आर्थिक मोर्चे पर बढ़ी चुनौती: जीडीपी वृद्धि दर पांच साल में सबसे कम, बेरोजगारी 45 साल में सबसे अधिक
शपथ लेने के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार के लिये शुक्रवार का पहला दिन आर्थिक मोर्चे पर बुरी खबर लेकर आया. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों के खराब प्रदर्शन से 2018-19 की चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत रही जो पांच साल में सबसे कम है.
नई दिल्ली : शपथ लेने के बाद नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार के लिये शुक्रवार का पहला दिन आर्थिक मोर्चे पर बुरी खबर लेकर आया. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (Central Statistics Office) के अनुसार कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों के खराब प्रदर्शन से 2018-19 की चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत रही जो पांच साल में सबसे कम है. इससे भारत आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर चीन से पिछड़ गया. राष्ट्रीय आय पर सीएसओ के आंकड़े के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में पूरे साल के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर भी घटकर पांच साल के न्यूनतम स्तर 6.8 प्रतिशत (2011-12 की कीमतों पर) रही है.
इससे पूर्व वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही थी. आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा है कि 6.8 प्रतिशत वार्षिक जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों के लिहाज से भी भारत दुनिया में सबसे ऊंची वृद्धि हासिल करने वाला देश बना हुआ है. सीएसओ द्वारा जारी बेरोजगारी का 2017-18 का आंकड़ा भी चिंता बढ़ाने वाला है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 2017- 18 में बेरोजगारी दर कुल उपलब्ध कार्यबल का 6.1 प्रतिशत रही जो पिछले 45 साल में सर्वाधिक है.
यह भी पढ़ें : बेरोजगारी दर 45 साल के ऊंचे स्तर पर, सरकार ने पहले ठुकराया, अब स्वीकार किया
आम चुनाव से पहले बेरोजगारी के आंकड़ों पर जो रिपोर्ट लीक हुई थी शुक्रवार को सरकारी आंकड़ों में उसकी पुष्टि हो गई. हालांकि, मुख्य सांख्यिकीविद प्रवीण श्रीवास्तव ने जोर देकर कहा कि रोजगार के इस नये सर्वेक्षण की पिछले आंकड़े से तुलना नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि नये सर्वेक्षण में मापने के तौर-तरीके अलग हैं. इसकी पिछले आंकड़ों से तुलना ठीक नहीं.
उन्होंने कहा ‘‘वह यह दावा नहीं करना चाहते कि आंकड़ा 45 साल का न्यूनतम या अधिक है क्योंकि यह एक अलग पैमाना है.’’ आठ बुनियादी उद्योगों में भी अप्रैल में नरमी रही. इस क्षेत्र में वृद्धि दर धीमी पड़कर 2.6 प्रतिशत रह गयी. कुल औद्योगिक उत्पादन में इस खंड की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है. बहरहाल, वित्तीय मोर्चे पर कुछ राहत रही. वित्त वर्ष 2018-19 के लिये राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.39 प्रतिशत रहा है जो बजट के 3.40 प्रतिशत के संशोधित अनुमान की तुलना में मामूली कम है.
इस बीच, सरकार ने कृषि क्षेत्र को गति देने के लिये प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का दायरा बढ़ाते हुए सभी किसानों को 6,000 रुपये सालाना देने की घोषणा की है. साथ ही किसानों और खुदरा कारोबारियों एवं दुकानदारों के लिये पेंशन योजना की घोषणा की. जीडीपी आंकड़े पर टिप्पणी करते हुए आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि मार्च 2019 को समाप्त वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट एनबीएफसी क्षेत्र में दबाव जैसे अस्थायी कारकों की वजह से आई है.
उन्होंने यह भी कहा कि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भी आर्थिक गतिविधियां धीमी रह सकती है लेकिन उसके बाद इसमें तेजी आएगी. गर्ग ने यह भी कहा कि 6.8 प्रतिशत सालाना आर्थिक वृद्धि के आधार पर भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से वृद्धि हासिल करने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है. हालांकि 2018-19 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत रही जो चीन की जनवरी-मार्च 2019 को समाप्त तिमाही में 6.4 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले कम है.
सीएसओ के आंकड़े के अनुसार सकल मूल्य वर्द्धन (जीवीए) 2018-19 की चौथी तिमाही 5.7 प्रतिशत रही जो इससे पूर्व वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 7.9 प्रतिशत थी. आर्थिक गतिविधियों में गिरावट का मुख्य कारण कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों का खराब प्रदर्शन है. कृषि, वानिकी और मत्स्यन क्षेत्रों का जीवीए 2018-19 की चौथी तिमाही में 0.1 प्रतिशत घटा जबकि 2017-18 की चौथी तिमाही में इसमें 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी.
विनिर्माण क्षेत्र में नरमी काफी तीव्र रही. जीवीए वृद्धि दर आलोच्य तिमाही 3.1 प्रतिशत रही जो 2017-18 की चौथी तिमाही में 9.5 प्रतिशत थी. सीएसओ के आंकड़े के अनुसार देश की प्रति व्यक्ति आय मार्च 2019 को समाप्त वित्त वर्ष में 10 प्रतिशत बढ़कर 10,534 रुपये महीना पहुंच जाने का अनुमान है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 01, 2019 12:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

