Ram Temple Donation Case: गिनती कक्ष में महीनों तक चलता रहा खेल! CCTV ने खोला ऐसा राज, चार्जशीट में हुए कई चौंकाने वाले खुलासे
यह मामला जून 2026 में दर्ज किया गया था, जब प्रारंभिक जांच में दान राशि के कथित गबन के संकेत मिले थे. SIT की अगुवाई लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस ने की, जबकि फैजाबाद रेंज के डीआईजी सोमन वर्मा और अयोध्या एसएसपी गौरव ग्रोवर जांच टीम के सदस्य रहे.
Ram Temple Donation Theft Case: अयोध्या के राम मंदिर दान चोरी मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने कोर्ट में दाखिल अपनी करीब 70,000 पन्नों की चार्जशीट में कई बड़े खुलासे किए हैं. चार्जशीट के मुताबिक, CCTV फुटेज में आरोपी अविनाश शुक्ला को दान गिनने वाले कमरे (Counting Room) से 85 बार नकदी निकालते हुए देखा गया है. जांच में यह भी दावा किया गया है कि दान की रकम का इस्तेमाल जमीन, मकान और वाहन खरीदने जैसे अवैध लेनदेन में किया गया. Ayodhya Ram Mandir Case: राम मंदिर दान चोरी मामले में 25 सितंबर तक दाखिल होगी पहली चार्जशीट; सुप्रीम कोर्ट में SIT ने कहा- CCTV में कैद हैं 105 घटनाएं
CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा सबूत
SIT की चार्जशीट के अनुसार, दान चोरी मामले में CCTV फुटेज, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक ट्रांजैक्शन और बरामदगी को डिजिटल सबूत के तौर पर पेश किया गया है. जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी कई महीनों तक आपस में लगातार संपर्क में थे और सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देते रहे.
चार्जशीट के अनुसार, आरोपी अविनाश शुक्ला को CCTV में 85 बार गिनती कक्ष से नकदी निकालते हुए देखा गया. वहीं, जांच में कुल 105 से अधिक ऐसे मामले सामने आए, जिनमें नकदी निकालने या छिपाने की बात कही गई है.
अन्य आरोपियों की भी CCTV में भूमिका
चार्जशीट में अन्य आरोपियों की भूमिका का भी जिक्र किया गया है.
करुणेश पांडे को 2 बार नकदी निकालते और 68 बार अन्य आरोपियों की मदद करते देखा गया.
मनीष यादव 16 बार नकदी निकालते और 19 बार सहयोग करते नजर आए.
लवकुश मिश्रा एक बार नकदी निकालते और 52 बार मदद करते दिखे.
अनुकल्प मिश्रा 56 बार सह-आरोपियों की मदद करते दिखाई दिए.
रामाशंकर मिश्रा को एक बार नकदी निकालते हुए देखा गया.
चोरी के पैसों से खरीदे गए मकान, जमीन और वाहन
SIT के मुताबिक, आरोपियों से आभूषण भी बरामद किए गए हैं. जांच में दावा किया गया है कि चोरी की गई दान राशि का इस्तेमाल मकान, जमीन और वाहन खरीदने में किया गया. चार्जशीट के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा के पिता ने कथित तौर पर चोरी के पैसों से मकान खरीदा. वहीं, लवकुश मिश्रा ने कथित रूप से 43.43 लाख रुपये खर्च कर मकान और जमीन खरीदी.
फॉरेंसिक ऑडिट में भी हुई जांच
जांच के दौरान फॉरेंसिक ऑडिट भी कराया गया, जिसमें यह देखा गया कि दान की राशि कैसे संभाली गई, बैंकों में जमा की गई और बाद में कथित तौर पर अवैध लेनदेन में इस्तेमाल हुई. ऑडिट के दौरान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ऑडिटेड वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की गई.
ट्रस्ट के पदाधिकारी बनाए गए गवाह
चार्जशीट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, पूर्व ट्रस्ट प्रशासक गोपाल राव, पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को गवाह बनाया गया है.
जून में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला जून 2026 में दर्ज किया गया था, जब प्रारंभिक जांच में दान राशि के कथित गबन के संकेत मिले थे. SIT की अगुवाई लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस ने की, जबकि फैजाबाद रेंज के डीआईजी सोमन वर्मा और अयोध्या एसएसपी गौरव ग्रोवर जांच टीम के सदस्य रहे.