TMC Symbol Dispute: सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को निर्देश; 3 महीने के भीतर सुलझाएं तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न का विवाद
तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके आधिकारिक चुनाव चिह्न 'फूल और घास' को लेकर पार्टी के दो विरोधी गुटों के बीच जारी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को समयबद्ध फैसला सुनाने का निर्देश दिया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दोनों पक्षों को चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दलीलें व साक्ष्य पूरे करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है.
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस के विभाजन और उसके चुनाव चिह्न पर वर्चस्व की कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष अदालत ने सोमवार, 28 सितंबर को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि वह दोनों विरोधी गुटों के बीच पार्टी के नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिह्न के विवाद का निपटारा तीन महीने के भीतर करे.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी संस्थापक ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा पार्टी के मूल नाम और प्रतीक को फ्रीज किए जाने के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई थी.
दलीलें पूरी करने के लिए 4 हफ्ते, फिर 3 महीने में अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मामले के त्वरित निस्तारण के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा तय की है:
- 4 सप्ताह का समय: अदालत ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों—ममता बनर्जी गुट और अरूप रॉय गुट—को चुनाव आयोग के समक्ष अपने जवाब, प्रति-उत्तर (Rejoinder) और सभी आवश्यक दस्तावेज व हलफनामे दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है.
- ECI के लिए 3 महीने की मियाद: दोनों पक्षों द्वारा दलीलें पूरी किए जाने की तारीख से चुनाव आयोग की तीन महीने की समय-सीमा शुरू होगी.
- सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग के वकील ने भारी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं के हलफनामों और साक्ष्यों का हवाला देते हुए अधिक समय की मांग की थी, लेकिन पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तय समय में प्रक्रिया पूरी करने को कहा.
चुनाव आयोग ने फ्रीज कर दिया था मूल नाम और सिंबल
यह विवाद उस समय गहरा गया था जब पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनावों की घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को एक अंतरिम आदेश पारित किया था:
- पहचान पर अंतरिम रोक: आयोग ने चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत अंतिम फैसला होने तक 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' (AITC) नाम और 'फूल और घास' प्रतीक के इस्तेमाल पर दोनों पक्षों के लिए रोक लगा दी थी.
- उपचुनाव के लिए दिए गए नए नाम व प्रतीक: 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग पहचान आवंटित की.
- ममता बनर्जी गुट: 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और फुटबॉल खिलाड़ी (Football Player) चुनाव चिह्न.
- विद्रोही गुट (अरूप रॉय/ऋतब्रत बनर्जी): 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और लिफाफा (Envelope) चुनाव चिह्न.
ममता बनर्जी ने आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती
चुनाव आयोग के इस अंतरिम कदम के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया था. याचिका में तर्क दिया गया था कि पार्टी के संस्थापक नेतृत्व और संगठन पर उनका स्पष्ट बहुमत है, ऐसे में पार्टी की मूल पहचान को फ्रीज करना अनुचित है.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह इस बात पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहा है कि टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न का असली हकदार कौन है. अदालत ने रेखांकित किया कि चुनाव की अधिसूचना पहले ही जारी हो चुकी है, इसलिए उपचुनाव के लिए आयोग की अंतरिम व्यवस्था में दखल नहीं दिया जाएगा और मूल दावे का फैसला चुनाव आयोग ही अपने नियमों के तहत करेगा.
6 अक्टूबर के उपचुनावों पर टिकी निगाहें
पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव अब दोनों गुटों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुके हैं. दोनों ही धड़े नए आवंटित चुनाव चिह्नों के साथ चुनावी मैदान में आमने-सामने हैं.
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है, जहां अगले तीन महीनों में यह तय होगा कि पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी की असली बागडोर और ऐतिहासिक 'फूल और घास' चुनाव चिह्न किस गुट के पास रहेगा.