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Paper Leak Row: 'फास्ट-ट्रैक कोर्ट' के ऐलान पर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर पलटवार, रखीं 3 प्रमुख मांगें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन के ऐलान के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उन पर सीधा हमला बोला है. राहुल गांधी ने इस कदम को नाकाफी बताते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत तीन प्रमुख मांगें दोहराई हैं.

Paper Leak Row: 'फास्ट-ट्रैक कोर्ट' के ऐलान पर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर पलटवार, रखीं 3 प्रमुख मांगें
राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo Credits: X/ @PTI_News, @BJP4India)

नई दिल्ली: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक को लेकर देश में जारी राजनीतिक और सामाजिक हलचल के बीच वार-पलटवार का दौर तेज हो गया है. केंद्र सरकार द्वारा पेपर लीक (Paper Leak) मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Courts) गठित करने की घोषणा के तुरंत बाद, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर सीधा हमला बोला है.

राहुल गांधी ने सरकार के इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि देश की शिक्षा प्रणाली के व्यवस्थित पतन के लिए स्वयं केंद्र सरकार जिम्मेदार है. यह भी पढ़ें: Fast-Track Courts For Paper Leaks: 'युवाओं के भविष्य से बड़ा कुछ नहीं'; पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएगी केंद्र सरकार, पीएम मोदी का बड़ा ऐलान

"युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान आपने पहुंचाया"

प्रधानमंत्री मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने एक्स (X) पर लिखा कि महज अदालतों का गठन करने से लाखों छात्रों के साथ हुई नाइंसाफी कम नहीं होगी. उन्होंने कहा:

"हमारे देश के युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान आपने ही पहुंचाया है. आपने हमारी पूरी शिक्षा प्रणाली के विनाश और उस पर कब्जे को बढ़ावा दिया — और इसके लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया."

राहुल गांधी ने PM मोदी के फास्ट-ट्रैक कोर्ट प्लान को खारिज किया

विपक्ष की 3 प्रमुख मांगें

राहुल गांधी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि जब तक सरकार छात्रों की मूलभूत मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक केवल न्यायिक प्रक्रियाओं की घोषणा से बात नहीं बनेगी. उन्होंने विपक्ष और प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से तीन प्रमुख मांगें रखीं:

  1. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से तुरंत बर्खास्त किया जाए.
  2. प्रधानमंत्री का क्षमा याचना: प्रभावित लाखों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से माफी मांगें.
  3. पुलिस कार्रवाई पर कार्रवाई: प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग और लाठीचार्ज करने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो.

पीएम आवास के बाहर धरना और सीजेपी का आंदोलन

यह बयानबाजी ऐसे समय में हुई है जब राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन अपने चरम पर हैं. इस सप्ताह की शुरुआत में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य वरिष्ठ विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के निकट उच्च-सुरक्षा क्षेत्र में धरना दिया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था.

इसके साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कई छात्र संगठनों के नेतृत्व में हजारों युवा जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं और 'संसद चलो' मार्च के प्रयास कर रहे हैं. प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हुई झड़पों में कई लोग घायल हुए हैं, जिसने संसद से लेकर सड़कों तक तनाव बढ़ा दिया है.

संसद में गतिरोध बरकरार

केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह व स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा का कहना है कि सरकार संवाद के लिए तैयार है और संसद में सभी मुद्दों पर चर्चा कराने का रुख रखती है. हालांकि, विपक्ष द्वारा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की जिद और छात्रों के जारी आंदोलन के कारण राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दे पर बना प्रशासनिक गतिरोध फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 23, 2026 12:21 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).