Ayodhya Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के श्री राम मंदिर (Ayodhya Shri Ram Mandir) में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान और आभूषणों की कथित चोरी और वित्तीय हेराफेरी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) और पुलिस ने एक बड़ा क्रैकडाउन किया है. राम जन्मभूमि थाने (Ram Janmabhoomi Police Station) में प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर, पुलिस ने इस घोटाले में नामजद सभी आठों मुख्य आरोपियों को देर रात अयोध्या से ही गिरफ्तार कर लिया है.
यह पूरी कानूनी कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद की गई है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर पुलिस ने यह मुकदमा दर्ज किया है. आइए जानते हैं कि इस सनसनीखेज मामले में गिरफ्तार किए गए ये 8 आरोपी कौन हैं और मंदिर प्रशासन में इनकी क्या भूमिका थी. यह भी पढ़ें: Ram Mandir Donation Dispute: 'शिवसेना द्वारा दान की गई 4 किलो की चांदी की ईंट गायब'- संजय राउत का राम मंदिर ट्रस्ट पर बड़ा आरोप
कौन हैं गिरफ्तार हुए ये 8 आरोपी?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राम मंदिर के 'पिलग्रिम फैसिलिटी सेंटर' (PFC) में बने काउंटिंग रूम में नकदी और मूल्यवान वस्तुओं की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। इनके नाम इस प्रकार हैं:
- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव: यह इस मामले का सबसे चर्चित नाम है. टिन्नू यादव राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का निजी ड्राइवर और करीबी सहयोगी बताया जाता है. साल 2022 में मंदिर के गर्भगृह में मूर्ति स्थापना के समय से ही वह मंदिर के आंतरिक मामलों और व्यवस्थाओं की देखरेख में सक्रिय भूमिका निभा रहा था.
- सुभाष श्रीवास्तव: यह एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी (Retired Bank Employee) हैं. सुभाष श्रीवास्तव तीर्थयात्री सुविधा केंद्र (PFC) के काउंटिंग रूम में दान राशि की गिनती करने वाली शिफ्टों के मुख्य प्रभारी (In-charge) के रूप में तैनात थे.
- अनुकल्प मिश्रा (गिनती स्टाफ)
- लवकुश मिश्रा (गिनती स्टाफ)
- अविनाश शुक्ला (गिनती स्टाफ)
- मनिश कुमार यादव (गिनती स्टाफ)
- करुणेश पांडे (गिनती स्टाफ)
- रमाशंकर मिश्रा (गिनती स्टाफ)
पुलिस इन आठों नामजद आरोपियों के अलावा कुछ अन्य अज्ञात और संदिग्ध लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जो सीसीटीवी (CCTV) फुटेज में संदेहास्पद गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं.
आरोपियों पर क्या हैं आरोप और कौन सी धाराएं लगी हैं?
एसआईटी की जांच और सीसीटीवी फुटेज के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर यह बात सामने आई है कि ये कर्मचारी दान पेटियों (Donation Boxes) से निकाली गई नकदी की गिनती के दौरान हेराफेरी करते थे. कथित तौर पर ये लोग रुपयों की गिनती करते समय ₹100 या अन्य नोटों की गड्डियों के बीच में अतिरिक्त नोट छिपाकर निकाल लेते थे और बाद में उसे आपस में बांट लेते थे.
उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की बेहद गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:
- धारा 306: क्लर्क या सेवक द्वारा अपने मालिक के स्वामित्व वाली संपत्ति की चोरी करना.
- धारा 316(5) व 317: आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) और चोरी की संपत्ति को बेईमानी से छिपाकर रखना.
- धारा 61 और 3(5): एक साझा इरादे को अंजाम देने के लिए आपस में आपराधिक साजिश रचना।
- धारा 13(1)(a) (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम): लोक सेवक या ट्रस्ट के पद पर रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर वित्तीय गड़बड़ी करना.
किसने दर्ज कराई शिकायत?
इस मामले में मुख्य शिकायतकर्ता कृष्ण मोहन हैं, जो श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सम्मानित ट्रस्टी हैं. वे उत्तर प्रदेश के हरदोई के निवासी हैं और लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी (M.Sc) उत्तीर्ण हैं. वे भारतीय वन सेवा (IFS) के एक वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और सिविल सेवा में आने से पहले परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी लगभग 6 वर्षों तक काम कर चुके हैं. वर्ष 2012 में सेवानिवृत्त होने के बाद वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय हुए और सितंबर 2025 में ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद उन्हें सर्वसम्मति से इस प्रतिष्ठित मंदिर ट्रस्ट का सदस्य चुना गया था.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में बनी एसआईटी अभी इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को जल्द ही मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि गबन की गई कुल राशि कितनी है और क्या इस रैकेट के तार कुछ और बड़े लोगों से भी जुड़े हैं.












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