Old Monk Ban: बॉम्बे हाईकोर्ट में ओल्ड मोंक निर्माता की दलील; खोपोली प्लांट बंद होने से महाराष्ट्र को 300 करोड़ के आबकारी राजस्व का नुकसान, 300 कर्मचारी बेरोजगार

भारत के सबसे लोकप्रिय रम ब्रांड 'ओल्ड मोंक' (Old Monk) के निर्माता मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर प्राइवेट लिमिटेड ने बॉम्बे हाईकोर्ट को सूचित किया है कि खोपोली स्थित उसकी निर्माण इकाई के बंद होने से महाराष्ट्र सरकार को अब तक 300 करोड़ रुपये से अधिक के आबकारी (एक्साइज) राजस्व का नुकसान हो चुका है.

Old Monk (File Image)

मुंबई: देश के प्रतिष्ठित और सबसे ज्यादा बिकने वाले डार्क रम ब्रांड 'ओल्ड मोंक' की बिक्री और लेबलिंग को लेकर छिड़ा कानूनी विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट में पहुंच गया है. निर्माता कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर प्राइवेट लिमिटेड ने अदालत को बताया कि विनियामक अड़चनों के कारण महाराष्ट्र के खोपोली स्थित विनिर्माण संयंत्र के बंद होने से राज्य के खजाने को भारी वित्तीय चोट पहुंच रही है.

मुख्य न्यायाधीश एम. सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ के समक्ष सोमवार, 12 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान कंपनी ने पक्ष रखते हुए कहा कि अकेले महाराष्ट्र में लगी रोक से राज्य को अब तक 300 करोड़ रुपये से अधिक के आबकारी राजस्व से हाथ धोना पड़ा है.

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अदालत में कंपनी का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने इस बात पर जोर दिया कि देश के अन्य सभी राज्यों में ओल्ड मोंक का निर्माण और वितरण सामान्य रूप से जारी है:

लेबलिंग विवाद: 'रम' बनाम 'रम-लाइक' (Rum-like) पर खींचतान

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, यह विधिक गतिरोध भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा कंपनी के उत्पाद लेबल को खारिज करने के बाद पैदा हुआ:

पेय उद्योग पर एफएसएसएआई की सख्त कार्रवाई

ओल्ड मोंक के खिलाफ यह कदम पेय पदार्थों की मानक लेबलिंग को लेकर चल रहे एफएसएसएआई के व्यापक अभियान का हिस्सा है:

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले में पक्षों को सुनने के बाद गुण-दोष के आधार पर अगली विस्तृत सुनवाई 23 अक्टूबर को निर्धारित की है.

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