सीमा सुरक्षा पर 'सामना' का तीखा प्रहार: ITBP प्रमुख के कथित बयानों का हवाला देकर उद्धव गुट ने सरकार को घेरा; अरुणाचल सीमा पर उठाए गंभीर सवाल
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के हालिया बयानों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को छिपाने का आरोप लगाया है। संपादकीय में दावा किया गया है कि आईटीबीपी प्रमुख ने अरुणाचल प्रदेश सीमा के असाफिला क्षेत्र में चीनी सैनिकों के अतिक्रमण और पिछले चार महीनों से जारी तनातनी का उल्लेख किया था.
मुंबई: भारत-चीन सीमा पर स्थिति को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है. पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के हालिया वक्तव्य का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि अरुणाचल प्रदेश सीमा पर जमीनी सुरक्षा से जुड़ी वास्तविकताओं को जनता से छिपाया जा रहा है.
संपादकीय में दावा किया गया कि आईटीबीपी प्रमुख के खुलासों ने सीमा सुरक्षा को लेकर सरकार के आधिकारिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
'सामना' में आईटीबीपी महानिदेशक के भाषण का हवाला
संपादकीय के अनुसार, आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने हाल ही में बल के स्थापना दिवस से जुड़े कार्यक्रम के दौरान पूर्वी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी गतिरोध का जिक्र किया था:
- अतिक्रमण और शिविरों का दावा: संपादकीय में आरोप लगाया गया कि चीनी सेना ने असाफिला क्षेत्र में भारतीय सीमा के भीतर प्रवेश कर अग्रिम शिविर स्थापित किए हैं और पिछले चार महीनों से दोनों देशों की सेनाओं के बीच रुक-रुक कर टकराव की स्थितियां बनी हुई हैं..
- आधुनिक युद्ध और ड्रोन तकनीक: पार्टी के अनुसार, सैन्य अधिकारियों ने माना है कि ड्रोन और तकनीकी निगरानी के व्यापक उपयोग से युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है.
- वीडियो हटाने पर सवाल: 'सामना' ने दावा किया कि जब इस संबोधन को लेकर सार्वजनिक स्तर पर चर्चा शुरू हुई, तो संबंधित भाषण का आधिकारिक वीडियो संबंधित प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जो सूचना को दबाने के प्रयास का संकेत देता है.
चेतावनियों और पूर्व सैन्य प्रमुख की किताब का उल्लेख
संपादकीय में विपक्ष और नागरिक समाज द्वारा पहले उठाए गए मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया गया:
- विपक्ष और स्थानीय निवासियों की आवाज: संपादकीय में कहा गया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा अरुणाचल के स्थानीय जनजातीय समुदाय और युवाओं ने जब भी चीनी गतिविधियों की ओर ध्यान आकर्षित किया, उनके बयानों को सरकार ने भ्रामक बताकर खारिज कर दिया.
- जनरल नरवणे की आत्मकथा: संपादकीय में पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की संस्मरण पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' (Four Stars of Destiny) का संदर्भ देते हुए कहा गया कि 31 अगस्त 2020 की रात पैंगोंग झील क्षेत्र में चीनी टैंकों की हलचल के दौरान स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव का उल्लेख पुस्तक में दर्ज है, जिस पर कथित तौर पर प्रशासनिक पाबंदियां लगाई गईं.
- सोनम वांगचुक का संदर्भ: लद्दाख में पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक द्वारा सीमावर्ती चरागाहों और चीनी अतिक्रमण के मुद्दे उठाने पर उनके प्रति अपनाए गए रुख की भी संपादकीय में आलोचना की गई.
कूटनीतिक प्राथमिकताओं और राजनीतिक जवाबदेही पर सवाल
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने सीमा पर तैनात सैनिकों के संघर्ष और नई दिल्ली में चल रही राजनयिक वार्ताओं के बीच अंतर पर आपत्ति जताई:
- कूटनीतिक आयोजन बनाम सीमाई चुनौतियां: संपादकीय में कहा गया कि जब सीमा पर सैनिक अत्यधिक कठिन परिस्थितियों में सुरक्षा में जुटे हैं, तब कूटनीतिक मंचों पर सामान्य स्थिति का प्रदर्शन अग्रिम मोर्चे पर डटे जवानों के समर्पण के साथ न्याय नहीं करता.
- जवाबदेही तय करने की मांग: 'सामना' ने पुलवामा, पहलगाम और पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल सीमा तक की सुरक्षा चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के मामले में नेतृत्व को लोकतांत्रिक जवाबदेही से पीछे नहीं हटना चाहिए.