Winter Session 2023: पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के अगले दिन 4 दिसंबर से शुरू होगा संसद का शीतकालीन सत्र, 19 दिनों में होंगी 15 बैठकें
संसद का शीतकालीन सत्र 4 दिसंबर से शुरू होगा और 22 दिसंबर तक चलेगा. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार (9 नवंबर) को ये जानकारी दी. प्रह्लाद जोशी ने कहा, ''4 दिसंबर से 22 दिसंबर तक चलने वाले शीतकालीन सत्र में 15 बैठकें होगी.
नई दिल्ली, नौ नवंबर: संसद का शीतकालीन सत्र 4 दिसंबर से शुरू होगा और 22 दिसंबर तक चलेगा. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार (9 नवंबर) को ये जानकारी दी. प्रह्लाद जोशी ने कहा, ''4 दिसंबर से 22 दिसंबर तक चलने वाले शीतकालीन सत्र में 15 बैठकें होगी. अमृत काल के बीच सत्र के दौरान विधायी कामकाज और अन्य विषयों पर चर्चा का इंतजार है." उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी दी. उन्होंने कहा, ‘‘अमृत काल के बीच, मैं सत्र के दौरान विधायी कामकाज और अन्य विषयों पर चर्चा को लेकर उत्सुक हूं.’’ Chhath Puja 2023: यमुना नदी के तट पर नहीं होगी छठ पूजा, याचिका सुनने से दिल्ली हाई कोर्ट ने किया इनकार.
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ लगे ‘पैसे लेकर प्रश्न पूछने’ के आरोपों से जुड़े मामले में लोकसभा की आचार समिति की रिपोर्ट भी इस सत्र के दौरान सदन में पेश की जाएगी. समिति ने मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करने की अनुशंसा की है.
शीतकालीन सत्र में 15 बैठकें होगी
Winter Session, 2023 of Parliament will commence from 4th December and continue till 22nd December having 15 sittings spread over 19 days. Amid Amrit Kaal looking forward to discussions on Legislative Business and other items during the session.#WinterSession2023 pic.twitter.com/KiboOyFxk0
— Pralhad Joshi (@JoshiPralhad) November 9, 2023
प्रमुख आपराधिक कानूनों के स्थान पर लाए गए तीन प्रमुख विधेयकों पर सत्र के दौरान विचार किए जाने की संभावना है. गृह मामलों की स्थायी समिति ने हाल ही में तीन विधेयकों पर अपनी रिपोर्ट को स्वीकारा है. संसद में लंबित एक अन्य प्रमुख विधेयक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित है.
मानसून सत्र में पेश किए गए इस विधेयक को सरकार ने विपक्ष और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों के विरोध के बीच संसद के विशेष सत्र में पारित करने पर जोर नहीं दिया. सरकार इस विधेयक के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के दर्जे को कैबिनेट सचिव के बराबर लाना चाहती है. वर्तमान में उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर का दर्जा प्राप्त है.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 09, 2023 06:46 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

