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Stock Market News: शेयर बाजार में उछाल आएगा या नहीं? 3 दिसंबर तक करना पड़ेगा इंतजार

पिछले हफ्ते तक ऐसा लग रहा था कि दशहरा और दिवाली के मौजूदा त्योहारी सीजन में बाजार नई ऊंचाइयों को छूएगा और यह और भी ऊपर जाएगा. मगर एक हफ्ते बाद इजरायल-हमास की लड़ाई तेज़ होने के साथ ये उम्मीदें टूट गईं.

Stock Market News: शेयर बाजार में उछाल आएगा या नहीं? 3 दिसंबर तक करना पड़ेगा इंतजार
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नई दिल्ली, 22 अक्टूबर: पिछले हफ्ते तक ऐसा लग रहा था कि दशहरा और दिवाली के मौजूदा त्योहारी सीजन में बाजार नई ऊंचाइयों को छूएगा और यह और भी ऊपर जाएगा. मगर एक हफ्ते बाद इजरायल-हमास की लड़ाई तेज़ होने के साथ ये उम्मीदें टूट गईं.

ऐसा लगता है कि पूरे मामले में देरी हो गई है और यह और भी आगे बढ़ सकता है. पांच राज्यों में चुनाव नवंबर में होंगे और परिणाम 3 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे. इससे बाजार में कुछ हलचल होगी क्योंकि इनमें से कई राज्यों में सत्तारूढ़ दल केंद्र में सरकार नहीं है.

भारत ऐसे बाजार का एक चमकदार उदाहरण प्रतीत होता है जो अच्छा प्रदर्शन कर रहा था, क्योंकि अर्थव्यवस्था लगभग सभी सिलेंडरों पर काम कर रही थी. पैक में जोकर यह था कि तेल की कीमतों ने फिर से अपना बदसूरत सिर उठाया था और ऐसा लग रहा था कि यह तीन अंकों के निशान को पार करने के लिए तैयार है. संघर्ष जारी रहने और तेल की मार भारत पर पड़ने से रुपया भी दबाव में था और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा था.

ये सभी कारक देश, इसकी अर्थव्यवस्था और बाज़ारों के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं. ऐसे परिदृश्य में बाज़ारों में फील-गुड फैक्टर को भी झटका लगा है और बाज़ारों की तकनीकी व्यवस्था प्रभावित हुई है.

एक समय ऐसा लग रहा था कि सब कुछ ठीक चल रहा है और हम निफ्टी पर 19,800-850 को पार कर जाएंगे और फिर 20,200 अंक पर पहुंच जाएंगे जो निकट भविष्य में एक दूर का सपना लगता है.

ऐसा लगता है कि निकट अवधि का दृष्टिकोण भी थोड़ा अस्पष्ट हो गया है. हमें बॉटम बनाने और वहां से उबरने में समय लग सकता है. यह हमें 19,000-19,050 के स्तर के करीब या सबसे खराब स्थिति में 18,800 के स्तर के करीब ले जा सकता है.

इसके अलावा, राजनीतिक परिदृश्य में चुनाव से पहले हमेशा ऐसा समय होता है, जब निवेशक बाजार को लेकर थोड़ा सावधान रहते हैं.

वैसे भी, एफपीआई भारत में थोड़े सतर्क दिख रहे हैं और पिछले कुछ महीनों से शुद्ध विक्रेता रहे हैं. उनका नजरिया सिर्फ इतना बदल सकता है कि बाजार सस्ते हो गए हैं या गंतव्य के रूप में हम बाकियों से बेहतर हैं.

जीडीपी के मोर्चे पर डेटा, जीएसटी संग्रह उत्साहजनक रहा है और शिकायतों का कोई कारण नहीं है. यहां तक कि अग्रिम कर संख्या भी उत्साहवर्धक थी जिससे सरकार को उनके कर संग्रह संख्या पर आराम मिलता है.

बाज़ार में आना और वे कहां तक आगे बढ़ सकते हैं, यह एक अहम सवाल है, लेकिन इस समय इतने सारे गतिशील भागों के साथ इसका उत्तर देना मुश्किल है. इतना कहना पर्याप्त होगा कि इस समय त्योहारों की अवधि वह उत्साह नहीं दे पाएगी, जिसकी अपेक्षा की गई थी.

दिसंबर में पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद बाजार में कुछ तेजी आने की संभावना है. यदि यह आयोजन कोई हलचल नहीं दिखाता है तो हम फरवरी की शुरुआत में इसकी उम्मीद कर सकते हैं, जब बजट की घोषणा की जाती है या चुनावी वर्ष में इसका थोड़ा सा हिस्सा आता है.

यह हड़बड़ाहट और तेजी से ऊपर की ओर बढ़ने का आखिरी मौका हो सकता है. तब तक विपक्ष की स्थिति और विपक्षी गुट क्या होगा, यह तय हो चुका होगा. यह बाजार में तेजी लाने का सबसे अच्छा मौका होगा.

मौजूदा सप्ताह के दौरान सभी तकनीकी स्तर टूट गए हैं और इन स्तरों से वापसी मुश्किल दिखती है. बाज़ार को सुधारना होगा, फिर मजबूत होना होगा और उसके बाद ही ऊपर की ओर बढ़ना हो भी सकता है और नहीं भी.

निष्कर्ष के तौर पर कहें, तो युद्ध ने हमें भारत में एक नए बाजार शिखर के लिए त्योहार के उत्साह के साथ मेल खाने का एक महत्वपूर्ण मौका हमसे छीन लिया है. आइए, अगला अच्‍छा अवसर आने से पहले कुछ समय तक प्रतीक्षा करें.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 22, 2023 10:03 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).