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Fact Check: क्या जापान और भारत के बीच 5 करोड़ हिंदुओं को जापान में बसाने का हुआ समझौता? जानिए वायरल दावे की सच्चाई

वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि जापान और भारत ने एक अनुबंध (Contract) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत 50 मिलियन हिंदुओं को स्थायी रूप से जापान में बसने की अनुमति दी जाएगी. इस दावे ने सोशल मीडिया पर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी और कई लोगों ने इसे बिना सत्यापन के शेयर करना शुरू कर दिया.

Fact Check: क्या जापान और भारत के बीच 5 करोड़ हिंदुओं को जापान में बसाने का हुआ समझौता? जानिए वायरल दावे की सच्चाई

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि जापान और भारत के बीच एक ऐसा समझौता हुआ है, जिसके तहत 5 करोड़ (50 मिलियन) हिंदुओं को जापान में बसने की अनुमति दी जाएगी. इस दावे को फेसबुक (Facebook) और एक्स (X, पूर्व में ट्विटर) समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर शेयर किया जा रहा है. हालांकि, पड़ताल में यह दावा पूरी तरह फर्जी और भ्रामक निकला है. Fact Check: क्या भारत सरकार ने जारी की हैं नई व्हाट्सएप्प मॉनिटरिंग गाइडलाइंस? PIB फैक्ट चेक ने बताया वायरल दावे का सच

क्या किया गया दावा?

वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि जापान और भारत ने एक अनुबंध (Contract) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत 50 मिलियन हिंदुओं को स्थायी रूप से जापान में बसने की अनुमति दी जाएगी. इस दावे ने सोशल मीडिया पर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी और कई लोगों ने इसे बिना सत्यापन के शेयर करना शुरू कर दिया.

क्या है सच्चाई?

जांच में सामने आया कि भारत और जापान के बीच ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है, जिसमें 5 करोड़ हिंदुओं को जापान में बसाने की बात कही गई हो. वास्तव में दोनों देशों के बीच "Action Plan for India-Japan Human Resource Exchange and Cooperation" नाम की एक पहल शुरू की गई है.

भारत के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच 5 लाख (500,000) से अधिक लोगों का आदान-प्रदान करना है. इसमें भारत से 50,000 कुशल पेशेवर (Skilled Personnel) और संभावित प्रतिभाओं (Potential Talents) को जापान में काम, प्रशिक्षण और शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है.

एक फ़ेक पोस्ट में दावा किया गया है कि जापान और भारत के बीच 50 मिलियन हिंदुओं को जापान में बसने की अनुमति देने का समझौता हुआ है

The claim that India and Japan have signed a contract allowing 50 million Hindus to settle in Japan is false (Photo Credits: X/@CoinMarginalX)

समझौते में धर्म या स्थायी बसावट का कोई जिक्र नहीं

यह समझौता केवल मानव संसाधन सहयोग (Human Resource Exchange), शिक्षा, शोध, कौशल विकास, उद्योग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए किया गया है. इसमें किसी धर्म विशेष का उल्लेख नहीं है और न ही लाखों लोगों को स्थायी रूप से जापान में बसाने का कोई प्रावधान है.

यह पहल वर्ष 2025 भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन (India-Japan Annual Summit) के दौरान अंतिम रूप दी गई थी. इसका उद्देश्य भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, प्रशिक्षुओं और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराना तथा भारत में जापानी भाषा शिक्षा को बढ़ावा देना भी है.

वायरल वीडियो की सच्चाई

वायरल पोस्ट के साथ साझा किए गए वीडियो में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक के दौरान रक्षा सहयोग से जुड़े एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करते दिखाई दे रहे हैं. इस वीडियो का 5 करोड़ हिंदुओं को जापान में बसाने वाले दावे से कोई संबंध नहीं है.

असली वीडियो में नई दिल्ली में एक द्विपक्षीय बैठक में राजनाथ सिंह और शिंजिरो कोइज़ुमी दिखाई दे रहे हैं

फैक्ट चेक एजेंसियों ने भी बताया फर्जी

स्वतंत्र फैक्ट-चेक संस्थानों Alt News और The Quint ने भी इस वायरल दावे की जांच की है. दोनों संस्थानों ने स्पष्ट किया कि भारत-जापान समझौता केवल मानव संसाधन आदान-प्रदान से संबंधित है. इसमें न तो किसी धर्म विशेष का उल्लेख है और न ही बड़े पैमाने पर स्थायी बसावट का कोई प्रावधान.

निष्कर्ष

फैक्ट चेक में वायरल दावा पूरी तरह फर्जी साबित हुआ है. भारत और जापान के बीच 5 करोड़ हिंदुओं को जापान में बसाने का कोई समझौता नहीं हुआ है. वास्तविक समझौता केवल काम, शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध के लिए पांच वर्षों में 5 लाख से अधिक लोगों के आदान-प्रदान से जुड़ा है. इसलिए सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा भ्रामक और गलत है.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 30, 2026 06:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).