Vishwakarma Puja 2026 Messages: शुभ विश्वकर्मा पूजा! प्रियजनों संग शेयर करें ये हिंदी WhatsApp Wishes, Photo SMS, Facebook Greetings
हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का दिव्य वास्तुकार, शिल्पकार और प्रथम यांत्रिक इंजीनियर (इंजीनियरिंग के जनक) माना जाता है. आज देशभर में विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जा रहा है, ऐसे में आप इन शानदार हिंदी मैसेजेस, वॉट्सऐप विशेज, फोटो एसएमएस, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए अपनों को इस पर्व की बधाई दे सकते हैं.
Vishwakarma Puja 2026 Messages in Hindi: हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का दिव्य वास्तुकार, शिल्पकार और प्रथम यांत्रिक इंजीनियर (इंजीनियरिंग के जनक) माना जाता है. यह पर्व विशेष रूप से कारीगरों, शिल्पकारों, औद्योगिक श्रमिकों, इंजीनियरों और तकनीकी पेशेवरों द्वारा पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है.
विश्वकर्मा पूजा 2026: तिथि एवं शुभ मुहूर्त
विश्वकर्मा पूजा सौर कैलेंडर और कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है, जब सूर्य देव सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करते हैं:
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पूजा की तिथि: गुरुवार, 17 सितंबर 2026
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कन्या संक्रांति क्षण: सुबह 07:58 बजे
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पुण्य काल मुहूर्त: सुबह 07:58 बजे से दोपहर 02:31 बजे तक
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महा पुण्य काल: सुबह 07:58 बजे से 10:09 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:15 बजे से 01:05 बजे तक
विश्वकर्मा पूजा के शुभकामना संदेश (Wishes & Quotes)
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"शिल्प और सृजन के देव भगवान विश्वकर्मा आपके व्यापार और कार्यक्षेत्र में नई ऊंचाइयां प्रदान करें। विश्वकर्मा पूजा 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं!"
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"आपके हाथों में हुनर की शक्ति और जीवन में सफलता की चमक सदैव बनी रहे। भगवान विश्वकर्मा की कृपा आप पर सदा बरसे।"
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"जय-जय श्री भुवन विश्वकर्मा, कृपा करे श्री गुरुदेव सुधर्मा। श्री विश्वकर्मा जयंती की आपको और आपके पूरे परिवार को ढेरों मंगलकामनाएं!"
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"आपकी मेहनत को मिले नया मुकाम, हर कार्य में बढ़े आपका मान-सम्मान। विश्वकर्मा पूजा की हार्दिक बधाई!"
इतिहास एवं पौराणिक संदर्भ
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा का प्राकट्य समुद्र मंथन के समय हुआ था। कुछ धर्मग्रंथों में उन्हें भगवान ब्रह्मा का मानस पुत्र भी बताया गया है. उन्होंने संपूर्ण ब्रह्मांड की दिव्य संरचनाओं, महलों और अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया:
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पौराणिक नगरियां: सतयुग में देवलोक/स्वर्गलोक, त्रेतायुग में सोने की लंका और द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी व हस्तिनापुर का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था.
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दिव्य अस्त्र-शस्त्र: भगवान शिव का 'त्रिशूल', भगवान विष्णु का 'सुदर्शन चक्र', देवराज इंद्र का 'वज्र' और कर्ण के 'कुंडल' भी उनकी अद्वितीय शिल्पकला के उदाहरण हैं.
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जगन्नाथ पुरी की मूर्तियां: ओडिशा के पुरी स्थित प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की काष्ठ प्रतिमाओं का निर्माण भी विश्वकर्मा जी द्वारा ही किया गया था.
विश्वकर्मा पूजा का महत्व
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औजारों और आजीविका का सम्मान: यह दिन मनुष्य को अपनी आजीविका चलाने वाले उपकरणों, मशीनों, कंप्यूटर, वाहनों और औजारों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने की सीख देता है.
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व्यापारिक उन्नति और सुरक्षा: कारखानों, दुकानों, वर्कशॉप और कार्यालयों में पूजा करने से व्यापार में उन्नति, नई ऊर्जा और कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं से सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है.
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शिल्प और रचनात्मकता का उत्सव: यह पर्व श्रम की गरिमा (Dignity of Labor) और तकनीकी कुशलता का सम्मान करता है.
सरल पूजा विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
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स्वच्छता व तैयारी: कार्यस्थल, कारखाने, ऑफिस या वर्कशॉप की अच्छी तरह सफाई करें। सभी मशीनों, औजारों और वाहनों को धोकर साफ करें.
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चौकी स्थापना: एक स्वच्छ चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पास में कलश स्थापित करें.
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यंत्र-पूजन (औजारों का पूजन): अपने मुख्य औजारों, मशीनों, कंप्यूटर और रजिस्टरों पर रोली, चंदन और हल्दी से तिलक लगाएं व कलावा (मौली) बांधें.
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पूजन सामग्री अर्पण: भगवान को अक्षत, अबीर, फूल, माला, धूप, दीप और मौसमी फल अर्पित करें. मिष्ठान या पंचमेवा का भोग लगाएं.
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मंत्र जप: हाथ में पुष्प लेकर इस मूल मंत्र का 11 या 21 बार जप करें:
"ॐ आधार शक्तपे नमः और ॐ कूमयि नमः, ॐ अनन्तम नमः, ॐ पृथिव्यै नमः"
अथवा सरल मंत्र: "ॐ श्री विश्वकर्मणे नमः"
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आरती व प्रसाद वितरण: कपूर या घी के दीपक से विश्वकर्मा जी की आरती करें। पूजा के बाद प्रसाद सभी सहयोगियों, कर्मचारियों और परिजनों में बांटें। (मान्यता के अनुसार इस दिन औजारों का उपयोग न करके उन्हें विश्राम दिया जाता है।)