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Dahi Handi 2026: मुंबई में दही हांडी का त्योहार कब मनाया जाएगा? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

मुंबई में वर्ष 2026 में दही हांडी का त्यौहार 5 सितंबर (शनिवार) को धूमधाम से मनाया जाएगा. भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और माखन चोरी की लीलाओं से जुड़े इस उत्सव का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है.

Dahi Handi 2026: मुंबई में दही हांडी का त्योहार कब मनाया जाएगा? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Dahi Handi 2026: महाराष्ट्र विशेषकर मुंबई और ठाणे में जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाने वाला दही हांडी (गोपालाकाला) का त्यौहार वर्ष 2026 में 5 सितंबर (शनिवार) को मनाया जाएगा. भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है, जिसके ठीक अगले दिन नवमी तिथि पर दही हांडी का भव्य आयोजन होता है. वर्ष 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर (शुक्रवार) को है, जिसके बाद शनिवार को शहर भर में गोविंदा पथक मानव पिरामिड बनाकर दही हांडी फोड़ेंगे.

दही हांडी की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में अष्टमी तिथि 3 सितंबर की दोपहर से प्रारंभ होकर 4 सितंबर 2026 तक रहेगी. इसके आधार पर 4 सितंबर को पूरे देश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत एवं पूजन किया जाएगा.  यह भी पढ़े:  Dahi Handi 2026: महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, 1.60 लाख गोविंदाओं को मिलेगा ₹10 लाख का बीमा कवर

इसके बाद 5 सितंबर 2026 (शनिवार) को दही हांडी का उत्सव आयोजित किया जाएगा. मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई के विभिन्न इलाकों में सुबह से ही दही हांडी प्रतियोगिताओं की शुरुआत हो जाती है, जो देर रात तक चलती है.

दही हांडी का धार्मिक और पौराणिक महत्व

दही हांडी उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा हुआ है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बाल्यावस्था में श्रीकृष्ण को माखन, दही और दूध अत्यंत प्रिय था. वे अपने सखाओं (ग्वालों) के साथ मिलकर गोकुल और वृंदावन के घरों में मटकियों में रखा माखन चुराकर खाया करते थे.

माखन को बचाने के लिए गोपियां मटकियों को छत से ऊंचे स्थानों पर लटका देती थीं. श्रीकृष्ण अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर मानव पिरामिड बनाते थे और माखन की मटकी तक पहुंचकर उसे फोड़ देते थे. इसी पावन बाल लीला को जीवंत करने के लिए दही हांडी का आयोजन किया जाता है.

मुंबई में कैसे मनाया जाता है यह उत्सव?

मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में दही हांडी केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक बड़ा सांस्कृतिक और खेल उत्सव बन चुका है. शहर में सैकड़ों 'गोविंदा पथक' (समूह) महीनों पहले से ही मानव पिरामिड बनाने का कड़ा अभ्यास करते हैं.

आयोजक ऊंचाइयों पर मटकियां लटकाते हैं, जिनमें दही, माखन, मेवे और पुरस्कार राशि रखी जाती है. गोविंदा पथक 7 से 9 स्तर (थर) तक के मानव पिरामिड बनाकर इन हांडियों को फोड़ते हैं. देखने वालों की भारी भीड़, संगीत और 'गोविंदा आला रे' के जयकारों से पूरा माहौल उत्साही हो जाता है.

सुरक्षा नियम और प्रशासनिक दिशानिर्देश

दही हांडी को महाराष्ट्र में आधिकारिक तौर पर साहसिक खेल (Adventure Sport) का दर्जा दिया गया है. इसके तहत आयोजकों और गोविंदा पथकों के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य है.

बीते हादसों को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा जाल (Safety Nets), गद्दे, हेलमेट, चेस्ट गार्ड और एम्बुलेंस की तैनाती सुनिश्चित की जाती है. इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा गोविंदाओं के लिए बीमा कवर की व्यवस्था भी की जाती है ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता मिल सके.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 11, 2026 03:51 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).