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अधीर रंजन के TMC के साथ युद्ध पथ पर होने से कांग्रेस बंगाल में सिर्फ वाम दलों के साथ रह सकती है

नए साल की शुरुआत से ही पश्चिम बंगाल में विपक्षी इंडिया गठबंधन के भीतर एकता पर हर दिन खतरा मंडराने के संकेत मिल रहे हैं. राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और उसके कट्टर प्रतिद्वंद्वी सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के बीच किसी भी तरह की समझ हमेशा सवालों के घेरे में रहती थी, लेकिन संभावित कांग्रेस-तृणमूल कांग्रेस समझौते के बारे में कुछ अटकलें थीं.

अधीर रंजन के TMC  के साथ युद्ध पथ पर होने से कांग्रेस बंगाल में सिर्फ वाम दलों के साथ रह सकती है
(Photo Credit : Twitter)

कोलकाता, 6 जनवरी : नए साल की शुरुआत से ही पश्चिम बंगाल में विपक्षी इंडिया गठबंधन के भीतर एकता पर हर दिन खतरा मंडराने के संकेत मिल रहे हैं. राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और उसके कट्टर प्रतिद्वंद्वी सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के बीच किसी भी तरह की समझ हमेशा सवालों के घेरे में रहती थी, लेकिन संभावित कांग्रेस-तृणमूल कांग्रेस समझौते के बारे में कुछ अटकलें थीं. हालांकि, यह भी तभी संभव था, जब कांग्रेस आलाकमान ने पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल के साथ किसी भी गठबंधन पर अपने राज्य नेतृत्व के बहुमत की आपत्तियों को खारिज कर दिया. ताजा जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ने वाममोर्चा और तृणमूल कांग्रेस दोनों के साथ बातचीत के दरवाजे आखिर तक खुले रखे हैं.

हालांकि, पिछले दस दिनों के दौरान तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं और कांग्रेस की राज्य इकाई से संकेत मिले हैं कि सत्तारूढ़ दल, भाजपा और कांग्रेस-वाम मोर्चा गठबंधन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की एक बड़ी संभावना है. गौरतलब है कि कांग्रेस और सीपीआई(एम) दोनों ने दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ने और ऑल-इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) के प्रतिनिधि नौशाद सिद्दीकी को वहां से खड़े होने की अनुमति देने का प्रारंभिक निर्णय लिया है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह कदम निस्संदेह डायमंड हार्बर के वर्तमान लोकसभा सदस्य और तृणमूल कांग्रेस महासचिव अभिषेक बनर्जी को मुश्किल में डाल देगा. यह भी पढ़ें : यूपी में सीट बंटवारे को लेकर सपा-कांग्रेस में तनाव, बसपा ने ‘खेल बिगाड़ा’

ऐसा उस निर्वाचन क्षेत्र में एक बड़ी अल्पसंख्यक आबादी के दोहरे कारकों के कारण है. जो वहां के उम्मीदवारों के भाग्य को निर्धारित करने के लिए पर्याप्त है और मुस्लिम मतदाताओं, विशेषकर युवाओं के बीच सिद्दीकी की आसमान छूती लोकप्रियता है. पर्यवेक्षकों का कहना है कि डायमंड हार्बर में तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी और एआईएसएफ के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की स्थिति में, वहां के मौजूदा सांसद पूरे राज्य में पार्टी के लिए प्रचार पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय काफी हद तक खुद को उस निर्वाचन क्षेत्र तक ही सीमित रखेंगे.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद ही कलह के बीज बो दिए, जब उन्होंने संकेत दिया कि जहां राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन की जीत होगी, वहीं पश्चिम बंगाल के मामले में तृणमूल कांग्रेस अकेले ही भाजपा से मुकाबला करेगी. सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन को रहने दीजिए, लेकिन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस लड़ाई लड़ेगी. याद रखें, पश्चिम बंगाल में केवल तृणमूल कांग्रेस ही भाजपा को सबक सिखा सकती है. तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल से पूरे देश को रास्ता दिखा सकती है. कोई अन्य पार्टी ऐसा करने में सक्षम नहीं है.

मुख्यमंत्री का बयान राज्य कांग्रेस अध्यक्ष और पांच बार के लोकसभा सदस्य अधीर रंजन चौधरी के लिए तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के समझौते के खिलाफ अपने पुराने तर्क को दोहराने के लिए ट्रिगर था. अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि गुटबाजी और भ्रष्टाचार ने राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी को कैंसर के अंतिम चरण में पहुंचा दिया है. गुरुवार शाम को कांग्रेस नेता ने लोकसभा चुनाव में उनके खिलाफ लड़ने के लिए ममता बनर्जी को सीधी चुनौती देकर, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (डब्ल्यूबीपीसीसी) की ओर से तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी भी गठबंधन के लिए सभी दरवाजे लगभग बंद कर दिए.

चौधरी ने पश्चिम बंगाल में पार्टी के लिए सिर्फ दो सीटों के मुकाबले असम, मेघालय और गोवा में सीटों की तृणमूल कांग्रेस की मांगों को बेतुका प्रस्ताव बताया, खासकर तब जब दो सीटों पर पहले से ही कांग्रेस के मौजूदा सांसद हैं. कुछ ही समय में, सीपीआई(एम) की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने इस मुद्दे पर चौधरी के साथ एकजुटता व्यक्त की. सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि हालांकि, मुझे कांग्रेस के आंतरिक नीतिगत मामले के बारे में नहीं बोलना चाहिए. मैं फिर भी कहना चाहता हूं कि मौजूदा तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को जिस तरह की राजनीतिक और प्रशासनिक मार झेलनी पड़ी है, उस पर राज्य कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से ऐसी प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक है.

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि हालांकि राजनीति में सब कुछ संभव है, लेकिन अब तक यह बिल्कुल स्पष्ट है कि इंडिया गठबंधन की अवधारणा कांग्रेस-वाम मोर्चा तक ही सीमित रहेगी, न कि कांग्रेस-तृणमूल कांग्रेस गठबंधन तक.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 06, 2024 05:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).