West Bengal SIR Row: पश्चिम बंगाल में 27 लाख नाम कटने पर सियासी घमासान, शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को बताया जिम्मेदार
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची से 27 लाख नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि इसके लिए ममता बनर्जी स्वयं जिम्मेदार हैं, न कि भाजपा या चुनाव आयोग.
West Bengal SIR Row: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध और तेज हो गया है. राज्य में मतदाता सूची से लगभग 27 लाख नाम हटाए जाने के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोला है. शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि इन नामों को हटाने की जिम्मेदारी पूरी तरह से ममता बनर्जी की है, न कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का दिया हवाला
कोलकाता में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की कार्रवाई न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई है. उन्होंने कहा कि यह फैसला खुद ममता बनर्जी द्वारा दायर की गई एक याचिका पर उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के आए निर्देशों के अनुपालन में लिया गया था. यह भी पढ़े: Protest Against EC: मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ 4 अक्टूबर को मुंबई की सड़कों पर उतरेंगे ठाकरे बंधु, जनमोर्चे का ऐलान
अधिकारी ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं और अपनी विफलता का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने का प्रयास कर रही हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया केरल में सही मानी जा सकती है, तो पश्चिम बंगाल में इस पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है?
निर्वाचन आयोग का बचाव और बैठक का जिक्र
शुभेंदु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव आयोग का बचाव करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी - की हालिया बैठक का संदर्भ दिया. उन्होंने आयोग द्वारा जारी तस्वीर दिखाते हुए कहा कि SIR से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से लिए गए हैं, न कि किसी एक व्यक्ति द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर.
भाजपा नेता ने तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों पर गलत बयानी फैलाकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि आयोग की प्रक्रिया पूरी तरह से संवैधानिक और नियमों के दायरे में है.
तृणमूल कांग्रेस का रुख और आयोग के आंकड़े
दूसरी ओर, ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है. टीएमसी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए वैध मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है.
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए 27.16 लाख से अधिक नामों में से 22 लाख से अधिक मतदाताओं ने अपने नाम पुनर्भंडारण (restoration) के लिए अपील दायर की है. आयोग का कहना है कि सत्यापन के बाद दोहरे, स्थानांतरित या मृत पाए गए मतदाताओं के नाम ही नियमानुसार हटाए गए हैं.
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे का परिदृश्य
पश्चिम बंगाल में चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर कोई नया नहीं है. हालांकि, इस बार SIR प्रक्रिया को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने और दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के आक्रामक रुख के कारण तनाव काफी बढ़ गया है.
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग द्वारा पुनरीक्षण अपीलों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची का क्या स्वरूप सामने आता है और अदालत इस मामले में क्या दिशा-निर्देश जारी करती है.