TCS Salary Hike: टीसीएस कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, कंपनी ने बढ़ाई 5 फीसदी सैलरी
देश की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अपने पात्र कर्मचारियों के लिए औसतन 5 फीसदी वेतन वृद्धि लागू की है. हालांकि, नए लेबर कोड के तहत सीटीसी (CTC) ढांचे में किए गए बदलावों और ग्रैच्युटी को हटाने के कारण कई कर्मचारियों का सालाना पैकेज कागजों पर कम हो गया है, जिससे आंतरिक स्तर पर असंतोष देखा जा रहा है.
TCS Salary Hike: देश की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेवा प्रदाता कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने इस साल के अप्रेजल साइकिल में अपने भारत स्थित पात्र कार्यबल के लिए औसतन 5 प्रतिशत वेतन वृद्धि (सैलरी हाइक) को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है. आईटी क्षेत्र की अन्य कंपनियों की तुलना में टीसीएस इस साल वार्षिक वेतन संशोधन को लागू करने वाली शुरुआती कंपनियों में से एक है. हालांकि, इस सैलरी हाइक के साथ ही कंपनी ने अपने कॉस्ट-टू-कंपनी (CTC) ढांचे में बड़ा बदलाव किया है, जिससे कर्मचारियों के बीच नई बहस छिड़ गई है.
बेल-कर्व मूल्यांकन और परफॉर्मेंस बैंड के आधार पर हाइक
टीसीएस ने अपने पारंपरिक 'बेल-कर्व' मूल्यांकन पद्धति (Bell-Curve Evaluation Method) के आधार पर ही इस बार भी अप्रेजल प्रक्रिया को पूरा किया है. इसके तहत कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के अनुसार अलग-अलग बैंड (A+, A, B, और C) में विभाजित किया गया है. विभिन्न बैंड्स के अनुसार वेतन में हुआ बदलाव इस प्रकार रहा है: यह भी पढ़े: TCS Salary Hike 2026: महंगाई के बीच टीसीएस के कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, वेतन वृद्धि का ऐलान, 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया सैलरी स्ट्रक्चर
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A+ बैंड: इस सर्वोच्च ब्रैकेट में आने वाले उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को दहाई अंकों में बढ़ोतरी मिली है. यह वृद्धि 9 प्रतिशत से 13 प्रतिशत के बीच रही, जिसका औसत लगभग 10 प्रतिशत आता है.
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A बैंड: अच्छा प्रदर्शन करने वाले इस श्रेणी के अधिकांश कर्मचारियों के वेतन में 5 प्रतिशत से 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसका औसत 7 प्रतिशत से अधिक रहा.
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B बैंड: इस मध्यम स्तर के ब्रैकेट में आने वाले कर्मचारियों को काफी मामूली बढ़ोतरी मिली है. उनके वेतन में 1 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत के बीच संशोधन हुआ, जिसका औसत 3 प्रतिशत है.
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C बैंड: सबसे निचले पायदान पर रहने वाले कर्मचारियों को इस बार नगण्य या बिल्कुल भी बढ़ोतरी नहीं मिली है. इस बैंड का सांख्यिकीय औसत मात्र 0.3 प्रतिशत दर्ज किया गया.
CTC रिस्ट्रक्चरिंग: कागजों पर क्यों कम हुआ पैकेज?
इस अप्रेजल साइकिल में सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव सालाना मुआवजे (एनुअल पैकेज) को पेश करने के तरीके में किया गया है. कंपनी से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के ग्रॉस (Gross) और इन-हैंड (Net) वेतन को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है. बदलाव यह है कि टीसीएस ने अब सालाना सीटीसी (CTC) के प्रदर्शित आंकड़े में से ग्रैच्युटी (Gratuity) के हिस्से को हटा दिया है.
भारत के नए लेबर कोड (New Labour Codes) के नियमों का पालन करने के लिए आईटी दिग्गज ने पहले ही अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान 2,128 करोड़ रुपये का एकमुश्त वित्तीय प्रावधान अलग रखा था. प्रबंधन का कहना है कि कानूनी रूप से ग्रैच्युटी फंड में कंपनी का योगदान जारी है, लेकिन इसे सीटीसी के कुल योग में दिखाना बंद कर दिया गया है. यदि पिछले साल के लेटर से ग्रैच्युटी हटाकर तुलना की जाए, तो वास्तव में वेतन में वृद्धि हुई है.
टेक-होम पे और वर्क फ्रॉम ऑफिस (WFO) की नई शर्तें
कंपनी के आश्वासनों के बावजूद, कई कर्मचारियों ने अपने संशोधित सैलरी पैकेज में विसंगतियों की शिकायत की है. कई कर्मचारियों का कहना है कि इस संरचनात्मक बदलाव के बाद कागजों पर उनका कुल वार्षिक सीटीसी 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक कम दिखाई दे रहा है. C3A ग्रेड के एक कर्मचारी ने बताया कि उनके पैकेज में सीधे तौर पर 3,000 रुपये की कमी दर्ज की गई है, जिससे भविष्य में दूसरी नौकरियों के लिए बातचीत (Job Negotiation) के दौरान मुश्किलें आ सकती हैं.
इसके अलावा, कर्मचारियों ने मासिक वेरिएबल पे (Variable Pay) को त्रैमासिक या वार्षिक किश्तों में बदलने पर भी चिंता जताई है. कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि परफॉर्मेंस-लिंक्ड पेआउट्स और बोनस को अब ऑफिस आकर काम करने (Work From Office) के कड़े नियमों से जोड़ दिया गया है. ऑफिस अटेंडेंस के तय मानकों को पूरा न करने पर परफॉर्मेंस पे में कटौती की जा रही है.
आईटी सेक्टर का परिदृश्य
टीसीएस द्वारा वेतन संशोधन में अपनाई गई यह सतर्क रणनीति भारतीय आईटी क्षेत्र के व्यापक आर्थिक हालातों को दर्शाती है. वैश्विक ग्राहकों द्वारा खर्च में की जा रही कटौती, सौदों (Deal Execution) में देरी और मार्जिन के दबाव के कारण पूरा आईटी उद्योग सतर्कता बरत रहा है. जहां 5,84,519 कर्मचारियों वाली टीसीएस ने अपने तय शेड्यूल के अनुसार कदम बढ़ाया है, वहीं इन्फोसिस, एचसीएलटेक और टेक महिंद्रा जैसी प्रतिद्वंदी कंपनियों ने अभी तक अपने आगामी मुआवजा चक्र के समय और मात्रा पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है.
कर्मचारियों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए टीसीएस के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि यह नया ढांचा मानकीकरण और अनुपालन को प्राथमिकता देता है. प्रवक्ता के अनुसार, यह संशोधित संरचना तीन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है: नए लेबर कोड का अनुपालन, भारत में पूरे कार्यबल के वेतन ढांचे का मानकीकरण, और टैक्स दक्षता (Tax Efficiency) की सुविधा देते हुए कर्मचारियों के टेक-होम वेतन की सुरक्षा करना. कंपनी ने दोहराया कि वह साल-दर-साल अपने सहयोगियों को वेतन वृद्धि देने के ट्रैक रिकॉर्ड को बनाए रखने और कर्मचारियों के दीर्घकालिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है.