Fact Check: क्या खाड़ी देशों में करोड़ों में बिकते हैं मानव अंग? भोपाल हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया के खतरनाक अंधविश्वास और अफवाह का पर्दाफाश
इंस्टाग्राम रील्स और सोशल मीडिया पर खाड़ी देशों में मानव अंग करोड़ों रुपये में बिकने का दावा पूरी तरह फर्जी और बेबुनियाद है. भोपाल में इस अंधविश्वास और फर्जी वीडियो के झांसे में आकर कुछ युवकों ने एक किशोर की हत्या कर दी. मेडिकल विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे दावों का कोई चिकित्सकीय, वैज्ञानिक या कानूनी आधार नहीं है.
भोपाल/नई दिल्ली: सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म्स—इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और व्हाट्सएप ग्रुप्स—पर प्रसारित होने वाले एक फर्जी दावे ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक भयानक अपराध को जन्म दे दिया. इंटरनेट पर यह दावा किया जा रहा था कि खाड़ी देशों (Gulf Countries) में मानव अंडकोष (Testicles) की भारी मांग है और इसके लिए ₹6 करोड़ तक की रकम मिलती है.
चिकित्सा विशेषज्ञों, कानूनी जानकारों और अंग प्रत्यारोपण प्राधिकरणों ने इस दावे को पूरी तरह से निराधार, वैज्ञानिक रूप से असंभव और आपराधिक अफवाह करार दिया है. इस तरह के अंगों का न तो कोई वैध मेडिकल बाजार है और न ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति में ऐसी कोई वाणिज्यिक खरीद-फरोख्त संभव है. यह भी पढ़ें: Fact Check: क्या बेंगलुरु में छीन लिया गया अभिनेता प्रकाश राज का वोटिंग अधिकार? जानें दावों का पूरा सच
भोपाल हत्याकांड: ऑनलाइन अफवाह का जानलेवा परिणाम
इंटरनेट पर व्यूज बटोरने के लिए फैलाई जाने वाली फर्जी खबरों का घातक रूप भोपाल में तब सामने आया, जब जहांगीराबाद और कमला नगर पुलिस ने बीबीए छात्र जोहेब खान (20 वर्ष) और उसके चार अन्य साथियों को एक 16 वर्षीय किशोर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया.
पुलिस जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी जोहेब ने सोशल मीडिया पर वायरल एक रील देखी थी, जिसमें मानव अंगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कीमत मिलने का दावा किया गया था. उसने खुद को मेडिकल का छात्र बताकर अन्य साथियों को बहलाया और दावा किया कि इसे बेचने पर ₹1 करोड़ से ₹1.5 करोड़ तक मिल सकते हैं.
आरोपियों ने 6 अगस्त को इकबाल मैदान से एक नाबालिग स्ट्रीट वेंडर को झगड़े में मदद के बहाने खटलापुरा के पास बुलाया, जहां चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दी गई और उसके निजी अंग काट लिए गए. इसके बाद जब आरोपियों को पता चला कि इसका कोई खरीदार मौजूद ही नहीं है और न ही उनके पास अंगों को सुरक्षित रखने की कोई चिकित्सकीय सुविधा है, तो उन्होंने अंग को झील में फेंक दिया. 10 अगस्त को पुलिस ने शव बरामद कर सभी आरोपियों को जेल भेज दिया.
वैज्ञानिक और चिकित्सीय रूप से क्यों पूरी तरह फर्जी है यह दावा?
अंग प्रत्यारोपण विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने इस वायरल अफवाह के पीछे के मेडिकल सच को स्पष्ट किया है:
- चिकित्सीय आवश्यकता का अभाव: अंडकोष का प्रत्यारोपण (Transplant) अत्यंत दुर्लभ, जटिल और प्रायोगिक प्रक्रिया है, जिसे दुनिया में कहीं भी नियमित रूप से नहीं किया जाता. हार्मोनल संतुलन या शारीरिक आवश्यकताओं के लिए आधुनिक चिकित्सा में 'हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी' (HRT) और कृत्रिम प्रोस्थेटिक प्रत्यारोपण (Prosthetic Implants) का उपयोग होता है, जिसके चलते किसी जैविक अंग की खरीद की कोई मेडिकल जरूरत नहीं होती.
- अंग संरक्षण की जटिल तकनीक: मानव ऊतकों और अंगों को जीवित रखने के लिए विशेष कोल्ड-इस्केमिया सॉल्यूशन और बेहद कड़े तापमान नियंत्रण की आवश्यकता होती है, जिसमें अंग को शरीर से अलग करने के कुछ ही घंटों के भीतर उपयोग में लाना होता है। सामान्य परिस्थितियों में अंगों को काटकर सुरक्षित रखना जैविक रूप से असंभव है.
- सख्त अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानून: भारत में 'मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994' (THOTA) के तहत अंगों की किसी भी प्रकार की व्यावसायिक खरीद-बिक्री या मौद्रिक लेन-देन गैरकानूनी और गैर-जमानती अपराध है. खाड़ी देशों में भी मानव अंगों की तस्करी के खिलाफ सख्त कानून और मृत्युदंड तक के कड़े प्रावधान हैं.
व्यूज के लिए फैलाई जा रही अफवाहों से सतर्क रहने की अपील
पुलिस और साइबर अपराध शाखा ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे सनसनीखेज, चमत्कारी या अवास्तविक वित्तीय दावों पर कतई विश्वास न करें.
कंटेंट क्रिएटर्स अक्सर सोशल मीडिया एल्गोरिदम के जरिए फॉलोअर्स, व्यूज और विज्ञापन से पैसे कमाने के लिए ऐसे मनगढ़ंत दावे तैयार करते हैं. बिना पुष्टि किए ऐसे कंटेंट पर भरोसा करना और उसे आगे साझा करना न केवल मानसिक भ्रम पैदा करता है, बल्कि गंभीर कानूनी और आपराधिक परिणामों का कारण भी बन सकता है.