Biometric Attendance in Schools: स्कूली छात्रों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, डमी स्कूलों पर याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के स्कूलों में छात्रों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर विचार करने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा कि प्रशासनिक और शैक्षणिक नीतियां तय करना कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने देश भर के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (Biometric Attendance System) लागू करने के निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है.
याचिका में तर्क दिया गया था कि NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को नियमित कक्षाओं से छूट देने वाले गैर-मान्यता प्राप्त 'डमी स्कूलों' (Dummy Schools) पर अंकुश लगाने के लिए बायोमेट्रिक ट्रैकिंग जरूरी है. यह भी पढ़ें: NEET-UG 2026: OMR शीट में गड़बड़ी का आरोप लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे 6 उम्मीदवार; शीर्ष अदालत सुनवाई को तैयार
कार्यपालिका का अधिकार क्षेत्र: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि स्कूलों के प्रशासनिक संचालन और हाजिरी के तरीकों को लेकर व्यापक नीतिगत निर्देश जारी करना न्यायपालिका के बजाय कार्यपालिका (Executive) और शिक्षा नीति निर्धारकों के दायरे में आता है.
अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप करने की शीर्ष अदालत की अनिच्छा को देखते हुए याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली. हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मुद्दे पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या संबंधित उच्च न्यायालयों (High Courts) का रुख करने की स्वतंत्रता दी है.
क्यों उठ रही थी डमी स्कूलों पर कार्रवाई की मांग?
हाल के वर्षों में डमी स्कूलों का चलन एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है. ऐसे संस्थानों में छात्र केवल औपचारिक रूप से नामांकित (Enrolled) रहते हैं और नियमित स्कूल जाने के बजाय निजी कोचिंग संस्थानों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं.
शिक्षाविदों और बाल कल्याण कार्यकर्ताओं का मानना है कि डमी स्कूल व्यवस्था के कारण बच्चे स्कूली जीवन के समग्र विकास, खेलकूद और सामाजिक मेलजोल से वंचित हो जाते हैं, जिससे उन पर केवल परीक्षाओं में सफलता पाने का अत्यधिक दबाव बनता है.
बच्चों के डेटा की गोपनीयता पर भी थी चिंताएं
दूसरी ओर, कानूनी विशेषज्ञों और निजता (Privacy) अधिवक्ताओं ने नाबालिग बच्चों के बायोमेट्रिक डेटा के संग्रह को लेकर चिंताएं जताई थीं. उनका तर्क था कि देश के ग्रामीण और बुनियादी सुविधाओं की कमी वाले सरकारी स्कूलों में बायोमेट्रिक तकनीक का प्रबंधन, डेटा स्टोरेज और सुरक्षा संबंधी जोखिम चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप से इनकार के बाद, अब डमी स्कूलों पर नकेल कसने और उपस्थिति नियमों का पालन कराने की पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, सीबीएसई (CBSE) और राज्य शिक्षा बोर्डों पर ही रहेगी.