Agartala Viral Video: त्रिपुरा के अगरतला में कपल का कथित अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, असली या AI डीपफेक होने पर छिड़ी बहस
अगरतला में एक कॉलेज के पास एक युवा जोड़े का कथित अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बहस छिड़ गई है. नेटिजन्स इस वीडियो के असली होने या एआई डीपफेक तकनीक से निर्मित होने को लेकर बंटे हुए हैं.
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Agartala Viral Video: सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों अगरतला का एक कथित वीडियो क्लिप तेजी से प्रसारित हो रहा है. इस क्लिप में एक युवा जोड़े को कथित तौर पर आपत्तिजनक स्थिति में देखा जा सकता है. इंटरनेट पर इस वीडियो के सामने आने के बाद से ही नेटिजन्स के बीच इसे लेकर व्यापक चर्चा और बहस शुरू हो गई है. दावा किया जा रहा है कि यह पूरा वीडियो लगभग 19 मिनट 34 सेकंड लंबा है.
वीडियो की प्रामाणिकता पर उठे सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) और अन्य माध्यमों पर कई अकाउंट्स द्वारा इस वीडियो के स्क्रीनशॉट, छोटे हिस्से और लिंक साझा किए जा रहे हैं. ऑनलाइन ट्रैकिंग के अनुसार, लोग इंटरनेट पर "Agartala viral video" और "Agartala viral case" जैसे कीवर्ड्स का इस्तेमाल करके इसे तेजी से खोज रहे हैं. हालांकि, इस वीडियो की सत्यता को लेकर इंटरनेट यूजर्स के बीच दो अलग-अलग राय देखने को मिल रही हैं. यह भी पढ़े: Rajasthan Shocker: जैसलमेर और दौसा में अश्लील वीडियो बनाकर पोर्न साइट पर डाला, 70 साल के बुजुर्ग को भी नहीं बख्शा; आरोपी युवती और उसका साथी गिरफ्तार
एक तरफ जहां कुछ नेटिजन्स का दावा है कि यह घटना अगरतला के एक स्थानीय कॉलेज क्षेत्र के पास की है और यह एक वास्तविक लीक एमएमएस (MMS) है. वहीं दूसरी तरफ, तकनीक की समझ रखने वाले कई यूजर्स ने इसकी प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. इन विश्लेषकों का कहना है कि वीडियो की बनावट और विजुअल्स को देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) या किसी आधुनिक एडिटिंग टूल की मदद से तैयार किया गया एक 'डीपफेक' वीडियो हो.
डीपफेक तकनीक का बढ़ता खतरा
वर्तमान में डीपफेक तकनीक के उन्नत होने के कारण वास्तविक और कृत्रिम रूप से निर्मित (सिंथेटिक) वीडियो के बीच अंतर करना बेहद मुश्किल हो गया है. डिजिटल फ्रॉड या किसी को बदनाम करने के उद्देश्य से अक्सर उपद्रवी तत्व एआई फेस-स्वैपिंग टूल्स का इस्तेमाल करते हैं. इसके जरिए बिना किसी सहमति के किसी भी व्यक्ति के चेहरे को किसी अश्लील या आपत्तिजनक वीडियो पर बेहद सफाई से मैप कर दिया जाता है.
फिलहाल, इस विशिष्ट वीडियो क्लिप को लेकर स्थानीय प्रशासन, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स या साइबर सुरक्षा विश्लेषकों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. किसी भी स्वतंत्र मीडिया संस्थान या सरकारी एजेंसी ने अभी तक इस वीडियो के असली होने या इसके पात्रों की सही पहचान की पुष्टि नहीं की है.
अश्लील सामग्री साझा करने के कानूनी परिणाम
कानूनी विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया पर इस तरह की सामग्री को साझा करने या आगे बढ़ाने को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं. भारतीय कानून के तहत किसी भी प्रकार की यौन स्पष्ट या अश्लील सामग्री को डाउनलोड करना, देखना या फॉरवर्ड करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है.
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सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 67: इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक रूप से अश्लील सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करने पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को भारी जुर्माने के साथ तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है.
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आईटी अधिनियम की धारा 67A: यदि प्रसारित की गई सामग्री अत्यधिक यौन स्पष्ट (Sexually Explicit) श्रेणी में आती है, तो पहली बार अपराध करने पर 5 साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
साइबर विंग और स्थानीय प्राधिकारी लगातार उपयोगकर्ताओं को चेतावनी देते हैं कि वे ऐसे किसी भी वायरल ट्रेंड से जुड़े असत्यापित लिंक्स पर क्लिक न करें. इन लिंक्स में अक्सर मैलवेयर, फ़िशिंग और डेटा चोरी करने वाले वायरस छिपे होते हैं, जो उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा और बैंकिंग सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 29, 2026 11:49 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

