Hartalika Teej 2026 Wishes: हरतालिका तीज के इन प्यार भरे हिंदी WhatsApp Messages, Quotes, Facebook Greetings के जरिए दें शुभकामनाएं
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला अखंड सौभाग्य का पावन पर्व 'हरतालिका तीज' इस वर्ष 14 सितंबर 2026 को उदयातिथि के अनुसार मनाया जा रहा है.सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए यह निर्जला व्रत रखती हैं. इस अवसर पर भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की बालू व मिट्टी की प्रतिमा बनाकर विधिवत पूजन किया जाता है.
Hartalika Teej 2026 Wishes in Hindi: हरियाली तीज (Hartalika Teej) और कजरी तीज (Kajri Teej) के बाद महिलाओं द्वारा श्रद्धा व निष्ठा से रखा जाने वाला सबसे प्रमुख व्रत हरतालिका तीज (Hartalika Teej) इस वर्ष 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ता है.
सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख और दांपत्य जीवन में समृद्धि की कामना से यह कठिन निर्जला व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित युवतियां योग्य वर की प्राप्ति के लिए शिव-पार्वती की आराधना करती हैं.
ग्रहों के दुर्लभ संयोग से बढ़ेगा व्रत का फल
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष हरतालिका तीज पर कई अत्यंत शुभ और फलदायी योग बन रहे हैं:
- शुभ योग और धनयोग: इस दिन तृतीया तिथि के प्रभाव के साथ-साथ कन्या राशि में चंद्रमा और मंगल की उपस्थिति से विशेष धनयोग का निर्माण हो रहा है.
- गणेश आराधना का संयोग: तृतीया के साथ चतुर्थी तिथि के संक्रमण काल का प्रभाव जुड़ने से इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ-साथ प्रथम पूज्य श्री गणेश की उपासना भी विशेष फल प्रदान करने वाली मानी जा रही है.
परिजनों और सहेलियों को भेजने के लिए शुभकामना संदेश
इस मांगलिक अवसर पर सखी-सहेलियों और संबंधियों को शुभकामनाएं देने के लिए प्रमुख संदेश:
- संदेश 1: माथे पर बिंदिया, हाथों में सजी रहे लाल चूड़ियां, मिले महादेव और मां पार्वती का सदा आशीर्वाद. हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं!
- संदेश 2: सुहाग की लंबी उम्र हो और घर में बरसे खुशहाली, हरतालिका तीज आपके जीवन में लाए खुशियों की लाली. Happy Hartalika Teej 2026!
- संदेश 3: भगवान शिव और माता पार्वती आपके दांपत्य जीवन को प्रेम, विश्वास और अखंड सौभाग्य से भर दें. आपको और आपके परिवार को हरतालिका तीज की मंगलकामनाएं.
मिट्टी की प्रतिमाओं का पूजन और पारंपरिक विधि
हरतालिका तीज की पूजन प्रक्रिया अत्यंत विशिष्ट और पारंपरिक मानी जाती है:
- प्रतिमा निर्माण: व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं. इसके बाद शुद्ध बालू या काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं।
- पूजा सामग्री: एक वेदी (चौकी) पर केले के पत्ते बिछाकर प्रतिमाओं को स्थापित किया जाता है. भगवान गणेश को दूर्वा, माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री और भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा और श्वेत पुष्प अर्पित किए जाते हैं.
- कथा और पारण: धूप, दीप, फल व नैवेद्य अर्पित कर हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनी जाती है और आरती की जाती है. शाम को प्रदोष काल में महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पुनः विधिवत आरती व भजन-कीर्तन करती हैं तथा अगले दिन सुबह प्रतिमाओं के विसर्जन के उपरांत व्रत का पारण किया जाता है.
व्रत का पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हिमालय पर्वत पर कठोर तपस्या की थी. उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे, लेकिन माता पार्वती के मन में केवल महादेव बसे थे.
उनकी सखियों ने उनका 'हरण' (गुप्त स्थान पर ले जाना) कर जंगल में छिपा दिया था, जहां माता पार्वती ने मिट्टी के शिवलिंग बनाकर निर्जला तप किया और अंततः भगवान शिव ने प्रकट होकर उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया. 'हरत' (हरण) और 'आलिका' (सखी) से मिलकर ही इस व्रत का नाम 'हरतालिका' पड़ा.