त्योहार

Ekadashi Kab Hai: तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा

अजा एकादशी 2026 का पावन व्रत आज 7 सितंबर, सोमवार को है. इस लेख में अजा एकादशी के महत्व, भगवान विष्णु की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, और 8 सितंबर को पारण के सही समय की विस्तृत जानकारी प्राप्त करें. यह व्रत पापों का नाश कर सुख-समृद्धि प्रदान करता है.

Ekadashi Kab Hai: तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा
Aja-Ekadashi

सनातन धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण और अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है. भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है. यह व्रत आज, 7 सितंबर 2026, सोमवार को श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने और भगवान श्रीहरि की आराधना करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति मिलती है और समस्त पापों से मुक्ति मिलती है.

अजा एकादशी का महत्व और व्रत कथा

अजा एकादशी को अन्नदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, विशेषकर उत्तर भारत से बाहर की कुछ परंपराओं में. इस एकादशी का महत्व पद्म पुराण में भी वर्णित है, जहां कहा गया है कि इसका व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन से सभी कष्ट दूर होते हैं और उसे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.

इस पावन व्रत की कथा सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है. एक बार विपरीत परिस्थितियों के कारण राजा हरिश्चंद्र को अपना राज्य, संपत्ति और परिवार गंवाना पड़ा. वे एक चांडाल के घर दास के रूप में जीवन व्यतीत करने लगे और गहन चिंता में डूब गए. इसी दौरान, महर्षि गौतम ने उन्हें अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी. राजा हरिश्चंद्र ने श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन किया, जिसके प्रभाव से उन्हें अपना खोया हुआ राज्य, पुत्र और पत्नी वापस मिल गए. अंततः मृत्यु के बाद उन्हें बैकुंठ धाम की प्राप्ति हुई. यह कथा एकादशी के व्रत की महिमा और उसके फल को दर्शाती है.

पूजा विधि और अनुष्ठान

अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है. व्रत रखने वाले भक्त इन नियमों का पालन करते हैं:

  • स्नान और संकल्प: सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र स्नान करें. स्नान के जल में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाना शुभ माना जाता है. स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें.
  • विष्णु पूजा: एक स्वच्छ चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. उसके बगल में जल से भरा एक तांबे का कलश स्थापित करें, जिसे आम के पत्तों और नारियल से सजाया जाता है. भगवान को जल, फूल, फल, धूप, दीप और विशेष रूप से तुलसी दल अर्पित करें.
  • मंत्र जाप: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें.
  • व्रत कथा: एकादशी व्रत के दौरान अजा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करना या श्रवण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है.
  • अन्न का त्याग: एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित होता है. भक्त निर्जला (जल के बिना) या फलाहारी (फलों पर आधारित) व्रत रखते हैं.
  • दान: व्रत का पारण करने से पहले, मंदिर या गरीब लोगों में अन्न, वस्त्र और अन्य वस्तुओं का दान करना चाहिए. पीली वस्तुओं का दान भी अत्यंत शुभ माना जाता है.

पूजा मुहूर्त और पारण का समय

अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026 को रखा जा रहा है. व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाएगा.

विवरण समय (भारतीय मानक समय) स्रोत
एकादशी तिथि प्रारंभ 6 सितंबर 2026, शाम 07:29 बजे
एकादशी तिथि समाप्त 7 सितंबर 2026, शाम 05:03 बजे
अजा एकादशी व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार
सुबह पूजा मुहूर्त 7 सितंबर 2026, सुबह 06:10 बजे से 07:16 बजे तक (राहुकाल से पूर्व)
पारण तिथि 8 सितंबर 2026, मंगलवार
पारण शुभ मुहूर्त 8 सितंबर 2026, सुबह 06:02 बजे से सुबह 08:33 बजे तक

जो लोग नौकरीपेशा हैं और सुबह पूजा के लिए कम समय पाते हैं, वे राहुकाल (जो 7 सितंबर को सुबह 08:54 बजे से 10:32 बजे तक या कुछ स्थानों पर 07:36 बजे से 09:10 बजे तक रहेगा) से पहले अपनी पूजा संपन्न कर सकते हैं. राहुकाल को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता.

क्षेत्रीय विविधताएं और आधुनिक पालन

अजा एकादशी मुख्य रूप से पूरे भारत में मनाई जाती है, हालांकि इसके नाम और अनुष्ठानों में क्षेत्रीय भिन्नताएं हो सकती हैं. उत्तर भारत में इसे अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है, जबकि अन्य क्षेत्रों में इसे अन्नदा एकादशी भी कहते हैं. आधुनिक समय में भी यह व्रत अपनी महत्ता बनाए हुए है. शहरों में जहां जीवनशैली तेज है, भक्त अपनी सुविधानुसार सुबह जल्दी स्नान-पूजा करके व्रत का संकल्प लेते हैं और दिनभर भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं. कई लोग मंदिरों में जाकर विशेष पूजा-अर्चना में भी भाग लेते हैं, जबकि कुछ घरों में ही परिवार के साथ व्रत कथा का पाठ करते हैं.

यह पवित्र दिन हमें धर्म, सत्य और निष्ठा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. अजा एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक पुण्य प्रदान करता है, बल्कि मानसिक शांति और आत्म-शुद्धि का भी मार्ग प्रशस्त करता है. भगवान विष्णु की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है.

(The above story first appeared on LatestLY on Sep 07, 2026 10:27 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).