सुप्रीम कोर्ट ने कार्यकर्ता ज्योति जगताप की जमानत याचिका पर सुनवाई जनवरी 2024 तक स्थगित कर दी
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भीमा कोरेगांव मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत जेल में बंद कार्यकर्ता ज्योति जगताप की जमानत याचिका पर सुनवाई अगले साल जनवरी तक के लिए टाल दी. न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “मामले को जनवरी के तीसरे सप्ताह में बुधवार को सूचीबद्ध करें.
नई दिल्ली, 7 दिसंबर : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भीमा कोरेगांव मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत जेल में बंद कार्यकर्ता ज्योति जगताप की जमानत याचिका पर सुनवाई अगले साल जनवरी तक के लिए टाल दी. न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “मामले को जनवरी के तीसरे सप्ताह में बुधवार को सूचीबद्ध करें. हम पहले शोमा सेन की अपील पर फैसला करेंगे और यह उसके बाद आएगा." उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत ने प्रोफेसर सेन की जमानत याचिका पर 10 जनवरी 2024 को सुनवाई करने का फैसला किया है. न्यायमूर्ति बोस ने कहा कि न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह वाली पीठ की संरचना "अस्थायी" है क्योंकि पाँच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रही है.
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की थी कि उसे यह पता लगाना होगा कि क्या जगताप का मामला सह-अभियुक्त वर्नोन गोंसाल्वेस और अरुण फरेरा को जमानत देने में शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित मापदंडों के भीतर आता है. गोंसाल्वेस और फरेरा को सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जुलाई में विचाराधीन कैदी के रूप में उनकी पाँच साल की कैद की सजा को देखते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. जगताप ने जमानत देने से इनकार करने वाले बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. यह भी पढ़ें : Uttarakhand Investors Summit: उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट की तैयारी पूरी, प्रधानमंत्री मोदी समेत देश के 50 बड़े उद्योगपति होंगे शामिल
एनआईए ने पहले ही जगताप और अन्य के खिलाफ मुंबई की एक विशेष अदालत में आरोप पत्र दायर किया था. यह मामला 31 दिसंबर 2017 को महाराष्ट्र के पुणे के शनिवारवाड़ा में कबीर कला मंच के कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित एल्गार परिषद के दौरान लोगों को उकसाने और उत्तेजक भाषण देने से संबंधित है, जिसने कथित तौर पर विभिन्न जाति समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा दिया और हिंसा हुई जिसके परिणामस्वरूप जान-माल का नुकसान हुआ और महाराष्ट्र में एक राज्यव्यापी आंदोलन शुरू हो गया.
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 07, 2023 04:01 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

