UPI Charges Myth vs Reality: क्या ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर लगेगा शुल्क? PSS एक्ट संशोधन का सच जानें

डिजिटल भुगतान नियामक ढांचे और पेमेंट्स एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर आम जनता में यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगने की चर्चाएं तेज हैं. विशेषज्ञों और आधिकारिक रिपोर्टों ने स्पष्ट किया है कि कानून में संशोधन केवल एक सक्षम तंत्र तैयार करता है, तत्काल कोई शुल्क नहीं लगाया जा रहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: UPI)

नई दिल्ली: भारत के डिजिटल भुगतान (Digital Payments) ढांचे में प्रस्तावित संशोधनों की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया (Social Media) और आम जनता के बीच यूपीआई (UPI) लेनदेन पर शुल्क लागू होने को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है. कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा था कि ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर फिर से चार्ज लगाया जा सकता है.

हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों और संस्थागत विश्लेषकों ने स्पष्ट किया है कि कानूनी ढांचे में किए जा रहे बदलाव का उद्देश्य केवल भविष्य के लिए एक लचीला नियामक ढांचा (Enabling Framework) तैयार करना है. इसका मतलब यह नहीं है कि आम उपभोक्ताओं या व्यापारियों पर तत्काल प्रभाव से कोई अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है. यह भी पढ़ें: सावधान! फर्जी PhonePe ऐप से दुकानदारों को लगाया जा रहा चूना, बिना पैसे ट्रांसफर दिखेगा 'Payment Successful'

PSS एक्ट में बदलाव और मौजूदा स्थिति (Status Quo)

सीएनबीसी-टीवी18 (CNBC-TV18) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन 'पेमेंट्स एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (PSS) एक्ट, 2007' की धारा 10A से संबंधित हैं. मौजूदा कानून यूपीआई जैसे डिजिटल पेमेंट नेटवर्क पर किसी भी प्रकार का शुल्क (MDR) लगाने पर पूर्ण वैधानिक प्रतिबंध (Blanket Prohibition) लगाता है.

प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से इस कड़े कानूनी प्रतिबंध को हटाकर एक लचीली व्यवस्था बनाने की योजना है. इसके तहत सरकार को भविष्य में आवश्यकतानुसार आधिकारिक अधिसूचनाओं के जरिए विशिष्ट छूट देने या मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) निर्धारित करने का कानूनी अधिकार प्राप्त होगा.

कानूनी और फिनटेक विशेषज्ञों के अनुसार, आम उपयोगकर्ताओं के लिए स्थिति पूरी तरह से अपरिवर्तित है:

वैधानिक सुरक्षा हटाने की आवश्यकता क्यों?

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में लगातार नया रिकॉर्ड बनते लेनदेन के वॉल्यूम के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ा है. साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने, सर्वर की क्षमता बढ़ाने और बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए भुगतान प्रणालियों (Payment Aggregators & Banks) को निरंतर पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है.

पूर्ण वैधानिक सुरक्षा हटाने का मुख्य उद्देश्य इस डिजिटल इकोसिस्टम के दीर्घकालिक परिचालन (Operational Sustainability) को सुनिश्चित करना है.

उच्च मूल्य वाले लेनदेन (High-Value Transactions) पर संभावित प्रभाव

यद्यपि सरकार ने किसी भी शुल्क ढांचे की घोषणा नहीं की है, लेकिन ब्रोकरेज फर्मों और बाजार विश्लेषकों ने भविष्य के संभावित परिदृश्यों का आकलन किया है.

विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में कोई शुल्क व्यवस्था लागू भी की जाती है, तो उसका ध्यान केवल बड़े व्यावसायिक लेनदेन पर होगा, जबकि छोटे व्यापारियों और दैनिक माइक्रो-पेमेंट्स को इससे बाहर रखा जाएगा:

उपभोक्ताओं और व्यवसायियों को फिलहाल चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि दैनिक यूपीआई सेवाएं पहले की तरह ही पूरी तरह मुफ्त और निर्बाध रूप से चालू हैं.

Share Now