UPI Transactions: क्या यूपीआई लेनदेन पर लगेगा चार्ज? कराधान विधेयक पास होने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी सफाई
संसद में कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित होने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेगा और इस पर कोई टैक्स या शुल्क नहीं लगाया गया है.
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नई दिल्ली: संसद द्वारा 'कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' (Taxation and Other Laws Amendment Bill, 2026) को मंजूरी मिलने के बाद आम नागरिकों के मन में यूपीआई (UPI) सेवाओं पर शुल्क लगाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लग गया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि नए कानून के तहत आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के लिए यूपीआई सेवाएं पूरी तरह से मुफ्त रहेंगी.
राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार का आम लोगों के पर्सन-टू-पर्सन (P2P) या रोज़मर्रा के डिजिटल लेनदेन पर कोई टैक्स या फीस लगाने का कोई इरादा नहीं है. यह भी पढ़ें: क्या UPI लेनदेन पर लगेगा शुल्क? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने MDR नियमों पर दी सफाई
उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के लिए नहीं लगेगा कोई चार्ज
विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि विधेयक में आम उपयोगकर्ताओं के लिए किसी भी प्रकार के लेनदेन शुल्क का प्रस्ताव नहीं है.
वित्त मंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि आम लोगों द्वारा किए जाने वाले दैनिक भुगतान और छोटे व्यापारियों के निम्न-मूल्य (Low-value) वाले लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. सरकार का ध्यान वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान के समावेशी विकास को बनाए रखने पर है.
भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन
नए पारित विधेयक के माध्यम से भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) की धारा 10A में संशोधन किया गया है। पहले इस धारा के तहत बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं द्वारा निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों पर किसी भी प्रकार का शुल्क लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित था.
संशोधित कानून सरकार और नियामक संस्थाओं (जैसे एनपीसीआई) को यह लचीलापन प्रदान करता है कि वे भविष्य में केवल बड़े व्यावसायिक संस्थाओं के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े नियम अधिसूचित कर सकें.
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का नियम क्यों है जरूरी?
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने के लिए यह वैधानिक लचीलापन आवश्यक है.
मासिक अरबों के लेनदेन को संभालने के लिए साइबर सुरक्षा, सर्वर की क्षमता और धोखाधड़ी रोकने के लिए फिनटेक कंपनियों और बैंकों को भारी निवेश की आवश्यकता होती है. भविष्य में यदि कोई एमडीआर लागू किया जाता है, तो वह केवल बड़े व्यावसायिक व्यापारियों (Large Merchants) और ₹2,000 से अधिक के बड़े लेनदेन पर ही सीमित रहेगा, जो कि सामान्य क्रेडिट या डेबिट कार्ड शुल्क से काफी कम होगा.
वित्त मंत्री सीतारमण ने यूज़र्स के लिए मुफ़्त UPI ट्रांज़ैक्शन की पुष्टि की
Small merchants remain central to the Government's commitment to financial inclusion & UPI’s inclusive growth.
The vast majority of merchant transactions - including ordinary, low-value transactions, will continue to remain free.
Any future MDR will apply only to a limited… https://t.co/Gk6QyRx7h9
— Nirmala Sitharaman Office (@nsitharamanoffc) August 10, 2026
भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन
नए पारित विधेयक के माध्यम से भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) की धारा 10A में संशोधन किया गया है. पहले इस धारा के तहत बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं द्वारा निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों पर किसी भी प्रकार का शुल्क लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित था.
संशोधित कानून सरकार और नियामक संस्थाओं (जैसे एनपीसीआई) को यह लचीलापन प्रदान करता है कि वे भविष्य में केवल बड़े व्यावसायिक संस्थाओं के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े नियम अधिसूचित कर सकें.
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का नियम क्यों है जरूरी?
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने के लिए यह वैधानिक लचीलापन आवश्यक है.
मासिक अरबों के लेनदेन को संभालने के लिए साइबर सुरक्षा, सर्वर की क्षमता और धोखाधड़ी रोकने के लिए फिनटेक कंपनियों और बैंकों को भारी निवेश की आवश्यकता होती है. भविष्य में यदि कोई एमडीआर लागू किया जाता है, तो वह केवल बड़े व्यावसायिक व्यापारियों (Large Merchants) और ₹2,000 से अधिक के बड़े लेनदेन पर ही सीमित रहेगा, जो कि सामान्य क्रेडिट या डेबिट कार्ड शुल्क से काफी कम होगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 10, 2026 07:57 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

