सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ₹2,000 से ज्यादा के UPI लेनदेन पर शुल्क के मामले में केंद्र सरकार, RBI और NPCI से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने ₹2,000 से अधिक के वाणिज्यिक UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार, RBI और NPCI को नोटिस जारी किया है. अदालत ने इस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट (Photo Credits: File Image)

Supreme Court  on UPI Transactions: सुप्रीम कोर्ट ने 2000 रुपये से अधिक के वाणिज्यिक UPI लेनदेन (Person-to-Merchant) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. हालांकि, शीर्ष अदालत ने 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहे इस नए नियम पर अंतरिम रोक (Stay) लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है.

याचिका में लगाए गए प्रमुख आरोप

यह याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता द्वारा दायर की गई है, जिसमें सरकार के 14 सितंबर के नोटिफिकेशन और 15 सितंबर को घोषित नए एमडीआर (MDR) ढांचे को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह शुल्क बिना किसी पर्याप्त वैधानिक तंत्र, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के लागू किया गया है.  यह भी पढ़े:   UPI Payment Update: यूपीआई यूजर्स को बड़ी राहत, ₹2,000 तक के लेन-देन और RuPay कार्ड पर नहीं लगेगा कोई शुल्क

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

क्या है नया UPI शुल्क ढांचा?

केंद्र सरकार और NPCI द्वारा घोषित नए ढांचे के तहत:

छोटे व्यापारियों और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

याचिका में आशंका जताई गई है कि इस कदम से कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे और मध्यम व्यापारी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ सकता है. याचिकाकर्ता ने मांग की है कि किसी भी नए शुल्क ढांचे को लागू करने से पहले वास्तविक डेटा, मर्चेंट टर्नओवर और भौगोलिक परिस्थितियों का पारदर्शी मूल्यांकन किया जाना चाहिए.

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