Fact Check: क्या सरकार ने EPS-95 न्यूनतम पेंशन बढ़ाकर 7500 रुपये कर दी? जानें सोशल मीडिया पर वायरल पत्र का पूरा सच

सोशल मीडिया पर एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि सरकार ने EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन बढ़ाकर 7,500 रुपये कर दी है. EPFO ने इस वायरल दावे का फैक्ट चेक कर इसकी सच्चाई बताई है.

Fact Check:  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे उस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि केंद्र सरकार ने कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये कर दिया है. यह फर्जी पत्र इंटरनेट और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर इतनी तेजी से फैला कि 'EPS-95 वायरल लेटर' गूगल ट्रेंड्स में टॉप पर आ गया. वायरल दावे में कहा गया था कि पेंशनर्स को 1 मई से बढ़ी हुई राशि मिलने लगेगी. मंगलवार, 19 मई को ईपीएफओ ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि यह अधिसूचना पूरी तरह से फर्जी है और न्यूनतम पेंशन में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

क्या है वायरल हो रहे इस फर्जी पत्र में?

इंटरनेट पर प्रसारित हो रहे इस असत्यापित दस्तावेज का शीर्षक "EPS-95 योजना के तहत न्यूनतम पेंशन में वृद्धि के संबंध में अधिसूचना" रखा गया है. इसमें दावा किया गया है कि केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने न्यूनतम पेंशन राशि में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है.

जानें वायरल खबर की सच्चाई

मनगढ़ंत सर्कुलर के टेक्स्ट में लिखा गया है कि संशोधित 7,500 रुपये की दर 30 अप्रैल से प्रभावी हो चुकी है. साथ ही इसमें सभी पेंशन वितरण करने वाले बैंकों और प्रशासनिक विभागों को इसे तुरंत लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं.

EPFO ने कहा- सोशल मीडिया पर चल रहा दावा पूरी तरह फर्जी

इस भ्रामक दस्तावेज के सामने आने के बाद EPFO ने अपने सत्यापित डिजिटल पोर्टल्स और सोशल मीडिया हैंडल के जरिए एक औपचारिक एडवाइजरी जारी की है. सरकारी एजेंसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यूनतम EPS पेंशन में बढ़ोतरी से जुड़ा यह पत्र "पूरी तरह से फर्जी" (Completely Fake) है. ईपीएफओ ने साफ किया कि ग्राहकों के लिए तय न्यूनतम गारंटीशुदा पेंशन राशि पहले की तरह ही बनी हुई है और इसमें फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है.

क्यों इतनी तेजी से फैली यह अफवाह?

इस फर्जी खबर के इतनी तेजी से फैलने के पीछे पेंशनभोगियों की लंबे समय से चली आ रही मांगें हैं. वर्तमान में, केंद्र सरकार संगठित क्षेत्र के पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों को न्यूनतम 1,000 रुपये प्रति माह की बेसलाइन पेंशन की गारंटी देती है.

यह वैधानिक सीमा कई वर्षों से स्थिर है. इसके कारण केंद्रीय श्रम संगठन और स्वतंत्र राष्ट्रीय पेंशनभोगी कार्रवाई समितियां लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही हैं ताकि बढ़ती महंगाई के अनुपात में इसे बढ़ाया जा सके.

श्रम और रोजगार मंत्रालय वर्तमान न्यूनतम पेंशन भुगतान में संशोधन की वित्तीय व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए आंतरिक मूल्यांकन जरूर कर रहा है, लेकिन सरकार ने अभी तक किसी आधिकारिक नीतिगत प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है. प्रशासनिक चर्चाओं में भी हमेशा इसे अचानक 7,500 रुपये करने के बजाय धीरे-धीरे 1,500 से 3,000 रुपये के बीच करने की बात कही गई है.

कैसे काम करता है EPS-95 का गणित?

कॉरपोरेट और विनिर्माण क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए शुरू की गई इस योजना के तहत मानक EPS-95 पेंशन प्राप्त करने के लिए कम से कम 10 वर्षों की औपचारिक अंशदायी सेवा (Contributory Service) अनिवार्य है. किसी व्यक्ति की वास्तविक पेंशन की गणना एक निश्चित गणितीय सूत्र के आधार पर की जाती है.

$$\text{मासिक पेंशन} = \frac{\text{पेंशन योग्य वेतन} \times \text{पेंशन योग्य सेवा}}{70}$$

जो अंशधारक 20 वर्ष या उससे अधिक की सक्रिय सेवा पूरी करते हैं, उन्हें उनकी सेवा अवधि में दो वर्ष का अतिरिक्त वेटेज दिया जाता है.

इस योजना का फंड कॉर्पोरेट और केंद्र सरकार के साझा योगदान से चलता है.

1,000 रुपये की न्यूनतम सीमा विशेष रूप से कम आय वाले कामगारों की सुरक्षा के लिए बनाई गई थी, जिनकी गणना सामान्य फार्मूले से इस राशि से कम बैठती है. ऐसे में इस बेसलाइन में किसी भी तरह की बड़ी बढ़ोतरी सीधे तौर पर देश के राजकोषीय आवंटन को प्रभावित करती है. EPFO ने सभी लाभार्थियों से अपील की है कि वे किसी भी नीतिगत बदलाव की पुष्टि केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल्स के जरिए ही करें और ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें.

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