Sonam Wangchuk Hunger Strike: संसद जब तक छात्रों पर लाठीचार्ज का संज्ञान नहीं लेती, अनशन जारी रहेगा; पत्नी गीतांजलि अंगमो का ऐलान
Sonam Wangchuk with his Wife Gitanjali Angmo (Photo Credits: IANS)

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा विवाद और शिक्षा सुधारों को लेकर पिछले 24 दिनों से अनशन पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने अपना आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है.

मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित (Shift) करने की अनुमति मिलने के बाद उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि जे. अंगमो ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए यह जानकारी दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि सोमवार को 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के विरोध में वांगचुक ने अपने अनशन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है. यह भी पढ़ें: Sonam Wangchuk Health Update: सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने का दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश; पत्नी गीतांजलि बोलीं- 'नागरिक को अपनी पसंद का डॉक्टर चुनने का अधिकार' (Watch Video)

'छात्रों के समर्थन में जारी रहेगा उपवास'

अदालत परिसर के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए डॉ. गीतांजलि अंगमो ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के प्रति प्रशासन का रवैया बेहद क्रूर रहा है. उन्होंने कहा:

"सोनम ने उन छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया है, जिन्हें बर्बरतापूर्वक पीटा गया, लाठीचार्ज किया गया और जिन पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए. जब तक देश की संसद इन छात्रों की मांगों का संज्ञान नहीं लेती और उन्हें सुना नहीं जाता, तब तक उनका उपवास जारी रहेगा."

पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोपों का जवाब देते हुए गीतांजलि ने बताया कि पुलिस जबरन ट्रक में घुसकर आंदोलनकारियों को ले जाने की कोशिश कर रही थी. उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने शांतिपूर्ण और अभूतपूर्व प्रतिरोध दिखाया है.

'सफदरजंग अस्पताल में नजरबंदी जैसा माहौल था'

गीतांजलि अंगमो ने आरोप लगाया कि सरकारी सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक को भर्ती कराना अनिवार्य नहीं था, क्योंकि जंतर-मंतर पर भी उनके स्वास्थ्य सूचकांकों (Vitals) की नियमित निगरानी की जा रही थी.

उन्होंने दावा किया कि वांगचुक को जानबूझकर आईसीयू में रखा गया था ताकि बाहरी दुनिया और मीडिया से उनका संपर्क काटा जा सके. उन्होंने कहा कि पिछले 20 दिनों से वांगचुक का इलाज कर रहे डॉक्टरों और मिलने पहुंचे सांसदों तक को अस्पताल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा रही थी, जिससे "नजरबंदी और कैद" जैसा माहौल बन गया था.

उच्च न्यायालय के फैसले का किया स्वागत

दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर संतोष व्यक्त करते हुए गीतांजलि अंगमो ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और संविधान के तहत हर नागरिक को अपनी पसंद के डॉक्टर, अस्पताल और इलाज के तरीके को चुनने का मौलिक अधिकार प्राप्त है.

उन्होंने बताया कि 25 दिनों के अनशन के बाद सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति फिलहाल स्थिर है. उच्च न्यायालय के लिखित आदेश के बाद उन्हें सुरक्षा और चिकित्सीय प्रोटोकॉल के तहत मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया जाएगा, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य की निगरानी करेगी.