राजनीति

सोलोमन आइलैंड्स पर चीनी पुलिस की तैनाती से चिंता

चीन की यात्रा पर गए सोलोमन आइलैंड्स के प्रधानमंत्री मनासे सोगावारे ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए.

सोलोमन आइलैंड्स पर चीनी पुलिस की तैनाती से चिंता
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

चीन की यात्रा पर गए सोलोमन आइलैंड्स के प्रधानमंत्री मनासे सोगावारे ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इसमें इस द्वीपीय देश में 2025 तक चीन की पुलिस की तैनाती का समझौता भी शामिल है जिस पर ऑस्ट्रेलिया ने चिंता जताई है.अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के अलावा सोलोमन आईलैंड्स में विपक्षी दल ने भी इस पुलिस समझौते का विस्तृत ब्यौरा प्रकाशित करने को कहा है. चीन के साथ इस करार को लेकर चिंता जताई जा रही है कि यह इस क्षेत्र में संघर्ष को बढ़ावा देगा. ऑस्ट्रेलिया सोलोमन को आर्थिक और सैन्य मदद देने वाला पुराना साथी रहा है. राजधानी ओनियाहा में पत्रकारों से बातचीत में सोगावारे ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया को सोलोमन आईलैंड्स में चीनी पुलिस की मौजूदगी से घबराने की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, "चीन-सोलोमन संबंधों को निशाना बनाना खराब पड़ोसी वाली हरकत है और सम्मान की कमी दिखाती है." चीन ने सोलोमन आइलैंड्स को वित्तीय सहायत देने की भी हामी भरी है.

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विदेशी हस्तक्षेप

9 से 15 जुलाई के बीच चीन में रहे सोगावारे की खूब आवभगत हुई. सोलोमन आईलैंड्स ने 2019 में बीजिंग से संबंध गहरा करने के इरादे से ताइवान के साथ अपने कूटनीतिक रिश्ते तोड़ लिए थे. जाहिर है चीन ने इस देश की झोली आर्थिक मदद और निवेश से भरने का वादा निभाया. सोगावारे का कहना है कि चीन उस वक्त मदद के लिए आगे आया है जब कुछ विदेशी मददगारों ने सहायता देने में देरी की.

किसी भी वित्तीय लेन-देन का ब्यौरा दिए बिना बस इतना सोगावारे ने बस इतना बताया है कि चीन की तरफ से यह मदद परियोजनाओं के तौर पर दी जाएगी. ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और न्यूजीलैंड की आपत्तियों के सवाल पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, यह कुछ और नहीं किसी देश के अंदरूनी मामलों में विदेशी हस्तक्षेप है. उनका यह भी कहना है कि चीन ने कभी किसी देश पर चढ़ाई नहीं की. किसी देश पर कब्जा नहीं किया या किसी को गुलाम नहीं बनाया है.

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विपक्षी दल का विरोध

चीन के साथ पुलिस डील करने और चीन यात्रा के खर्च को लेकर विपक्षी पार्टी ने सोलोमन सरकार को घेरा है. विपक्ष के नेता मैथ्यू वेल ने कहा कि वित्तीय दस्तावेजों से पता चलता है कि 30 लोगों के दल की इस चीन यात्रा पर जनता का बहुत सारा पैसा बहाया गया है. इसमें से कुछ लोग तो सिर्फ टूरिस्ट की तरह घूमने चले गए. वेल ने बताया, "पिछले हफ्ते टीचरों की तनख्वाह में देरी हुई अस्पतालों में पैनाडॉल जैसी साधारण दवाइयां नहीं है, हमारी सड़के खस्ताहाल हैं, बिजली-पानी की व्यवस्था चौपट है. यह हमारी अर्थव्यवस्था को संभालने का बेहद नाजुक समय है". सोगावारे का कहना है कि इस यात्रा का ज्यादातर खर्चा चीन ने उठाया और बाकी का पैसा उन कंपनियों ने जिन्होने इस दौरे में हिस्सा लिया.

एसबी/एनआर (एएफपी)

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 17, 2023 03:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).