Malaria Outbreak: छत्तीसगढ़ के कांकेर में सेरेब्रल मलेरिया से दो बच्चों की मौत; स्वास्थ्य विभाग ने तेज की स्क्रीनिंग
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मानसून के दौरान सेरेब्रल मलेरिया से दो बच्चों की मौत हो गई है, जबकि पांच अन्य बच्चों का इलाज शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जारी है. मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिले के ग्रामीण क्षेत्रों, आदिवासी आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया है.
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कांकेर: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कांकेर जिले (Kanker District) में मानसून के सीजन के बीच मलेरिया (Malaria) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. जिले में घातक 'सेरेब्रल मलेरिया' (Cerebral Malaria) के कारण दो बच्चों की मौत हो गई है, जबकि पांच अन्य बच्चों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उनका इलाज शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में किया जा रहा है.
घटना के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए गांवों, आदिवासी आश्रम शालाओं और छात्रावासों में बड़े पैमाने पर जांच और स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया है. यह भी पढ़ें: India First Dengue Vaccine QDENGA: भारत में पहली डेंगू वैक्सीन 'क्यूडेंगा' को मिली मंजूरी; जानें किसे लगेगी, डोज और यह कैसे करेगी काम
दो बच्चों ने तोड़ा दम, अस्पताल में भर्ती हैं अन्य
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आर.सी. ठाकुर के अनुसार, डोमनहर्रा गांव की निवासी 8 वर्षीय करीना विश्वकर्मा की 25 जुलाई को इलाज के दौरान मौत हो गई. उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से हालत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
इसके अगले दिन, मरदापोटी गांव के आदिवासी बालक आश्रम में पढ़ने वाले 9 वर्षीय छात्र सुभाष कुमेटी की भी इलाज के दौरान मौत हो गई. सुभाष को 24 जुलाई को लक्षण दिखने पर अस्पताल लाया गया था, जहां जांच में सेरेब्रल मलेरिया की पुष्टि हुई थी. फिलहाल जिले के अलग-अलग इलाकों से आए पांच बच्चों का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जबकि हल्के लक्षण वाले मरीजों का घर पर ही उपचार किया जा रहा है.
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क्या है सेरेब्रल मलेरिया?
सेरेब्रल मलेरिया, प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) परजीवी के संक्रमण के कारण होने वाली एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है. यह मलेरिया का सबसे खतरनाक रूप माना जाता है.
इस बीमारी में संक्रमण सीधे मरीज के मस्तिष्क को प्रभावित करता है, जिससे तेज बुखार के साथ दौरे (Seizures), कोमा, तंत्रिका तंत्र (Brain) को स्थायी नुकसान या समय पर इलाज न मिलने पर मौत हो सकती है. बच्चे और मलेरिया-प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग इसके प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं.
छात्रावासों और गांवों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग जारी
24 जुलाई से शुरू हुए जिला स्तरीय स्क्रीनिंग अभियान के तहत स्वास्थ्य टीमें प्रभावित इलाकों में घर-घर जाकर जांच कर रही हैं.
सीएमएचओ आर.सी. ठाकुर ने बताया कि जिले में आवश्यक दवाओं और टेस्टिंग किट का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें अन्य प्रशासनिक विभागों के साथ समन्वय बनाकर संवेदनशील इलाकों में कैंप लगा रही हैं.
स्वास्थ्य विभाग की सलाह
स्वास्थ्य अधिकारियों ने मानसूनी मौसम को देखते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. विभाग ने कहा है कि लगातार बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखने पर बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं, ताकि समय रहते गंभीर जटिलताओं से बचा जा सके.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 27, 2026 06:49 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

