New Ambulance Policy: महाराष्ट्र में एंबुलेंस सेवाओं के लिए जल्द आएगी नई पॉलिसी, मोबाइल ऐप से मिलेगी लाइव लोकेशन और तय किराए की जानकारी

महाराष्ट्र सरकार राज्य में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए जल्द ही 'महाराष्ट्र राज्य एंबुलेंस नीति' लागू करेगी. इसके तहत एक मोबाइल ऐप विकसित किया जाएगा, जिसके माध्यम से नागरिक नजदीकी एंबुलेंस की रियल-टाइम लोकेशन, पहुंचने का समय और तय किराया जान सकेंगे.

Maharashtra New Ambulance Policy: महाराष्ट्र सरकार राज्य में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक त्वरित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से जल्द ही 'महाराष्ट्र राज्य एंबुलेंस नीति' लागू करने जा रही है. राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस नई नीति की घोषणा की. इसके तहत राज्य की सभी पंजीकृत एंबुलेंसों को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा. इससे एंबुलेंस की उपलब्धता, स्थान, पहुंचने का समय और किराए पर रियल-टाइम निगरानी रखी जा सकेगी.

मोबाइल ऐप और डिजिटल सुविधाएं

नई नीति के तहत चार अलग-अलग श्रेणी के डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप विकसित किए जाएंगे. आम नागरिकों के लिए बनने वाले ऐप के माध्यम से निम्नलिखित सुविधाएं मिलेंगी:  यह भी पढ़े: मध्य प्रदेश: सफर के दौरान एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म, पिता की गोद में 21 वर्षीय मरीज ने तोड़ा दम

मनमाने किराए पर लगेगी लगाम

वर्तमान में महाराष्ट्र में 108 आपातकालीन सेवा (MEMS) के तहत लगभग 1,076 एंबुलेंस संचालित हैं. इसके अलावा निजी अस्पतालों, ट्रस्टों और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा 4,500 से 5,000 एंबुलेंस चलाई जा रही हैं. एकीकृत व्यवस्था न होने के कारण आपातकाल के समय मरीजों के परिजनों से मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें आती रहती हैं.

सरकार एआईएस-125 (AIS-125) मानकों के तहत विभिन्न एंबुलेंस श्रेणियों के लिए अधिकतम किराया दरें अधिसूचित करेगी. ऐप पर दर सूची प्रदर्शित करना सभी पंजीकृत एंबुलेंस संचालकों के लिए अनिवार्य होगा.

आरटीओ और स्वास्थ्य विभाग के लिए डिजिटल डैशबोर्ड

नई प्रणाली में चालकों के लिए अलग ऐप और एंबुलेंस में लगे टैबलेट के माध्यम से मरीज का महत्वपूर्ण चिकित्सा डेटा दर्ज करने की सुविधा होगी. क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) और स्वास्थ्य विभाग के लिए एक केंद्रीय डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा. इसके जरिए एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम, ड्राइवरों द्वारा इमरजेंसी कॉल अस्वीकार किए जाने और किसी भी तरह के दुरुपयोग पर प्रशासनिक नजर रखी जाएगी.

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के अनुसार, किसी भी दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी के बाद शुरुआती कुछ मिनट (गोल्डन आवर) मरीज की जान बचाने के लिए बेहद संवेदनशील होते हैं. तकनीक और पारदर्शिता के समन्वय से मरीजों को सही समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा.

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