Sawan Special Story: सावन में खुलते हैं आस्था के ऐसे रहस्य, जिन पर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल है, जानिए भारत के 5 सबसे अनोखे शिव मंदिर

सावन के महीने में इन सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. लोग सिर्फ पूजा-अर्चना के लिए ही नहीं, बल्कि इन अनोखी परंपराओं और उनसे जुड़ी मान्यताओं को करीब से देखने के लिए भी यहां पहुंचते हैं. हालांकि, इन मंदिरों से जुड़ी कई बातें स्थानीय लोक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं.

सावन 2026 (Photo Credits: File Image)

Sawan Special Story: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, व्रत और जलाभिषेक के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसे शिव मंदिर भी हैं, जहां की परंपराएं सदियों से लोगों को हैरान करती आ रही हैं? कहीं भगवान शिव की आरती सिगरेट से होती है, कहीं शिवलिंग पर शराब चढ़ाई जाती है, तो कहीं बिना किसी पुजारी के अपने आप पूजा होने की मान्यता है. आइए जानते हैं ऐसे ही पांच रहस्यमयी और अनोखे शिव मंदिरों के बारे में. Sawan Special: भोलेनाथ के इन मंदिरों की अनोखी परंपरा का राज क्या है? सिगरेट और शराब से जुड़ी है कहानी

1. धन्ना बाबा धाम, मेरठ – जहां सिगरेट से होती है आरती

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के कासमपुर गांव स्थित धन्ना बाबा धाम अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां बाबा की आरती अगरबत्ती नहीं बल्कि सिगरेट से की जाती है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि ऐसा करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

2. खबीस बाबा मंदिर, सीतापुर – जहां शिवलिंग पर चढ़ती है शराब

सीतापुर के अटवा गांव में स्थित खबीस बाबा मंदिर में भक्त शिवलिंग पर दूध या गंगाजल की जगह शराब अर्पित करते हैं. स्थानीय मान्यता है कि इससे बाबा प्रसन्न होते हैं और भक्तों की इच्छाएं पूरी होती हैं. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है.

3. निष्कलंक महादेव मंदिर, गुजरात – जो दिन में दो बार समुद्र में गायब हो जाता है

गुजरात के भावनगर में स्थित निष्कलंक महादेव मंदिर ज्वार-भाटा के कारण दिन में दो बार समुद्र के पानी में डूब जाता है और फिर कुछ घंटों बाद दोबारा दिखाई देता है. श्रद्धालुओं के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता.

4. स्तंभेश्वर महादेव मंदिर – जहां दर्शन का समय तय करता है समुद्र

गुजरात का स्तंभेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी अनोखी बनावट के लिए जाना जाता है. ज्वार आने पर पूरा मंदिर समुद्र में समा जाता है और भाटा आने पर फिर से बाहर आ जाता है. इसलिए यहां दर्शन का समय समुद्र की लहरें तय करती हैं.

5. तिलभांडेश्वर महादेव, वाराणसी – जहां शिवलिंग हर साल बढ़ता है

वाराणसी के प्राचीन तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग हर वर्ष तिल (तिल के दाने) के बराबर बढ़ता है. यही वजह है कि इस मंदिर को देश के सबसे रहस्यमयी शिव मंदिरों में गिना जाता है.

सावन में क्यों बढ़ जाती है इन मंदिरों की चर्चा?

सावन के महीने में इन सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. लोग सिर्फ पूजा-अर्चना के लिए ही नहीं, बल्कि इन अनोखी परंपराओं और उनसे जुड़ी मान्यताओं को करीब से देखने के लिए भी यहां पहुंचते हैं. हालांकि, इन मंदिरों से जुड़ी कई बातें स्थानीय लोक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं.

Share Now