Devshayani Ekadashi 2026 Wishes: देवशयनी एकादशी के इन भक्तिमय हिंदी WhatsApp Messages, Quotes, Facebook Greetings के जरिए दें शुभकामनाएं
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी इस वर्ष 25 जुलाई 2026 को मनाई जा रही है. इस पावन तिथि से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत होगी और शुभ व मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा.
Devshayani Ekadashi 2026 Wishes in Hindi: हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली 'देवशयनी एकादशी' (Devshayani Ekadashi) (जिसे आषाढ़ी एकादशी, हरिशयनी एकादशी या पद्मनाभा एकादशी भी कहा जाता है) इस वर्ष शनिवार, 25 जुलाई 2026 को मनाई जा रही है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में चार महीने की गहन योग निद्रा में चले जाते हैं। देवशयनी एकादशी के साथ ही चार महीने की अवधि यानी 'चातुर्मास' का आरंभ हो जाता है.
चातुर्मास की शुरुआत और शुभ कार्यों पर ब्रेक
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास शुरू हो जाएगा, जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी तक चलेगा. भगवान विष्णु के शयनकाल में जाने के कारण इन चार महीनों के दौरान सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों पर शास्त्रीय रोक रहेगी.
इस अवधि में विवाह, यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार, गृह प्रवेश, मुंडन, दीक्षा ग्रहण और नए व्यापार की शुरुआत जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. देवउठनी एकादशी पर जब भगवान विष्णु योग निद्रा से जागेंगे, तभी से शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत होगी.
शिवजी संभालेंगे सृष्टि का कार्यभार
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के चार महीनों के दौरान जब भगवान विष्णु विश्राम करते हैं, तब वे सृष्टि के संचालन और संरक्षण का प्रभार भगवान शिव को सौंप देते हैं.
यही कारण है कि चातुर्मास के दौरान भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व माना गया है. खासकर श्रावण (सावन) के महीने में शिव पूजन, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.
देवशयनी एकादशी की पूजा विधि और नियम
मान्यता है कि देवशयनी एकादशी का व्रत रखने से साधक के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं. इस दिन पूजा की मुख्य प्रक्रिया इस प्रकार है:
- स्नान व संकल्प: एकादशी के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
- पीले वस्त्र धारण: स्नान के पश्चात पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें.
- विष्णु पूजन: पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें पीले फूल, पीले फल, तुलसी पत्र, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें.
- मंत्र एवं पाठ: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.
- सात्विक जीवन: चातुर्मास के दौरान भजन-कीर्तन, कथा, भागवत पाठ और सत्संग से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, इसलिए साधक को चार महीनों तक सात्विक नियम अपनाने की सलाह दी जाती है.