Shahjahanpur Viral Video: हाथ में गंगाजल लेकर पार्षदों ने खाई 'निगम की कमाई बराबर बांटने' की कसम; नगर निगम ने दिए जांच के आदेश
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर नगर निगम से जुड़ा एक हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में कथित रूप से नगर निगम के पार्षद हाथ में गंगाजल लेकर यह शपथ लेते दिख रहे हैं कि नगर निगम से होने वाली सभी प्रकार की कमाई और कमीशन को सभी 60 पार्षदों में बराबर बांटा जाएगा. इसके अलावा, किसी भी सदस्य पर कानूनी या प्रशासनिक आंच आने पर एकजुट रहने का संकल्प भी लिया गया.
शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) नगर निगम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कथित मिलीभगत और भ्रष्टाचार के बंटवारे का एक विचित्र मामला सामने आया है. सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हुए एक वीडियो (Viral Video) में कथित तौर पर कई पार्षद हाथ में पवित्र गंगाजल लेकर नगर निगम की कमाई और कमीशन को आपस में बराबर-बराबर बांटने की शपथ लेते नजर आ रहे हैं.
सार्वजनिक धन के खुलेआम बंदरबांट और धार्मिक प्रतीक के दुरुपयोग को लेकर वीडियो वायरल होते ही प्रशासनिक महकमे और जनता के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.
'निगम की कमाई 60 पार्षदों में बराबर बंटेगी': वीडियो में क्या दिखा?
ThePrint की रिपोर्ट के अनुसार, सामने आए वीडियो में एक व्यक्ति हाथ में जल से भरा पात्र लेकर शपथ दिला रहा है और बाकी लोग उसके पीछे शपथ दोहरा रहे हैं:
"हम कसम खाते हैं कि नगर निगम से जो भी कमाई होगी, वह सभी पार्षदों में बराबर बांटी जाएगी. अगर हमारे गुट के किसी भी व्यक्ति पर कोई आंच या परेशानी आएगी, तो हम सभी एकजुट होकर उसके साथ खड़े रहेंगे."
शपथ के दौरान यह भी दोहराया गया कि किसी भी पार्षद के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और सभी 60 पार्षदों में हिस्सा पारदर्शी तरीके से वितरित होगा. साथ ही गुट से गद्दारी करने वालों के लिए अभद्र भाषा का भी इस्तेमाल किया गया.
शाहजहांपुर के पार्षदों ने 'भ्रष्टाचार के पैसे' को बराबर बांटने के लिए गंगाजल हाथ में लेकर शपथ ली
नगर आयुक्त ने दिए जांच के आदेश
वीडियो के सार्वजनिक होने और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पार्षदों की संपत्तियों को लेकर सवाल उठने के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आ गया है.
- प्रशासनिक प्रतिक्रिया: शाहजहांपुर की नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी ने मामले का संज्ञान लेते हुए औपचारिक जांच के आदेश जारी किए हैं.
- वीडियो की समय-सीमा: नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह वीडियो नवंबर 2025 का बताया जा रहा है, जब पूर्व नगर आयुक्त पदस्थ थे.
- कार्रवाई का आश्वासन: उन्होंने कहा कि वीडियो की प्रामाणिकता, उसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान और दावों की विस्तृत जांच कराई जा रही है, और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कानूनी व अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
सोशल मीडिया पर संपत्ति और आचरण को लेकर उठे सवाल
वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
कई पोस्ट्स में यह सवाल उठाया गया कि कुछ पार्षदों की वित्तीय स्थिति और संपत्तियों में पिछले तीन वर्षों के दौरान अप्रत्याशित उछाल कैसे देखने को मिला. जनता के विकास कार्यों के लिए आवंटित बजट और नागरिक राजस्व के कथित दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए लोग इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं.