Pahalgam Terror Attack: सीआरपीएफ जवान की पाकिस्तानी बेगम, अवैध रूप से रह रही थी भारत; पहलगाम हमले के बाद भेजा गया बार्डर पार (Watch Video)
CRPF जवान मुनीर खान की पत्नी मीनल खान, जो पाकिस्तान की नागरिक हैं, उन्हें भी भारत से वापस भेज दिया गया. मीनल और मुनीर की मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी. धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदली और फिर 2024 में दोनों ने ऑनलाइन शादी कर ली.
CRPF Jawan's Pakistani Wife: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है. सरकार ने पाकिस्तान के नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं तत्काल प्रभाव से बंद कर दी हैं. इसके साथ ही भारत में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का निर्देश दिया है. इसी फैसले के तहत CRPF जवान मुनीर खान की पत्नी मीनल खान, जो पाकिस्तान की नागरिक हैं, उन्हें भी भारत से वापस भेज दिया गया. मीनल और मुनीर की मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी. धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदली और फिर 2024 में दोनों ने ऑनलाइन शादी कर ली.
शादी के बाद मीनल भारत आ गई थीं और जम्मू के घरोटा में मुनीर के साथ रह रही थीं. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद माहौल बदल गया.
सीआरपीएफ जवान की पाकिस्तानी बेगम
पति को गले लगाकर किया अलविदा
वाघा बॉर्डर से वापसी
सरकारी आदेश के बाद मीनल को जम्मू से वाघा बॉर्डर ले जाया गया, जहां से उन्हें पाकिस्तान भेज दिया गया. रवाना होते वक्त मीनल काफी भावुक नजर आईं. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैं भारत सरकार से अपील करती हूं कि पाकिस्तान से शादी कर भारत आई महिलाओं को उनके बच्चों और परिवार से जुदा न किया जाए. हम निर्दोष हैं. हम भी आतंकवाद की निंदा करते हैं. दोषियों को सजा जरूर दीजिए, लेकिन हमारे पारिवारिक जीवन को राजनीति से न जोड़ा जाए."
मुनीर खान, जो कि एक संवेदनशील बल में कार्यरत हैं, अब अपनी पत्नी से बिछड़ चुके हैं. उन्होंने कहा, "मैंने प्यार में शादी की थी, कानून तोड़ने का कोई इरादा नहीं था. अब मेरी पत्नी को मुझसे दूर किया जा रहा है, यह बहुत दुखद है."
क्या कहती है सरकार
भारत सरकार का साफ कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर यह फैसला जरूरी था. पाकिस्तान से आने वाले नागरिकों पर अब सख्त नजर रखी जा रही है. गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत में रह रहे सभी पाकिस्तानी नागरिकों को 27 अप्रैल (सामान्य वीजा) और 29 अप्रैल (मेडिकल वीजा) तक देश छोड़ने का आदेश दिया गया है.
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. एक ओर लोग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल बता रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ लोग इसे इंसानियत और भावनाओं से जुड़ा मामला बता रहे हैं.