कन्नौज स्कूल वीडियो सच या AI जनरेटेड? जांच में सच आया सामने, लेकिन 'फुल वीडियो' के नाम पर फिशिंग स्कैम एक्टिव
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में दो शिक्षकों के निलंबन के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या यह वीडियो असली है या एआई (AI) जनरेटेड? आधिकारिक जांच में वीडियो के असली होने की पुष्टि हुई है, लेकिन इसी बीच साइबर अपराधी 'फुल अनएडिटेड वीडियो' के नाम पर फर्जी लिंक शेयर कर लोगों को फिशिंग स्कैम का शिकार बना रहे हैं.
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कन्नौज: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कन्नौज जिले ( Kannauj District) के एक सरकारी स्कूल में दो सहायक शिक्षकों के आपत्तिजनक आचरण और उनके निलंबन का मामला अब एक नए साइबर खतरे में बदल गया है. जहां एक तरफ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा कराई गई ब्लॉक स्तरीय प्रारंभिक जांच में इस वायरल वीडियो के पूरी तरह प्रामाणिक (असली) होने की पुष्टि की जा चुकी है; वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर कुछ असामाजिक तत्व इसे 'एआई जनरेटेड' (AI-generated) बताकर भ्रम फैला रहे हैं. इतना ही नहीं, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर इंटरनेट पर बढ़े सर्च वॉल्यूम का फायदा उठाकर हैकर्स सक्रिय हो गए हैं और 'फुल अनएडिटेड वीडियो' देने के बहाने फर्जी लिंक फैलाकर लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी (फिशिंग स्कैम) का शिकार बना रहे हैं. यह भी पढ़ें: Kannauj School Viral Video: कन्नौज स्कूल वीडियो कांड, पत्नी ने हिडन कैमरे से पकड़ी शिक्षक पति और सहकर्मी की आपत्तिजनक हरकत; दोनों शिक्षक सस्पेंड
जांच में साफ हुआ सच: हिडन कैमरे से रिकॉर्ड हुआ था वीडियो
यह पूरा मामला कन्नौज के सौरिख ब्लॉक के बाझेड़ी गांव में स्थित एक कंपोजिट स्कूल का है. आधिकारिक जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि क्लासरूम के भीतर वायरल हुई यह क्लिप कोई तकनीकी हेरफेर या डीपफेक नहीं है.
खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) विश्वनाथ पाठक द्वारा की गई शुरुआती जांच के मुताबिक, यह वीडियो पूरी तरह असली है, जिसे क्लासरूम में ही एक छिपे हुए (हिडन) कैमरे की मदद से रिकॉर्ड किया गया था. यह रिकॉर्डिंग पुरुष शिक्षक की पत्नी द्वारा अपने पति के अनैतिक आचरण को बेनकाब करने के उद्देश्य से प्लान की गई थी. इस रिपोर्ट के आधार पर बीएसए संदीप कुमार ने दोनों दोषी शिक्षकों को निलंबित कर दिया है और 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है.
'फुल वीडियो' के लिंक के पीछे है फिशिंग स्कैम का जाल
मूल वीडियो के प्रामाणिक होने के बावजूद, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे वॉट्सऐप, टेलीग्राम और एक्स (X) पर संदिग्ध लिंक की बाढ़ आ गई है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हैकर्स इस ट्रेंडिंग टॉपिक का इस्तेमाल 'फिशिंग स्कैम' (Phishing Scam) के लिए कर रहे हैं.
"कन्नौज टीचर वायरल वीडियो" के नाम से शेयर किए जा रहे इन संदिग्ध यूआरएल (URLs) पर क्लिक करते ही यूजर्स को फर्जी वेबसाइटों पर रीडायरेक्ट कर दिया जाता है. ये वेबसाइटें यूजर के डिवाइस में मैलवेयर (हानिकारक वायरस) इंस्टॉल कर सकती हैं या उनके सोशल मीडिया लॉग-इन क्रेडेंशियल्स और संवेदनशील व्यक्तिगत बैंकिंग जानकारी चुरा सकती हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों को सलाह दी है कि वे ऐसे किसी भी अज्ञात या असत्यापित लिंक पर भूलकर भी क्लिक न करें.
वीडियो शेयरिंग और डाउनलोडिंग पर भारी कानूनी जोखिम
पाठकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि इस तरह के किसी भी आपत्तिजनक या व्यक्तिगत (प्राइवेट) वीडियो को देखना, डाउनलोड करना या किसी अन्य को फॉरवर्ड करना भारतीय कानून के तहत एक गंभीर अपराध है.
- आईटी एक्ट की धारा 67: इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किसी भी प्रकार की अश्लील सामग्री को प्रसारित या प्रकाशित करना सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 67 के तहत दंडनीय है, जिसमें भारी जुर्माने के साथ जेल की सजा का प्रावधान है.
- पॉक्सो (POCSO) एक्ट का खतरा: चूंकि यह घटना एक स्कूल परिसर के भीतर हुई है जहां नाबालिग बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं, यदि इस वीडियो को फैलाने से किसी भी छात्र की निजिटी या पहचान को अप्रत्यक्ष रूप से भी ठेस पहुंचती है, तो आरोपी पर पॉक्सो एक्ट के तहत भी सख्त कार्रवाई हो सकती है.
पुलिस के साइबर सेल ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और इस मानहानिकारक व अवैध सामग्री को आगे बढ़ाने या ग्रुप्स में शेयर करने वाले एडमिन्स और व्यक्तिगत यूजर्स के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 15, 2026 02:32 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

