Eid al-Adha 2026: देश भर में बकरीद की धूम, पीएम नरेंद्र मोदी ने दी ईद-उल-अजहा की बधाई; मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली, 28 मई: देश भर में गुरुवार को इस्लाम के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक, ईद-उल-अजहा (Eid-ul-Adha) यानी बकरीद (Bakrid), पूरे धार्मिक उत्साह, अकीदत और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने देशवासियों को शुभकामनाएं प्रेषित की हैं और समाज में आपसी भाईचारे तथा अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की है. सुबह की पहली किरण के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों में हजारों की संख्या में मुस्लिम धर्मावलंबी पारंपरिक वस्त्रों में सज-धजकर स्थानीय मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज अदा करने के लिए एकत्रित हुए और एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी. यह भी पढ़ें: Bakrid Mubarak 2026 Messages: ईद-उल-अजहा पर अपनों संग शेयर करें ये हिंदी Shayaris, WhatsApp Wishes, GIF Greetings और उनसे कहें बकरीद मुबारक!

पीएम मोदी का संदेश: 'गहरी हो भाईचारे और खुशियों की भावना'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर देशवासियों के नाम एक बधाई संदेश साझा किया। पीएम मोदी ने लिखा, 'ईद-उल-अजहा की हार्दिक शुभकामनाएं! यह विशेष अवसर हमारे समाज में भाईचारे और खुशियों की भावना को और गहरा करे. मैं सभी की सफलता और उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करता हूँ.' प्रधानमंत्री का यह संदेश समाज में सकारात्मकता और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने की दिशा में आया है.

मस्जिदों में उमड़ा जनसैलाब; शांति और कौमी एकता की दुआ

देश के कोने-कोने से सुबह के समय बड़ी संख्या में नमाजियों के जुटने की खबरें सामने आई हैं. दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद से लेकर मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों की प्रमुख मस्जिदों में अकीदतमंदों का तांता लगा रहा. नमाज के बाद देश में शांति, अमन-चैन, कौमी एकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं.

नमाजियों और विद्वानों ने कहा कि यह त्योहार केवल एक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता को भाईचारे, सांप्रदायिक सद्भाव, करुणा, बलिदान और दान का संदेश देता है. त्योहार के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और कानून-व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सभी बड़े शहरों में स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, ताकि लोग शांतिपूर्ण माहौल में त्योहार का आनंद ले सकें.

त्याग और अटूट विश्वास का प्रतीक है ईद-उल-अजहा

ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से ईद-उल-अजहा या बकरीद का वैश्विक स्तर पर मुस्लिम समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है. यह त्योहार पैगंबर इब्राहिम के अद्वितीय बलिदान और ईश्वर के प्रति उनके अटूट समर्पण की याद में मनाया जाता है, जो ईश्वर के आदेश पर अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए भी तैयार हो गए थे.

यह पावन अवसर ईश्वर के प्रति अडिग विश्वास, कृतज्ञता, क्षमा, दया और दानशीलता का प्रतीक है. इस दिन परिवार एक साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं, सामूहिक भोज का आयोजन होता है और त्योहार की मूल भावना के तहत गरीबों व जरूरतमंदों के बीच भोजन और सहायता सामग्री का वितरण कर समाज के वंचित तबके को भी खुशियों में शामिल किया जाता है.

चांद के दीदार के आधार पर तय हुई तारीख

अन्य इस्लामिक त्योहारों की तरह ही ईद-उल-अजहा की तारीख भी पूरी तरह से हिलाल (क्रिसेंट मून यानी दूज के चांद) के दीदार पर निर्भर करती है. इस वर्ष देश के अधिकांश हिस्सों में तय शाम को जिल-हिज्जा (Dhul-Hijjah) का चांद दिखाई न देने के कारण इस्लामिक कैलेंडर का महीना एक दिन आगे बढ़ गया था, जिसके परिणामस्वरूप भारत के अधिकांश राज्यों में यह त्योहार आज, 28 मई को मनाया जा रहा है. हालांकि, जम्मू-कश्मीर सहित देश के कुछ सीमित क्षेत्रों में यह त्योहार एक दिन पहले यानी बुधवार (27 मई) को भी मनाया गया था.