गोद लेने के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का दर्जा नहीं दिया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि गोद लेने के अधिकार को भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का दर्जा नहीं दिया जा सकता है. अदालत बच्चों की देखभाल और संरक्षण द्वारा जारी एक कार्यालय ज्ञापन को चुनौती देने वाले विभिन्न संभावित दत्तक माता-पिता (पीएपी) की दायर याचिकाओं की एक श्रृंखला पर सुनवाई कर रही थी.
नई दिल्ली, 20 फरवरी : दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि गोद लेने के अधिकार को भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का दर्जा नहीं दिया जा सकता है. अदालत बच्चों की देखभाल और संरक्षण द्वारा जारी एक कार्यालय ज्ञापन को चुनौती देने वाले विभिन्न संभावित दत्तक माता-पिता (पीएपी) की दायर याचिकाओं की एक श्रृंखला पर सुनवाई कर रही थी. न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि किशोर न्याय सीएआरए अधिनियम, 2015 के तहत जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अंतिम गोद लेने का आदेश पारित होने से पहले पीएपी अपनी पसंद के गोद लेने की मांग नहीं कर सकते हैं.
ज्ञापन में कहा गया है कि दो जैविक बच्चों वाले भावी माता-पिता, उनकी पंजीकरण तिथि की परवाह किए बिना केवल विशेष जरूरतों या अन्य विशिष्ट श्रेणियों वाले बच्चों को गोद लेने के पात्र होंगे. पीएपी की दलीलों को खारिज करते हुए अदालत ने बताया कि गोद लेने की पात्रता के लिए जैविक बच्चों की संख्या कम करने के पीछे नीतिगत प्रेरणा का उद्देश्य विशेष जरूरत वाले बच्चों को प्राथमिकता देना है. यह भी पढ़ें : योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश का कायाकल्प कर दिया : पीयूष गोयल
अदालत ने गोद लेने के लिए उपलब्ध सामान्य बच्चों की संख्या और भावी माता-पिता की संख्या के बीच असंतुलन पर ध्यान दिया. माता-पिता के लिए प्रतीक्षा समय को कम करने और बच्चों के हितों को प्राथमिकता देने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की वकालत की. अदालत ने कहा कि गोद लेने की प्रक्रिया भावी माता-पिता के अधिकारों पर बच्चों के कल्याण को प्राथमिकता देती है और प्री-रेफ़रल चरण में सामान्य बच्चे को गोद लेने की कोई उम्मीद नहीं है.
अदालत ने स्पष्ट किया कि गोद लेने के नियम 2022, जिसमें जैविक बच्चों की संख्या के संबंध में प्रावधान शामिल है, पूर्वव्यापी रूप से संचालित होते हैं और पीएपी के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करते हैं, क्योंकि अंतिम गोद लेने का आदेश जारी होने तक कोई निहित अधिकार अर्जित नहीं होता है. अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि पहले से पंजीकृत पीएपी पर दत्तक ग्रहण विनियम 2022 का आवेदन पूर्वव्यापी आवेदन नहीं है, क्योंकि उनके गोद लेने के अधिकार अभी तक कानून के तहत ठोस नहीं हुए हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 20, 2024 04:27 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

