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Fact Check: नेपाल के मुक्तिनाथ में मिला 31 टन का विशाल शालिग्राम पत्थर? जानिए वायरल दावे का पूरा सच

सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर दावा किया जा रहा है कि नेपाल के मुक्तिनाथ क्षेत्र में 31 टन वजनी विशाल शालिग्राम पत्थर मिला है. पोस्ट में शेयर की गई तस्वीरों के जरिए इसे दुर्लभ और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण प्राकृतिक खोज बताया जा रहा है.

Fact Check: नेपाल के मुक्तिनाथ में मिला 31 टन का विशाल शालिग्राम पत्थर? जानिए वायरल दावे का पूरा सच

31-Ton Shaligram Stone Fact Check: सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि नेपाल के मुक्तिनाथ में 31 टन का विशाल शालिग्राम पत्थर मिला है. इस दावे के साथ एक बड़े काले पत्थर की तस्वीर भी शेयर की जा रही है, जिसे प्राकृतिक शालिग्राम बताया जा रहा है. हालांकि, जांच में यह दावा भ्रामक साबित हुआ है. वायरल तस्वीर में दिखाई दे रही वस्तु कोई प्राकृतिक शालिग्राम पत्थर नहीं, बल्कि शालिग्राम पत्थर से तराशी गई एक विशाल मूर्ति है.

क्या है वायरल दावा?

सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर दावा किया जा रहा है कि नेपाल के मुक्तिनाथ क्षेत्र में 31 टन वजनी विशाल शालिग्राम पत्थर मिला है. पोस्ट में शेयर की गई तस्वीरों के जरिए इसे दुर्लभ और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण प्राकृतिक खोज बताया जा रहा है.

विशाल शालिग्राम पत्थर से तराशी गई मूर्ति

(Photo Credits: X)

जांच में क्या सामने आया?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वायरल तस्वीर वास्तव में नेपाल के मुस्तांग जिले के जोमसोम में स्थापित 22 फीट ऊंची शालिग्राम प्रतिमा की है. इस प्रतिमा का निर्माण धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है. इसे काली गंडकी नदी से लाए गए बड़े पत्थर को कलाकारों द्वारा तराशकर तैयार किया गया है. यह कोई प्राकृतिक रूप से मिला शालिग्राम पत्थर नहीं है.

इस विशाल प्रतिमा का उद्घाटन दक्षिण भारत के कर्नाटक स्थित श्रृंगेरी शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य महास्वामी विदुशेखर भारती महाराज ने अपने नेपाल दौरे के दौरान किया था. स्थानीय प्रशासन ने भी पुष्टि की है कि यह प्रतिमा कृत्रिम रूप से बनाई गई है और इसे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है.

शालीग्राम कृत्रिम है

शालिग्राम पत्थर क्या होता है?

शालिग्राम पत्थर प्राकृतिक रूप से नेपाल की काली गंडकी नदी में पाए जाने वाले जीवाश्म (फॉसिल) होते हैं. हिंदू धर्म में इन्हें भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है और विशेष रूप से वैष्णव संप्रदाय में इनकी पूजा की जाती है. असली शालिग्राम पत्थर आकार में छोटे होते हैं और आमतौर पर हाथ में आसानी से रखे जा सकते हैं. ऐसे में 31 टन के प्राकृतिक शालिग्राम पत्थर मिलने का दावा वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाता.

निष्कर्ष

नेपाल के मुक्तिनाथ में 31 टन का प्राकृतिक शालिग्राम पत्थर मिलने का दावा भ्रामक है. वायरल तस्वीर वास्तव में मुस्तांग के जोमसोम में स्थापित 22 फीट ऊंची कृत्रिम शालिग्राम प्रतिमा की है, जिसे कलाकारों ने बड़े पत्थर को तराशकर बनाया है. इसलिए सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा सही नहीं है.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 28, 2026 08:24 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).