भारत में अब तक का सबसे गर्म साल रहा 2024, IMD ने कहा- हर मौसम पर दिखा गर्मी का असर

IMD ने 2024 को भारत का सबसे गर्म वर्ष घोषित किया, जो 2016 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ चुका है. पूरे वर्ष का औसत तापमान सामान्य से अधिक रहा, और सभी मौसमों में गर्मी का असर देखा गया, जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव, बाढ़ और सूखे जैसी चरम मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं.

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नई दिल्ली: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 15 जनवरी 2025 को अपनी वार्षिक रिपोर्ट 'एनुअल क्लाइमेट समरी 2024' जारी की, जिसमें बताया गया कि 2024 भारत का सबसे गर्म साल रहा। इससे पहले यह रिकॉर्ड 2016 के नाम था, लेकिन 2024 ने इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. IMD की रिपोर्ट में यह भी पुष्टि की गई है कि पूरे देश में औसत तापमान सामान्य से अधिक रहा, जो जलवायु परिवर्तन की बढ़ती समस्या का संकेत है.

2024 के दौरान भूमि सतह वायु तापमान में 1991-2020 के दीर्घकालिक औसत से +0.65 डिग्री सेल्सियस अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जो 1901 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद का सबसे गर्म वर्ष साबित हुआ. इससे पहले 2016 में तापमान में +0.54 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च के अलावा, पूरे वर्ष में औसत मासिक तापमान सामान्य से अधिक रहा, जिससे हर मौसम में गर्मी का असर स्पष्ट रूप से देखा गया.

हीटवेव का कहर

2024 में हीटवेव ने पूरे देश में तांडव मचाया। अप्रैल में पूर्वी तट के अधिकतर हिस्सों में गर्म हवाओं का प्रकोप रहा, जबकि मई में उत्तर-पश्चिम भारत में भीषण गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया. जून में उत्तर और मध्य भारत में रिकॉर्ड तोड़ गर्म हवाएं चलीं. उत्तराखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में अधिकतम तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया.

सभी मौसमों में गर्मी का असर

2024 के चारों मौसमों में औसत तापमान सामान्य से अधिक रहा

अक्टूबर 2024 अब तक का सबसे गर्म अक्टूबर साबित हुआ, जिसमें औसत तापमान सामान्य से +1.23 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया. नवंबर 2024 भी अब तक का दूसरा सबसे गर्म नवंबर था, जिसमें औसत तापमान +0.84 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा.

जलवायु परिवर्तन का खतरा

2024 का यह रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी का साल भारत के लिए एक गंभीर चेतावनी है. रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव, बाढ़, सूखा और अन्य चरम मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं. इन घटनाओं से देश भर में पर्यावरणीय संकट गहरा रहा है, और भविष्य में इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है.

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