ हाउसिंग सोसायटी या मकान मालिक अपने समुदाय और जीवनशैली के अनुरूप लोगों को प्राथमिकता देने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ आलोचकों का कहना है कि शहर में घर तक पहुंच व्यक्ति की खान-पान की पसंद के आधार पर सीमित नहीं होनी चाहिए.
मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें पहले ही काफी अधिक हैं. ऐसे में नागरिक संगठनों और समावेशी आवास की वकालत करने वालों का मानना है कि आवासीय व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें लोगों के साथ उनके खान-पान या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव न हो.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 13, 2026 06:45 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

