SSC Exam Rigging: एसएससी ऑनलाइन परीक्षा में नकल कराने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़; यूपी STF ने सेंटर चुनने वाली कंपनी के 2 डायरेक्टर किए गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स की नोएडा यूनिट ने कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित ऑनलाइन भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली कराने वाले अंतरराज्यीय सॉल्वर गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एसटीएफ ने परीक्षा केंद्रों का चयन और तकनीकी ऑडिट करने वाली अनुबंधित कंपनी 'एसेस इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड' के दो निदेशकों—गगनदीप शर्मा और यादवेन्द्र सिंह को गिरफ्तार किया है.
लखनऊ/ग्रेटर नोएडा: सरकारी नौकरियों की ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता से खिलवाड़ करने वाले एक संगठित सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने अहम कामयाबी हासिल की है. Navbharat Times की रिपोर्ट के अनुसार, एसटीएफ की नोएडा फील्ड यूनिट और ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने एसएससी परीक्षाओं के लिए सेंटर निर्धारित करने वाली कंपनी के दो निदेशकों को गिरफ्तार कर लिया है.
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जयपुर (राजस्थान) निवासी गगनदीप शर्मा और यादवेन्द्र सिंह के रूप में हुई है. इन दोनों पर सॉल्वर गिरोह के साथ साठगांठ कर संदिग्ध कंप्यूटर लैबों को परीक्षा केंद्र आवंटित करने और सुरक्षा मानकों को जानबूझकर शिथिल करने का आरोप है. यह भी पढ़ें: SSC GD Constable Answer Key 2026 Out: एसएससी जीडी कांस्टेबल परीक्षा की आंसर-की जारी, आपत्ति दर्ज करने का प्रोसेस और लिंक जानें
मई में बालाजी डिजिटल जोन पर पड़ा था छापा, ₹50 लाख हुए थे बरामद
The Times of India की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा 22 मई 2026 को हुआ था:
- नॉलेज पार्क में रेड: एसटीएफ ने ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित बालाजी डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र पर छापा मारकर सात लोगों को रंगे हाथों पकड़ा था.
- इनमें गिरोह का मुख्य सरगना व लैब संचालक प्रदीप चौहान और तकनीकी ढांचा तैयार करने वाला हैकर अमित राणा शामिल थे.
- मौके से पुलिस ने ₹50 लाख नकद, प्रॉक्सी सर्वर, कई लैपटॉप, मोबाइल फोन और अभ्यर्थियों की सूची बरामद की थी।मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 10 पहुंच चुकी है.
कैसे काम करता था प्रॉक्सी सर्वर नकल रैकेट?
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पारंपरिक पेपर लीक से अलग हाई-टेक ऑनलाइन हेराफेरी का मामला था:
- समानांतर नेटवर्क: परीक्षा केंद्र के मुख्य सर्वर को बाईपास कर लैब में दो गुप्त प्रॉक्सी सर्वर और अतिरिक्त Cat-6 केबल लगाए जाते थे.
- रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर: UltraViewer और AnyDesk जैसे टूल्स की मदद से अभ्यर्थी के कंप्यूटर की स्क्रीन बाहर बैठे सॉल्वरों (एक्सपर्ट्स) के साथ शेयर कर दी जाती थी.
- परीक्षा केंद्र के अंदर अभ्यर्थी केवल सिस्टम के सामने बैठा रहता था, जबकि बाहर बैठे सॉल्वर सीधे कंप्यूटर पर सही विकल्पों पर क्लिक कर पेपर हल करते थे.
- एसटीएफ के मुताबिक, सॉल्वर गिरोह प्रति अभ्यर्थी ₹4 लाख वसूलता था.
एसेस इन्फ्रा के निदेशकों की संदिग्ध भूमिका
एसटीएफ की विस्तृत जांच में सामने आया कि कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने परीक्षा संचालन के लिए 'एड्युक्विटी' (Eduquity) को कार्यकारी एजेंसी बनाया था, जिसने उत्तर भारत में परीक्षा केंद्रों के चयन और सुरक्षा ऑडिट का काम एसेस इन्फ्रा को सौंपा था:
- दागी ऑपरेटर को बार-बार सेंटर: अप्रैल 2026 में देहरादून के 'महादेव डिजिटल जोन' में भी प्रॉक्सी सर्वर से नकल कराने का मामला पकड़ा गया था, जिसमें प्रदीप चौहान मुख्य आरोपी था. इसके बावजूद एसेस इन्फ्रा ने मामले को नजरअंदाज करते हुए ग्रेटर नोएडा में प्रदीप चौहान की दूसरी लैब (बालाजी डिजिटल जोन) को एसएससी परीक्षा केंद्र बना दिया.
- सुरक्षा मानकों से समझौता: 2025 से अब तक इस लैब में 16 एसएससी परीक्षाएं कराई गईं. जांच में पता चला कि कंपनी ने केंद्र संचालक को निर्धारित शुल्क का भुगतान भी नहीं किया था और सुरक्षा ऑडिट में भारी छूट दी, ताकि ऑपरेटर अभ्यर्थियों से वसूली कर नकल का खेल चला सके.
सात राज्यों में फैला है संदिग्ध केंद्रों का नेटवर्क
Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ है कि इस गिरोह के तार केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं हैं:
- जांच टीम ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड और दिल्ली में फैले दर्जनों संदिग्ध कंप्यूटर केंद्रों को चिह्नित किया है.
- आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. एसटीएफ अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मध्यस्थों, केंद्र संचालकों और एजेंसी अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है.