Muharram 2026 Date: भारत में नहीं दिखा मुहर्रम का चांद, इस तारीख से शुरू होगा इस्लामी नया साल; जानें कब है आशूरा
भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में सोमवार को मुहर्रम का चांद नजर नहीं आया। इसके चलते इस्लामी नया साल (1448 हिजरी) और मुहर्रम का पवित्र महीना बुधवार, 17 जून से शुरू होगा. वहीं, मुहर्रम की सबसे महत्वपूर्ण तारीख 'यौम-ए-आशूरा' शुक्रवार, 26 जून को मनाई जाएगी. दूसरी ओर, सऊदी अरब में चांद दिखने के बाद 16 जून से ही मुहर्रम की शुरुआत हो चुकी है.
Muharram 2026 Date: भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित भारतीय उपमहाद्वीप के देशों में सोमवार, 15 जून की शाम को मुहर्रम-उल-हराम (Muharram-ul-Haram) का चांद (क्रिसेंट मून) नजर नहीं आया. चांद का दीदार न होने के कारण अब इस्लामी नववर्ष 1448 हिजरी (Islamic New Year 1448 Hijri) और मुहर्रम (Muharram) के पवित्र महीने का पहला दिन बुधवार, 17 जून से शुरू होगा. इसी के साथ इस महीने की सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक तारीख 'यौम-ए-आशूरा' (Youm-e-Ashura) (10 मुहर्रम) शुक्रवार, 26 जून को मनाई जाएगी. जम्मू-कश्मीर के प्रमुख शिया विद्वान मौलाना मसरूर अब्बास अंसारी के शरिया मामलों के कार्यालय ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि सोमवार को चांद नहीं दिखने के कारण 1 मुहर्रम अब 17 जून को होगा. यह भी पढ़ें: Eid al-Adha 2026: देश भर में बकरीद की धूम, पीएम नरेंद्र मोदी ने दी ईद-उल-अजहा की बधाई; मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़
पाकिस्तान में भी समिति ने की घोषणा
भारत की तरह पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी सोमवार को मुहर्रम का चांद दिखाई नहीं दिया. लाहौर में आयोजित केंद्रीय रुएत-ए-हिलाल समिति (Central Ruet-i-Hilal Committee) की बैठक के बाद देश के धार्मिक मामलों और अंतरधार्मिक सद्भाव मंत्रालय ने इसकी औपचारिक घोषणा की.
मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि देश में मुहर्रम 1448 हिजरी का चांद नहीं देखा गया है, इसलिए पहला मुहर्रम बुधवार, 17 जून से शुरू होगा और आशूरा का दिन 26 जून को होगा. बांग्लादेश से भी चांद न दिखने और इसी तारीख को अपनाने की समान रिपोर्ट सामने आई है.
भारत में इस्लामी नया साल
पाकिस्तान में इस्लामी नया साल
सऊदी अरब में इस्लामी नया साल
सऊदी अरब में 16 जून से शुरू हुआ नया साल
भारतीय उपमहाद्वीप के विपरीत, सऊदी अरब के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार शाम को ही मुहर्रम का चांद दिखने की पुष्टि कर दी थी. सऊदी अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को जु अल-हिज्जा महीने की 29वीं तारीख थी और वहां चांद का दीदार होने के बाद उम्म अल-कुरा कैलेंडर के मुताबिक मंगलवार, 16 जून को मुहर्रम का पहला दिन घोषित कर दिया गया. खाड़ी देशों और पश्चिमी देशों में इसी गणना के आधार पर त्योहार और पवित्र दिन मनाए जा रहे हैं.
क्या है हिजरी कैलेंडर और मुहर्रम का महत्व?
इस्लामी कैलेंडर को हिजरी कैलेंडर या चंद्र कैलेंडर कहा जाता है. इसकी शुरुआत ऐतिहासिक 'हिजरत' से हुई थी, जब पैगंबर मोहम्मद ने सन 622 ईस्वी में मक्का से मदीना की यात्रा की थी. इसी प्रवास (माइग्रेशन) को आधार मानकर नए साल और धार्मिक तिथियों की गणना की जाती है. मुहर्रम को पवित्र कुरान में वर्णित चार सबसे पवित्र महीनों में से एक माना गया है, जिसमें युद्ध वर्जित होता है और लोग इबादत, तौबा (पश्चाताप) व दान-पुण्य करते हैं.
यह महीना दुनिया भर के मुसलमानों, विशेषकर शिया समुदाय के लिए बेहद भावुक और शोक का समय होता है। यह महीना सन 680 ईस्वी में हुए कर्बला के ऐतिहासिक युद्ध की यादें ताजा करता है, जिसमें पैगंबर मोहम्मद के नवासे (नाती) इमाम हुसैन और उनके परिवार के सदस्य सत्य और न्याय की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे.
आशूरा और 'मुहासाबा' की अहमियत
मुहर्रम के 10वें दिन को आशूरा या यूम-ए-आशूरा कहा जाता है। इस दिन मुस्लिम समुदाय में रोजा रखने की विशेष अहमियत है. मान्यता है कि इस दिन रोजा रखने से पिछले एक साल के पाप मिट जाते हैं. वहीं शिया समुदाय के लिए यह इमाम हुसैन की शहादत का मुख्य शोक दिवस होता है, जिसके तहत वे मजलिस और मातम का आयोजन करते हैं.
आमतौर पर अन्य कैलेंडरों के नए साल की तरह इस्लामी नए साल पर कोई जश्न या पार्टियां नहीं मनाई जाती हैं. इसके बजाय, इस दिन को 'मुहासाबा' (आत्म-जवाबदेही या आत्म-निरीक्षण) के दिन के रूप में देखा जाता है, जहां लोग बीते साल के अपने कर्मों का हिसाब करते हैं और आने वाले वर्ष के लिए आध्यात्मिक सुधार का संकल्प लेते हैं.