Eid Milad Un Nabi 2025 Messages: ईद-मिलाद-उन-नबी के इन हिंदी Quotes, WhatsApp Wishes, GIF Greetings के जरिए दें मुबारकबाद
ईद-मिलाद-उन-नबी 2025 (Photo Credits: File Image)

Eid Milad Un Nabi 2025 Messages in Hindi: इस्लाम धर्म में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब (Prophet Hazrat Muhammad) के जन्मदिन को ईद मिलाद-उन-नबी (Eid Milad Un Nabi) के तौर पर हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्म इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-उल-अव्वल की 12वीं तारीख को हुआ था, इसलिए इस दिन ईद मिलाद-उन-नबी यानी मावलिद का पर्व मनाया जाता है. उनका जन्म 570 ईस्वी में सऊदी अरब के मक्का में हुआ था. सुन्नी समुदाय के लोग पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्म को रबी-उल-अव्वल (Rabi-ul-Awal) की 12वीं तारीख को मनाते हैं, जबकि शिया समुदाय के लोग इस त्योहार को 17वें दिन मनाते हैं. इस साल ईद-मिलाद-उन-नबी का त्योहार 5 सितंबर 2025 को मनाया जा रहा है. ईद मिलाद-उन-नबी न केवल पैगंबर मोहम्मद के जन्म का प्रतीक है, बल्कि उनकी मृत्यु के शोक में भी इस दिन को याद किया जाता है.

ईद मिलाद-उन-नबी के दिन रात भर प्रार्थनाएं होती हैं और जगह-जगह जुलूस भी निकाले जाते हैं. घरों और मस्जिदों में लोग कुरआन का पाठ करते हैं. इस दिन गरीबों को दान भी किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि ईद मिलाद-उन-नबी के दिन दान और जकात करने से अल्लाह मेहरबान होते हैं. इस खास अवसर पर आप इन हिंदी मैसेजेस, कोट्स, वॉट्सऐप विशेज, जीआईएफ ग्रीटिंग्स के जरिए ईद मिलाद-उन-नबी मुबारक कह सकते हैं.

1- ‘अपने भाई के लिए वही पसंद करो जो तुम अपने लिए पसंद करते हो.’

(सहीह अल-बुखारी, मुस्लिम)

ईद-मिलाद-उन-नबी 2025 (Photo Credits: File Image)

2- ‘सबसे अच्छा वह है जो हर किसी के लिए सबसे अधिक लाभकारी हो.’

(अल-मुअज्जम अल-कबीर)

ईद-मिलाद-उन-नबी 2025 (Photo Credits: File Image)

3- ‘मुस्कुराहट भी एक सदका (दान) है.’

(सहीह अल-बुखारी)

ईद-मिलाद-उन-नबी 2025 (Photo Credits: File Image)

4- ‘अल्लाह उस पर दया नहीं करता जो लोगों पर दया नहीं करता.’

(सहीह अल-बुखारी, मुस्लिम)

ईद-मिलाद-उन-नबी 2025 (Photo Credits: File Image)

5- ‘धोखा देने वाला हम में से नहीं है.’

(सहीह मुस्लिम)

ईद-मिलाद-उन-नबी 2025 (Photo Credits: File Image)

इस्लाम धर्म में ईद-मिलाद-उन-नबी का काफी महत्व बताया जाता है और यह त्योहार इस्लामिक लोगों को एकता के सूत्र में बांधता है, साथ ही यह पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं को याद करने का भी अवसर प्रदान करता है. कहा जाता है कि अल्लाह ने सबसे पहले पैगंबर हजरत मोहम्मद को ही पवित्र कुरआन अता की थी, जिसके बाद उन्होंने पवित्र कुरआन का संदेश दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने का काम किया.

पैगंबर मोहम्मद साहब के पिता का नाम अब्दुल्लाह और माता का नाम बीबी आमिना था. कहा जाता है कि इस्लाम धर्म के आखिरी पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्म से पहले ही उनके पिता का निधन हो चुका था, जब वो छह साल के हुए तब उनकी मां का भी निधन हो गया. मां के निधन के बाद पैगंबर मोहम्मद अपने चाचा अबू तालिब और दादा अबू मुतालिब के साथ रहने लगे.