Sero Survey in Delhi: दिल्ली में दोबारा होगा सीरो सर्वे, जानिए क्या हैं फायदे

मई में देश के 83 जिलों में जो सर्वे किया गया था, उसमें 0.73% लोग संक्रमित पाये गए. दूसरा सर्वे दिल्ली के 11 जिलों में किया गया, जिसमें करीब 23% लोगों में एंटीबॉडी पाए गए, यानी वे संक्रमित हो चुके थे. ऐसे में दिल्ली में दोबोरा सीरो सर्वे शुरू हो रहा है. मास्क समय-समय पर बदलते रहें और इन वस्तुओं को सैनिटाइज करते रहें.

कोरोना से जंग (Photo Credit-PTI)

नई दिल्ली, 3 अगस्त: मई में देश के 83 जिलों में जो सर्वे किया गया था, उसमें 0.73% लोग संक्रमित पाये गए. दूसरा सर्वे दिल्ली (Delhi) के 11 जिलों में किया गया, जिसमें करीब 23% लोगों में एंटीबॉडी पाए गए, यानी वे संक्रमित हो चुके थे. ऐसे में दिल्ली में दोबोरा सीरो सर्वे शुरू हो रहा है. इस सर्वे का कितना फायदा होगा और कोरोना के मरीजों को अब तक कौन सी दवा दी जा रही है, जिससे मॉर्टेलिटी रेट भारत में कम हो रहा है, बता रहे हैं सफदरजंग हॉस्प‍िटल, नई दिल्ली के डॉ नीरज गुप्ता.

डॉ. गुप्ता ने बताया कि फिर से जो सर्वे किया जाएगा उसमें भी हर प्रकार की कम्यूनिटी यानी हर वर्ग के लोगों का सैंपल लिया जाएगा. इससे पता किया जाएगा कि क्या समाज में वायरस फैल चुका है या नहीं, और लोगों में हर्ड इम्यूनिटी की वजह से वायरस नियं‍त्रित हो सकता है या नहीं. यह भी देखा जाता है कि कितने प्रतिशत लोग संक्रमण से बचे हुये हैं और कितने लोगों को वैक्सीन की जरूरत है. सिर्फ दिल्ली में ही नहीं पूरे देश में इस तरह के सर्वे आने वाले दिनों में होंगे.

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स्टिरॉइड से कम हो रही है मोर्टेलिटी

उन्होंने कहा कि अभी वैक्सीन आने में काफी समय में ऐसे किस तरह से संक्रमण को फैलने से रोक सकें और अब वायरस कितना लोगों पर असर कर रहा है, तमाम बातें सर्वे में सामने आती हैं. वहीं संक्रमण से बचाने के लिए दवा पर डॉ नीरज ने कहा कि अब तक कोरोना वायरस की कोई दवा नहीं है, जिसे देकर लोगों की जान बचाई जा सके. डॉक्‍टर केवल लक्षणों से लड़ने की दवा देते हैं. अभी जितनी भी दवाइयां चल रही हैं, सभी प्रयोगात्मक हैं. हाल ही में स्टिरॉइड का ट्रायल यूके में हुआ, जिससे पता चला कि यह कोरोना के गंभीर मरीज को दिया जा सकता है. गंभीर मरीजों की मोर्टेलिटी कम कर सकता है. लेकिन जिनमें ऑक्सीजन की कमी नहीं है, उन्हे देने पर नुकसान भी हो सकता है. ऐसी स्थिति में कौन सी दवा, किस व्यक्ति को बचा सकती है कुछ कह नहीं सकते.

तीन तरह के हो रहे हैं कोरोना टेस्ट

डॉ. नीरज ने कोरोना टेस्ट के बारे में बताया कि पहला आरटी-पीसीआर टेस्ट है, जिसमें 6-8 घंटे लगते हैं. इसे गोल्ड स्टैंडर्ड मानते हैं. इसमें जांच के सही आने की 70% संभावना रहती है. दूसरा एंटीजन टेस्ट है, जिसमें 15 मिनट से आधे घंटे तक में रिपोर्ट आ जाती है. एंटीजन में 40% तक मरीज के पकड़े जाने की संभावना रहती है. अगर इसमें मरीज नेगेटिव है और लक्षण आते हैं, तो ही उनका आरटीपीसीआर टेस्ट करके एक बार कंफर्म किया जाता है. तीसरा ट्रूनेट सिस्टम है, जिसमें रिपोर्ट आने में आधे घंटे से एक घंटे तक का समय लगता है.

मोबाइल, चाबी, रूमाल को रखें दूर

एक अन्य सवाल के जवाब में डॉ. नीरज ने कहा कि वायरस कैसे फैलता है अब सभी को पता है, लेकिन कई बार मोबाइल, कपड़ा, मास्क और रूमाल वो वस्तुएं हैं, जिन पर खांसते वक्त वायरस आकर बैठ जाता है. मोबाइल फोन के अलावा चश्मा, चाबी आदि पर भी वायरस हो सकता है. इसलिए अगर मास्क लगाये रहेंगे तो इन चीजों को छूने के बाद भी मुंह पर हाथ नहीं जाएगा. बेहतर है ऐसी कोई भी चीज छूने के बाद हाथ धोयें. मास्क समय-समय पर बदलते रहें और इन वस्तुओं को सैनिटाइज करते रहें.

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