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MP UCC Bill 2026: मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित; यूसीसी अपनाने वाला देश का चौथा राज्य बना

मध्य प्रदेश विधानसभा ने ध्वनि मत से समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है. इसके साथ ही मध्य प्रदेश उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद यूसीसी अपनाने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है. इस विधेयक में बहुविवाह पर रोक, लिव-इन रजिस्ट्रेशन और बच्चों को समान अधिकार दिए जाने के प्रावधान शामिल हैं, जबकि आदिवासी समुदाय को इसके दायरे से बाहर रखा गया है.

MP UCC Bill 2026: मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित; यूसीसी अपनाने वाला देश का चौथा राज्य बना
Uniform Civil Code (File Image)

भोपाल: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) विधानसभा ने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने से जुड़े ऐतिहासिक 'यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) (UCC) विधेयक, 2026' को ध्वनि मत से पारित कर दिया है. इसके साथ ही मध्य प्रदेश उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद देश में समान नागरिक संहिता को अपनाने वाला चौथा राज्य बन गया है.

सदन के मानसून सत्र के दौरान राज्य मंत्री गौतम टेटवाल द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तय किया गया है. हालांकि, संविधान के तहत आने वाली अनुसूचित जनजाति (ST) आबादी को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है. यह भी पढ़ें: UCC in Uttarakhand: यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड, आज से प्रदेश में बदल जाएंगे शादी, संपत्ति रजिस्ट्रेशन सहित कई नियम

बहुविवाह पर रोक और शादी की कानूनी उम्र तय

पारित किए गए नए सिविल कोड के तहत पूरे प्रदेश में बहुविवाह (Polygamy) और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध घोषित किया गया है.

  • शादी की न्यूनतम उम्र: पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है.
  • अनिवार्य पंजीकरण: पंचायत स्तर से लेकर नगर निगम स्तर तक सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक का सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है.
  • मौखिक तलाक अवैध: पंचायत या अनौपचारिक तरीकों से दिए जाने वाले मौखिक तलाक को पूरी तरह अवैध करार दिया गया है.

लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन और संपत्ति अधिकार

विधेयक में लिव-इन संबंधों को लेकर सख्त नियम तय किए गए हैं. साथ रहने वाले जोड़ों के लिए संबंध शुरू होने के एक महीने के भीतर स्थानीय रजिस्ट्रार के पास घोषणा-पत्र (Declaration) जमा करना अनिवार्य होगा.

इसके साथ ही, कानून में 'अवैध' शब्द को कानूनी दायरे से हटा दिया गया है. विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने, सरोगेसी या एआरटी (ART) तकनीक से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा और संपत्ति में समान उत्तराधिकार मिलेगा। यदि पुरुष साथी महिला को छोड़ देता है, तो महिला अदालत से भरण-पोषण (Maintenance) की मांग कर सकेगी.

सदन में विपक्ष का विरोध और सरकार का पक्ष

विधेयक के पारित होने के दौरान विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों ने चर्चा के लिए कम समय दिए जाने और ध्वनि मत से बिल पास कराने का विरोध किया. विपक्ष ने विधेयक को प्रवर समिति (Select Committee) के पास भेजने और क्लॉज-बाय-क्लॉज वोटिंग कराने की मांग की.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधेयक का बचाव करते हुए इसे लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक को समान अधिकार देना है. सरकार ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समुदायों को छूट दिए जाने से उनकी सांस्कृतिक परंपराओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित

9.5 लाख से अधिक सुझावों के बाद तैयार हुआ मसौदा

यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 6-सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है. समिति ने राज्य भर में दो महीने तक चले परामर्श सत्रों और ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त 9.5 लाख से अधिक सुझावों का अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.

विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद अब इस विधेयक को राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर कानून का रूप दिया जाएगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 21, 2026 04:33 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).